हीट स्ट्रोक से बचाव: भीषण गर्मी में NHM की जरूरी सलाह, जानें लक्षण और उपाय
सारांश
Key Takeaways
- नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने भीषण गर्मी के बीच हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए राष्ट्रव्यापी एडवाइजरी जारी की है।
- दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने और भारी काम करने से बचें — यह सबसे खतरनाक समय होता है।
- हीट स्ट्रोक के लक्षणों में तेज बुखार, चक्कर, उल्टी और बेहोशी शामिल हैं — लक्षण दिखते ही तुरंत कार्रवाई करें।
- पीड़ित को ठंडी जगह लिटाएं, गर्दन, कलाई और तलवों पर ठंडी पट्टी रखें और छोटे-छोटे घूंट में पानी पिलाएं।
- चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक से परहेज करें; ORS, नींबू पानी और नारियल पानी पिएं।
- जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार 2030 तक हीट स्ट्रोक से होने वाली मौतें दोगुनी हो सकती हैं यदि उत्सर्जन नियंत्रण नहीं हुआ।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देशभर में भीषण गर्मी के बीच हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर सावधानी और सही प्राथमिक उपचार से इस जानलेवा स्थिति से बचा जा सकता है।
क्यों खतरनाक है हीट स्ट्रोक?
हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान अचानक और तेजी से बढ़ जाता है और शरीर की प्राकृतिक ठंडक बनाए रखने की क्षमता पूरी तरह जवाब दे देती है। यह स्थिति केवल असुविधाजनक नहीं, बल्कि जानलेवा भी हो सकती है।
स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर वर्ष मई-जून के महीनों में लू और हीट स्ट्रोक से सैकड़ों मौतें दर्ज होती हैं। गौरतलब है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में तापमान 45°C से ऊपर जाने पर यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
NHM की एडवाइजरी: किन बातों का रखें ध्यान
नेशनल हेल्थ मिशन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच का समय सबसे खतरनाक होता है। इस दौरान बाहर निकलने और भारी शारीरिक श्रम से बचना चाहिए।
एनएचएम ने यह भी अपील की है कि बच्चों को बंद गाड़ी में अकेला न छोड़ें, क्योंकि बंद वाहन के अंदर तापमान बाहर की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ता है। यह सावधानी जानलेवा हादसों से बचा सकती है।
हीट स्ट्रोक से बचाव के व्यावहारिक उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निम्नलिखित उपाय सुझाए हैं जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाया जा सकता है:
पर्याप्त पानी पिएं: पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे। ओआरएस घोल, नींबू पानी और नारियल पानी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करते हैं।
कैफीन और शर्करायुक्त पेय से बचें: चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक शरीर को और अधिक डिहाइड्रेट करते हैं, इसलिए इनसे दूरी बनाएं।
उचित कपड़े पहनें: हल्के रंग के ढीले सूती वस्त्र पहनें। गहरे रंग के कपड़े अधिक गर्मी अवशोषित करते हैं जिससे शरीर का तापमान बढ़ता है।
बाहर काम करने वाले सावधान रहें: खेत मजदूर, निर्माण श्रमिक और अन्य बाहरी कामगार हर 15-20 मिनट में छांव में विश्राम करें और पानी पीते रहें।
हीट स्ट्रोक के लक्षण और तत्काल प्राथमिक उपचार
यदि किसी व्यक्ति में तेज बुखार, चक्कर आना, उल्टी, अत्यधिक पसीना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएं:
पीड़ित को किसी ठंडी और हवादार जगह पर लिटाएं। गर्दन, कलाई और पैरों के तलवों पर ठंडे पानी की पट्टी रखें। उन्हें छोटे-छोटे घूंट में ठंडा पानी पिलाएं और स्थिति में सुधार होने पर फल, जूस या हल्का भोजन दें।
यदि लक्षण गंभीर हों और व्यक्ति बेहोश हो जाए तो बिना देर किए नजदीकी अस्पताल या आपातकालीन सेवा (108) से संपर्क करें।
विशेषज्ञ विश्लेषण: जलवायु परिवर्तन और बढ़ता हीट स्ट्रोक संकट
यह ध्यान देने योग्य है कि भारत में गर्मी की लहरें पिछले एक दशक में अधिक तीव्र और लंबी होती जा रही हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 2024 भारत के सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा। जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर उत्सर्जन नियंत्रण नहीं हुआ तो 2030 तक हीट स्ट्रोक से होने वाली मौतें दोगुनी हो सकती हैं।
विडंबना यह है कि जहां एक ओर सरकार जलवायु अनुकूलन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर देश के कई सरकारी अस्पतालों में आईसीयू और इमरजेंसी वार्ड में पर्याप्त संसाधनों की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे मई और जून का महीना नजदीक आएगा, तापमान और अधिक बढ़ने की संभावना है। ऐसे में एनएचएम और राज्य सरकारों की एडवाइजरी का पालन करना न केवल जरूरी बल्कि जीवन-रक्षक साबित हो सकता है।