कुर्मासन योग: तनाव, कब्ज और कमर दर्द से मुक्ति दिलाए, पेट की चर्बी भी होगी कम
सारांश
Key Takeaways
- कुर्मासन संस्कृत के शब्द 'कुर्म' (कछुआ) और 'आसन' से मिलकर बना है, जिसे अंग्रेजी में Tortoise Pose कहते हैं।
- यह आसन रीढ़ की हड्डी में खिंचाव और रक्त संचार बेहतर कर कमर दर्द से राहत दिलाता है।
- पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस, कब्ज व अपच में राहत देता है।
- पैंक्रियास को सक्रिय कर इंसुलिन संतुलन में मदद करता है, जो मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी है।
- मानसिक तनाव, चिंता कम करता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
- गर्भवती महिलाओं, गठिया और सायटिका के रोगियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
नई दिल्ली: आधुनिक जीवनशैली में तनाव, कब्ज, कमर दर्द और मोटापे जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। योग विशेषज्ञों के अनुसार, कुर्मासन — जिसे अंग्रेजी में Tortoise Pose (टॉरटॉइज पोज) कहते हैं — इन सभी समस्याओं से राहत दिलाने में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। नियमित अभ्यास से यह आसन शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है।
क्या है कुर्मासन और इसका अर्थ
कुर्मासन संस्कृत के दो शब्दों — 'कुर्म' (कछुआ) और 'आसन' (मुद्रा) — से मिलकर बना है। इस आसन में साधक का शरीर कछुए की भांति सिकुड़ी हुई अवस्था में आ जाता है। ठीक जैसे कछुआ खतरे में अपने अंगों को खोल के भीतर समेट लेता है, उसी तरह यह आसन व्यक्ति को बाहरी दुनिया की अशांति से दूर कर आंतरिक शांति से जोड़ता है।
योग परंपरा में यह आसन अष्टांग योग और हठयोग दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह केवल शारीरिक लचीलापन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता का भी एक सशक्त साधन है।
कुर्मासन करने की सही विधि
कुर्मासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले दंडासन (दोनों पैर सामने फैलाकर) में बैठ जाएं। इसके बाद दोनों पैरों के बीच कंधे जितनी दूरी बनाएं और घुटनों को हल्का मोड़ें।
अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और दोनों हाथों को घुटनों के नीचे से बाहर की तरफ निकालें। शरीर को और झुकाते हुए छाती और ठुड्डी को जमीन के करीब लाने का प्रयास करें। इस दौरान सांस सामान्य बनाए रखें और १५ से ३० सेकंड तक इस स्थिति में रहें।
अंत में धीरे-धीरे सांस लेते हुए वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। शुरुआती अभ्यासियों को योग प्रशिक्षक की देखरेख में यह आसन करने की सलाह दी जाती है।
कुर्मासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
पीठ और रीढ़ के लिए लाभकारी: यह आसन रीढ़ की हड्डी में गहरा खिंचाव उत्पन्न करता है, जिससे शरीर का लचीलापन बढ़ता है। घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले कार्यालयीन कर्मचारियों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि यह पीठ और कमर की जकड़न दूर करता है। रीढ़ में रक्त संचार बेहतर होने से शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बना रहता है।
पाचन तंत्र को मजबूती: कुर्मासन पेट की मांसपेशियों पर नियंत्रित दबाव डालता है, जिससे पाचन क्रिया सुचारू होती है। गैस, कब्ज और अपच जैसी सामान्य समस्याओं में इस आसन का नियमित अभ्यास राहत देता है। इसके अलावा यह पैंक्रियास को सक्रिय करता है, जिससे इंसुलिन का संतुलन बेहतर हो सकता है — यही कारण है कि इसे मधुमेह रोगियों के लिए भी सहायक माना जाता है।
पेट की चर्बी में कमी: इस आसन के दौरान पेट की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं और उन पर लगातार दबाव बनता है। नियमित अभ्यास से पेट की अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है और कोर मसल्स मजबूत होती हैं।
मानसिक शांति और एकाग्रता: कुर्मासन मन को शांत करने और तनाव व चिंता को कम करने में अत्यंत प्रभावी है। इसका नियमित अभ्यास एकाग्रता बढ़ाता है और मानसिक दबाव से जूझ रहे लोगों को भीतरी सुकून प्रदान करता है। आधुनिक शोध भी पुष्टि करते हैं कि इस प्रकार के फॉरवर्ड-बेंड आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं।
किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए
कुर्मासन सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। घुटनों, कंधों, कमर या रीढ़ में दर्द से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इससे पूरी तरह बचने की सलाह दी जाती है।
इसी प्रकार गंभीर गठिया (आर्थराइटिस) और सायटिका के रोगियों को भी इस आसन से परहेज करना चाहिए। किसी भी नए योगासन की शुरुआत करने से पहले प्रशिक्षित योग गुरु या चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
आधुनिक जीवनशैली और योग की प्रासंगिकता
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में तनाव और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में कुर्मासन जैसे आसन न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी एक सस्ता और प्रभावी समाधान हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (२१ जून) के अवसर पर भी इस वर्ष ऐसे आसनों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिदिन केवल १५ से २० मिनट योगाभ्यास को दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। कुर्मासन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।