क्या सर्दियों में गर्भवती महिलाएं ठंड, थकान और संक्रमण से बचाव कर सकती हैं?

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क्या सर्दियों में गर्भवती महिलाएं ठंड, थकान और संक्रमण से बचाव कर सकती हैं?

सारांश

सर्दियाँ गर्भवती महिलाओं के लिए ख़तरनाक हो सकती हैं। जानिए कैसे ठंड, थकान और संक्रमण से बचाव कर सकती हैं।

Key Takeaways

  • गर्म कपड़े
  • सही खान-पान से प्रतिरक्षा प्रणाली
  • गुनगुना पानी
  • धूप में बैठकर विटामिन डी
  • अचानक तापमान में परिवर्तन से बचें।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सर्दियों में ठंडी हवाओं, कम धूप और बदलते तापमान का शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जबकि आम लोग इस मौसम में कुछ आलस्य महसूस करते हैं, गर्भवती महिलाओं के लिए यह समय और भी अधिक सावधानी का होता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तन आते हैं, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। इस स्थिति में ठंड, सर्दी-जुकाम, जोड़ों का दर्द और थकान जल्दी पकड़ सकते हैं।

आयुर्वेद और विज्ञान दोनों का मानना है कि यदि सही दिनचर्या, पोषण और देखभाल की जाए, तो सर्दियों में भी गर्भवती महिलाएं खुद को और अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में वात दोष बढ़ जाता है, जिससे शरीर में सूखापन, दर्द और ठंड लगने की समस्या होती है। यदि गर्भवती महिलाएं अपने शरीर को गर्म रखती हैं, तो वात संतुलित रहता है और शरीर को आराम मिलता है। विज्ञान के अनुसार, ठंड में शरीर अधिक ऊर्जा खर्च करता है, जिससे थकान बढ़ सकती है। इसलिए ऊनी और आरामदायक कपड़े पहनना आवश्यक है। सिर और पैरों को ढककर रखने से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलती। दिन में धूप में थोड़ी देर बैठना विटामिन डी पाने का एक सरल तरीका है, जो मां की हड्डियों और बच्चे के विकास के लिए आवश्यक है।

सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन पानी की आवश्यकता कम नहीं होती। आयुर्वेद कहता है कि गुनगुना पानी शरीर के पाचन को ठीक रखता है और विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। विज्ञान भी मानता है कि पर्याप्त पानी पीने से कब्ज, थकान और यूरिन इन्फेक्शन का खतरा कम होता है, जो गर्भावस्था में आम समस्याएं हैं। गुनगुना पानी, सूप और हल्की हर्बल चाय शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं और रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं, जिससे बच्चे को पोषण सही तरीके से मिलता है।

अचानक ठंड और गर्म वातावरण में जाना गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकता है। आयुर्वेद इसे शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ने वाला मानता है। वहीं, विज्ञान बताता है कि अचानक तापमान के परिवर्तन से शरीर को खुद को ढालने का समय नहीं मिलता, जिससे सर्दी, बुखार या कमजोरी हो सकती है। अगर घर से बाहर जाना हो, तो थोड़ी देर दरवाजे या बालकनी में रुककर बाहर निकलना शरीर को मौसम के अनुसार ढलने में मदद करता है।

खान-पान सर्दियों में गर्भवती महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत है। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में पौष्टिक और हल्का गर्म भोजन शरीर को ऊर्जा देता है। गाजर, चुकंदर, पालक और शकरकंद जैसी मौसमी फल-सब्जियां खून बढ़ाने में मदद करती हैं और बच्चे के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व प्रदान करती हैं। विज्ञान भी इन खाद्य पदार्थों को आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर मानता है, जो मां की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करते हैं।

Point of View

बल्कि बच्चे की भी सेहत को सुनिश्चित किया जा सकता है। सही खान-पान और दिनचर्या से महिलाएं इस मौसम में खुद को सुरक्षित रख सकती हैं।
NationPress
06/01/2026

Frequently Asked Questions

गर्भवती महिलाओं को सर्दियों में क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
गर्भवती महिलाओं को अपने शरीर को गर्म रखना चाहिए, उच्च पोषण वाले भोजन का सेवन करना चाहिए और पर्याप्त पानी पीना चाहिए।
क्या गुनगुना पानी पीने से कोई लाभ होता है?
हाँ, गुनगुना पानी पाचन को बेहतर बनाता है और विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।
सर्दियों में धूप में बैठना क्यों जरूरी है?
धूप में बैठने से शरीर को विटामिन डी मिलता है, जो मां की हड्डियों और बच्चे के विकास के लिए आवश्यक होता है।
गर्भवती महिलाएं किन खाद्य पदार्थों का सेवन करें?
गाजर, चुकंदर, पालक और शकरकंद जैसे मौसमी फल-सब्जियाँ गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद होती हैं।
अचानक गर्म और ठंडे माहौल में जाने से क्या होता है?
यह शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे सर्दी, बुखार या कमजोरी हो सकती है।
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