हीट स्ट्रोक से बचाव: गर्मी के बढ़ते प्रकोप में NHM और हेल्थ एक्सपर्ट की जरूरी सलाह
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देशभर में भीषण गर्मी का दौर जारी है और हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और समय पर सावधानी बरतकर खुद को और अपने परिवार को इस जानलेवा स्थिति से बचाएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सही जानकारी और थोड़ी सी सजगता से हीट स्ट्रोक को पूरी तरह रोका जा सकता है।
क्या होता है हीट स्ट्रोक और क्यों है यह खतरनाक?
जब शरीर का तापमान अचानक बहुत तेजी से बढ़ जाता है और शरीर की प्राकृतिक ठंडक बनाए रखने की क्षमता विफल हो जाती है, तो उस स्थिति को हीट स्ट्रोक कहते हैं। यह केवल एक सामान्य बेचैनी नहीं, बल्कि एक मेडिकल इमरजेंसी है जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच का समय सबसे अधिक खतरनाक होता है, जब सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है। इस दौरान बाहर निकलना या भारी शारीरिक श्रम करना हीट स्ट्रोक को आमंत्रण देना है।
NHM की अपील — किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा?
नेशनल हेल्थ मिशन ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों को लेकर आगाह किया है। इन वर्गों की शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जिससे वे गर्मी की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।
यह ध्यान देने वाली बात है कि भारत में हर साल अप्रैल से जून के बीच लू और हीट स्ट्रोक से सैकड़ों मौतें दर्ज की जाती हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्य इस मौसम में सर्वाधिक प्रभावित रहते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस वर्ष मई के अंत तक तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
हीट स्ट्रोक से बचाव के प्रभावी उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ सरल लेकिन अत्यंत कारगर सुझाव दिए हैं जिन्हें अपनाकर इस खतरे से बचा जा सकता है:
पर्याप्त जलयोजन (Hydration): पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। प्यास न लगने पर भी हर घंटे कम से कम एक गिलास पानी पिएं। कोल्ड ड्रिंक, चाय और कॉफी जैसे कैफीनयुक्त पेय पदार्थों से परहेज करें, क्योंकि ये शरीर को और अधिक डिहाइड्रेट करते हैं।
उचित पोशाक: हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें। गहरे रंग के कपड़े सूर्य की गर्मी अधिक सोखते हैं, जो शरीर का तापमान बढ़ाते हैं। बाहर निकलते समय टोपी, छाता या दुपट्टे का उपयोग करें।
कार्य समय का प्रबंधन: यदि बाहर काम करना अनिवार्य हो, तो हर 15 से 20 मिनट में छांव में विश्राम लें। भारी शारीरिक कार्य सुबह जल्दी या शाम के बाद ही करें।
हल्का आहार: गर्मी में तली-भुनी और मसालेदार चीजें खाने से बचें। मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूज, खीरा और नारियल पानी शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।
हीट स्ट्रोक के लक्षण और तत्काल प्राथमिक उपचार
यदि किसी व्यक्ति में चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार, बेहोशी या शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ जाना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत कदम उठाएं। पीड़ित को किसी ठंडी और हवादार जगह पर लिटाएं और उसके गर्दन, कलाई और पैरों के तलवों पर ठंडे पानी की पट्टी रखें।
पीड़ित को ठंडे पानी के छोटे-छोटे घूंट पिलाते रहें। हालत में सुधार होने पर नींबू पानी, छाछ या फलों का रस दें। यदि स्थिति नियंत्रण में न आए तो बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं या हेल्पलाइन नंबर 108 पर कॉल करें।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य — भारत की चुनौती अनोखी क्यों है?
यह उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिण एशिया में गर्मी की लहरें पहले से अधिक लंबी, तीव्र और बार-बार आने वाली हो गई हैं। भारत में शहरी ताप द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect) की वजह से दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे महानगरों में तापमान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज होता है।
आने वाले हफ्तों में तापमान में और वृद्धि की संभावना है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे IMD के दैनिक मौसम अलर्ट पर नजर रखें और स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।