गर्भवती महिलाओं के लिए लू और तेज गर्मी से बचाव के ज़रूरी उपाय, NHM की सलाह

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गर्भवती महिलाओं के लिए लू और तेज गर्मी से बचाव के ज़रूरी उपाय, NHM की सलाह

सारांश

देशभर में बढ़ती गर्मी और लू के बीच NHM ने गर्भवती महिलाओं के लिए ज़रूरी सावधानियाँ जारी की हैं। डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकान से माँ व शिशु दोनों को खतरा हो सकता है। हल्के कपड़े, पर्याप्त पानी, दोपहर में घर में रहना और नियमित डॉक्टरी जाँच — ये उपाय इस मौसम को सुरक्षित बना सकते हैं।

मुख्य बातें

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, गर्भावस्था में बढ़ते तापमान से डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकान का खतरा बढ़ जाता है।
दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच गर्भवती महिलाओं को बाहर निकलने से बचना चाहिए।
नींबू पानी, नारियल पानी और छाछ जैसे प्राकृतिक पेय पदार्थ शरीर को हाइड्रेट और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर रखते हैं।
चक्कर, तेज सिरदर्द, उल्टी या पेट में असुविधा होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
ढीले, सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनना इस मौसम में सबसे उपयुक्त है।
परिवार की सक्रिय देखभाल और नियमित स्वास्थ्य जाँच गर्मी के मौसम में और भी ज़रूरी हो जाती है।

नई दिल्ली में 12 मई को देशभर में बढ़ती गर्मी और लू के बीच गर्भवती महिलाओं की सेहत को लेकर नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने अहम सावधानियाँ जारी की हैं। NHM के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान बढ़ते तापमान से डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकान जैसे स्वास्थ्य जोखिम तेज़ी से बढ़ जाते हैं, जो माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समुचित देखभाल और कुछ सरल सावधानियाँ अपनाकर इस मौसम को सुरक्षित तरीके से पार किया जा सकता है।

गर्मी में गर्भवती महिलाओं को क्यों होता है ज़्यादा खतरा

गर्भावस्था में शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज़ होता है और रक्त संचार बढ़ा हुआ रहता है, जिससे शरीर सामान्य से अधिक गर्मी उत्पन्न करता है। NHM के मुताबिक, तेज धूप और लू के संपर्क में आने से पसीना, डिहाइड्रेशन और थकान की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है।

मुख्य बचाव के उपाय

हल्के और सूती कपड़े पहनें: गर्मी में ढीले, सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनना चाहिए। इससे शरीर को हवा लगती रहती है और पसीना आसानी से सूख सकता है।

पर्याप्त पानी और प्राकृतिक पेय पदार्थ लें: गर्भावस्था में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना ज़रूरी है। इसके साथ नींबू पानी, नारियल पानी और छाछ जैसे प्राकृतिक पेय भी लें, जो शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ ज़रूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी प्रदान करते हैं।

दोपहर में बाहर निकलने से बचें: दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप और लू का प्रकोप सबसे अधिक रहता है। इस समय घर के अंदर रहना सबसे सुरक्षित विकल्प है। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो तो छाता, टोपी, चश्मा और स्कार्फ का उपयोग अवश्य करें।

संतुलित और हल्का आहार लें: ताज़े फल, सब्जियाँ, दही और घर का बना हल्का भोजन खाएँ। भारी, तला-भुना और अधिक मसालेदार भोजन से परहेज करें।

इन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चक्कर आना, तेज सिरदर्द, उल्टी, मतली, अत्यधिक थकान या पेट में असुविधा जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करना माँ और शिशु दोनों के लिए जोखिमभरा हो सकता है।

परिवार की भूमिका और नियमित जाँच का महत्व

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिला के आराम की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए और परिवार के सदस्यों को उनकी देखभाल में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। गर्मी के मौसम में नियमित स्वास्थ्य जाँच और डॉक्टर की सलाह का पालन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। गौरतलब है कि थोड़ी-सी सावधानी और सही देखभाल से माँ और शिशु दोनों को इस मौसम में सुरक्षित रखा जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में इस विषय पर व्यापक जागरूकता अभियान अभी भी सीमित हैं। NHM की सलाहें उपयोगी हैं, परंतु ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहाँ बिजली-पानी की उपलब्धता अनिश्चित है, इन उपायों को अमल में लाना कहीं अधिक कठिन है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्मी-संबंधी गर्भावस्था जटिलताओं के आँकड़े पारदर्शी रूप से सामने नहीं आते, जो नीति-निर्माण की एक बड़ी खामी है। जब तक जागरूकता अभियान ज़मीनी स्तर तक नहीं पहुँचते, ये दिशानिर्देश केवल शहरी पढ़े-लिखे वर्ग तक सीमित रहेंगे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्मी में गर्भवती महिलाओं को किन खतरों का सामना करना पड़ता है?
NHM के अनुसार, गर्भावस्था में बढ़ते तापमान से डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और अत्यधिक थकान का खतरा बढ़ जाता है। ये स्थितियाँ माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।
गर्भवती महिलाओं को दोपहर में बाहर क्यों नहीं निकलना चाहिए?
दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप और लू का प्रकोप सबसे अधिक रहता है। इस दौरान बाहर रहने से हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए घर के अंदर रहना सबसे सुरक्षित है।
गर्मी में गर्भवती महिलाओं को कौन-से पेय पदार्थ लेने चाहिए?
नींबू पानी, नारियल पानी और छाछ जैसे प्राकृतिक पेय पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है। ये शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ ज़रूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी प्रदान करते हैं।
गर्भावस्था में गर्मी के दौरान कौन-से लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
चक्कर आना, तेज सिरदर्द, उल्टी, मतली, अत्यधिक थकान या पेट में असुविधा होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना माँ और शिशु दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।
गर्मी में गर्भवती महिलाओं के लिए कपड़ों का चुनाव कैसा होना चाहिए?
ढीले, सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनना सबसे उपयुक्त है। इससे शरीर को हवा लगती रहती है और पसीना आसानी से सूख सकता है, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।
राष्ट्र प्रेस