12 जुलाई 2026
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असम में पाइप आधारित सिंचाई की ओर बड़ा बदलाव, मंत्री पीयूष हजारिका ने हाटियामुख परियोजना का किया दौरा

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असम में पाइप आधारित सिंचाई की ओर बड़ा बदलाव, मंत्री पीयूष हजारिका ने हाटियामुख परियोजना का किया दौरा

सारांश

असम सरकार नहर सिंचाई के युग से आगे बढ़ रही है — ₹34.8 करोड़ की भूमिगत पायलट परियोजना और ₹30.67 करोड़ की हाटियामुख परियोजना इसी दिशा में उठाए गए ठोस कदम हैं। मंत्री हजारिका का संदेश साफ है: पाइप, गति और दक्षता — यही असम की कृषि का नया भविष्य है।

मुख्य बातें

असम के कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने 12 जुलाई को हाटियामुख सिंचाई परियोजना का दौरा किया और पाइप आधारित सिंचाई को राज्य की नई प्राथमिकता घोषित किया।
हाटियामुख परियोजना की लागत लगभग ₹30.67 करोड़ है और इससे 5,800 बीघा कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई मिल रही है।
बोको में सिंगुआ जल आपूर्ति पायलट परियोजना असम की पहली भूमिगत जल सिंचाई परियोजना है, जो ₹34.8 करोड़ के केंद्रीय अनुदान से बन रही है।
इस परियोजना से 1,427 हेक्टेयर कृषि भूमि को निरंतर जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी हाल ही में दबावयुक्त पाइप वितरण नेटवर्क की ओर संक्रमण की योजना की पुष्टि की थी।

असम के कृषि एवं सिंचाई मंत्री पीयूष हजारिका ने 12 जुलाई को बाघजाप गाँव पंचायत स्थित हाटियामुख सिंचाई परियोजना का दौरा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब परंपरागत नहर प्रणाली से आगे बढ़कर आधुनिक पाइप आधारित सिंचाई प्रणालियों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव कुशल जल प्रबंधन, तेज़ क्रियान्वयन और भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं से मुक्ति दिलाएगा।

हाटियामुख परियोजना: किसानों को मिली राहत

लगभग ₹30.67 करोड़ की अनुमानित लागत से निर्मित हाटियामुख नहर आधारित सिंचाई परियोजना ने क्षेत्र की लगभग 5,800 बीघा कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई के दायरे में ला दिया है। इससे स्थानीय किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है और खेती की निरंतरता सुनिश्चित हुई है।

मंत्री हजारिका ने किसानों से आग्रह किया कि वे सरकारी योजनाओं और उपलब्ध सुविधाओं का भरपूर उपयोग करते हुए प्रति वर्ष दो से तीन फसल चक्रों की खेती करें। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय सिंचाई की उपलब्धता ने इस क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को नई गति दी है।

पाइप आधारित प्रणाली क्यों है बेहतर विकल्प

हजारिका ने बताया कि पारंपरिक नहर परियोजनाओं की तुलना में पाइप आधारित सिंचाई प्रणालियाँ कम समय में पूरी की जा सकती हैं। इनसे जल की बर्बादी घटती है, लागत नियंत्रित रहती है और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी चुनौतियाँ भी नहीं आतीं — जो नहर परियोजनाओं में अक्सर देरी का कारण बनती हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल के माध्यम से पाइप आधारित दबावयुक्त वितरण नेटवर्क की ओर संक्रमण की राज्य सरकार की योजना की जानकारी दी थी। उस पोस्ट में कहा गया था कि इससे पानी की बर्बादी कम होगी, लागत घटेगी और किसानों को तेज़ व अधिक कुशल सिंचाई मिलेगी।

बोको में पायलट परियोजना: असम की पहली भूमिगत जल योजना

मंत्री हजारिका ने 20 जून को बोको में सिंगुआ जल आपूर्ति पायलट परियोजना का निरीक्षण किया था। यह असम की पहली भूमिगत जल सिंचाई परियोजना है, जो ₹34.8 करोड़ के केंद्रीय अनुदान से निर्मित हो रही है।

इस परियोजना के तहत भूमिगत पाइपलाइनों के जाल के ज़रिए फसलों तक सीधे पानी पहुँचाया जाएगा। इससे लगभग 1,427 हेक्टेयर कृषि भूमि को निरंतर जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसे जल अपव्यय को न्यूनतम करने और दक्षता को अधिकतम करने के उद्देश्य से विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है।

असम की कृषि अर्थव्यवस्था पर असर

हजारिका ने कहा कि राज्य सरकार का ध्यान आधुनिक सिंचाई अवसंरचना के विस्तार पर केंद्रित है ताकि किसानों को विश्वसनीय जल आपूर्ति मिले, सतत कृषि को बढ़ावा मिले और असम की समग्र कृषि अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो। गौरतलब है कि असम में कृषि आबादी के एक बड़े हिस्से की आजीविका का मुख्य आधार है और सिंचाई की उपलब्धता सीधे उत्पादकता से जुड़ी है।

आने वाले समय में राज्य सरकार की योजना है कि पाइप आधारित प्रणालियों को चरणबद्ध तरीके से अधिक ज़िलों तक विस्तारित किया जाए, जिससे कृषि क्षेत्र में जल सुरक्षा की नींव और मज़बूत हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति और भौगोलिक विस्तार में होगी। बोको की पायलट परियोजना अभी निर्माणाधीन है और 5,800 बीघा तक सिंचाई पहुँचाना एक बात है — पूरे राज्य के विविध भूगोल में यह मॉडल दोहराना बिल्कुल अलग चुनौती है। नहर परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की समस्या से बचने का तर्क ठोस है, परंतु पाइप नेटवर्क की रखरखाव लागत और स्थानीय तकनीकी क्षमता पर अभी कोई सार्वजनिक आकलन सामने नहीं आया है — यह एक महत्वपूर्ण अनुत्तरित प्रश्न है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में पाइप आधारित सिंचाई प्रणाली क्या है?
यह एक आधुनिक सिंचाई पद्धति है जिसमें भूमिगत या दबावयुक्त पाइपलाइनों के ज़रिए सीधे खेतों तक पानी पहुँचाया जाता है। परंपरागत नहरों की तुलना में इसमें जल की बर्बादी कम होती है, भूमि अधिग्रहण की ज़रूरत नहीं पड़ती और परियोजना कम समय में पूरी होती है।
हाटियामुख सिंचाई परियोजना से किसानों को क्या फायदा होगा?
₹30.67 करोड़ की लागत से बनी इस परियोजना से लगभग 5,800 बीघा कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई मिल रही है। इससे किसान प्रति वर्ष दो से तीन फसल चक्रों की खेती कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में सीधा सुधार होगा।
सिंगुआ जल आपूर्ति पायलट परियोजना क्या है और यह कहाँ बन रही है?
यह असम की पहली भूमिगत जल सिंचाई परियोजना है, जो बोको में ₹34.8 करोड़ के केंद्रीय अनुदान से निर्मित हो रही है। इससे लगभग 1,427 हेक्टेयर कृषि भूमि को निरंतर जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
असम सरकार नहर सिंचाई की जगह पाइप प्रणाली को क्यों अपना रही है?
मंत्री हजारिका के अनुसार पाइप आधारित प्रणालियाँ कम समय में पूरी होती हैं, जल प्रबंधन अधिक कुशल होता है और नहर परियोजनाओं में आने वाली भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं से बचा जा सकता है। मुख्यमंत्री सरमा ने भी इस नीतिगत बदलाव की पुष्टि की है।
असम में पाइप सिंचाई विस्तार की आगे क्या योजना है?
राज्य सरकार की योजना है कि बोको की पायलट परियोजना की सफलता के आधार पर पाइप आधारित प्रणालियों को चरणबद्ध तरीके से अधिक ज़िलों तक विस्तारित किया जाए। इसका उद्देश्य किसानों को विश्वसनीय जल आपूर्ति देकर सतत कृषि और असम की कृषि अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
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