बुंदेलखंड के किसानों का भविष्य अब सुरक्षित, पलायन की जरूरत नहीं: सीएम मोहन यादव

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बुंदेलखंड के किसानों का भविष्य अब सुरक्षित, पलायन की जरूरत नहीं: सीएम मोहन यादव

सारांश

दतिया में सीएम मोहन यादव ने विकास कार्यों का उद्घाटन करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के किसान अब पलायन नहीं करेंगे। सिंचाई की बेहतर व्यवस्था और सरकारी योजनाओं से किसानों की समृद्धि का रास्ता प्रशस्त हुआ है।

मुख्य बातें

बुंदेलखंड के किसानों के पलायन की समस्या का समाधान।
सिंचाई क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि।
कृषि उपकरणों और योजनाओं का वितरण।
किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना।
नदी जोड़ो परियोजना का लाभ।

दतिया, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दतिया जिले को विकास की नई सौगात देते हुए कहा है कि बुंदेलखंड क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, सिंचाई की क्षमता में वृद्धि हो रही है, और अब यहाँ का कोई भी किसान पलायन करने पर मजबूर नहीं होगा।

सीएम मोहन यादव ने राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन में दतिया को ६२.२३ करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देते हुए बताया कि प्रदेश में सिंचाई के क्षेत्र में सुधार के लिए राज्य सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सिंचाई का रकबा पहले साढ़े ७ लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर ५५ लाख हेक्टेयर तक पहुँच चुका है। पिछले २ वर्षों में सिंचित भूमि का क्षेत्रफल लगभग १० लाख हेक्टेयर बढ़ा है। केन-बेतवा लिंक नदी जोड़ो परियोजना के तहत बुंदेलखंड क्षेत्र और आस-पास के जिलों के किसानों के लिए सिंचाई हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को नदी जोड़ो परियोजना की महत्वपूर्ण सौगात प्रदान की है, जिसका लाभ उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों को भी मिलेगा। अब बुंदेलखंड क्षेत्र से कोई किसान पलायन नहीं करेगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है, जहां संकट आया हो और प्रधानमंत्री मोदी की पहल से भारतीय नागरिकों की घर वापसी सुनिश्चित न की गई हो।

सीएम ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए मिलकर काम कर रही है। उन्होंने भगवान बलराम को नमन करते हुए कहा कि किसान ही हमारे देश के भाग्य के रचयिता हैं। वे सूरज की तपती गर्मी में मेहनत से सभी के लिए अन्न उगाते हैं। कृषक कल्याण वर्ष में राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के प्रति संकल्पित है। प्रदेश के किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से खेती करने, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना कर खाद्य प्रसंस्करण से अपनी आय दोगुनी करने के लिए कई योजनाएँ दी जा रही हैं। अब हमारे किसान नरवाई प्रबंधन के लिए मशीनों से भूसा भी बना रहे हैं, जिससे उन्हें गेहूं और भूसा दोनों से कमाई का सुनहरा अवसर मिला है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ६२.२३ करोड़ रुपए की लागत के १२ विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। इनमें भव्य सांदीपनि विद्यालय, दैवीय स्थल रतनगढ़ में यात्री निवास, और स्टेडियम सहित अन्य विकास कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही हितग्राहियों को कृषि यंत्र, पशुपालन, और खाद्य प्रसंस्करण के लिए लाभ भी वितरित किए गए।

सीएम ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपना संपूर्ण जीवन जनकल्याण के लिए समर्पित कर दिया। प्रदेश के सांदीपनि विद्यालय बच्चों के सुनहरे भविष्य के मंदिर की तरह हैं। शासकीय स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों को नि:शुल्क किताबें, ड्रेस, साइकिलें, लैपटॉप और स्कूटी भी दी जा रही हैं। इसी शैक्षणिक सत्र से यशोदा योजना के तहत बच्चों को दूध के पैकेट भी वितरित किए जाएंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बुंदेलखंड में किसान पलायन क्यों करते थे?
सिंचाई की कमी और संसाधनों के अभाव के कारण किसान बेहतर जीवन के लिए पलायन कर जाते थे।
सीएम मोहन यादव ने कौन सी योजनाएँ घोषित की हैं?
उन्होंने सिंचाई क्षमता बढ़ाने और कृषि उपकरणों के वितरण की कई योजनाओं की घोषणा की है।
सिंचाई रकबा कितने हेक्टेयर तक बढ़ा है?
सिंचाई का रकबा पहले ७.५ लाख हेक्टेयर था, अब यह ५५ लाख हेक्टेयर तक पहुँच चुका है।
नदी जोड़ो परियोजना का क्या महत्व है?
यह परियोजना बुंदेलखंड के किसानों को पर्याप्त जल उपलब्ध कराएगी, जिससे उनकी फसल उत्पादन में वृद्धि होगी।
किसान कल्याण वर्ष का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य किसानों की आय और समृद्धि को बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस