36 साल बाद कश्मीर घाटी में जुटेंगे कश्मीरी पंडित, जून 2026 में पहला वैश्विक हेरिटेज कॉन्क्लेव

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36 साल बाद कश्मीर घाटी में जुटेंगे कश्मीरी पंडित, जून 2026 में पहला वैश्विक हेरिटेज कॉन्क्लेव

सारांश

36 साल के विस्थापन के बाद, कश्मीरी पंडित समुदाय जून 2026 में पहली बार कश्मीर घाटी में एकजुट होने जा रहा है। 6 से 14 जून तक आयोजित 'ग्लोबल कश्मीरी पंडित हेरिटेज टूर एंड कॉन्क्लेव' में भारत, अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व से प्रतिनिधि शामिल होंगे — यह पहचान, विरासत और वापसी की ऐतिहासिक यात्रा है।

मुख्य बातें

6 से 14 जून 2026 के बीच कश्मीर घाटी में पहला 'ग्लोबल कश्मीरी पंडित हेरिटेज टूर एंड कॉन्क्लेव' आयोजित होगा।
समापन सत्र 13-14 जून को श्रीनगर के SKICC में दो दिवसीय कॉन्क्लेव के रूप में होगा।
आयोजन में 7 प्रमुख संस्थाएँ और भारत-विदेश की 30 से अधिक संस्थाएँ सहयोग कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , गृह मंत्री अमित शाह , उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को आमंत्रण भेजा गया है।
कश्मीरी मुस्लिम, सिख, पीओजेके और वाल्मीकि समुदाय के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।

करीब 36 साल के लंबे विस्थापन और पीड़ा के बाद, कश्मीरी पंडित समुदाय जून 2026 में पहली बार कश्मीर घाटी में एकजुट होने जा रहा है। 'ग्लोबल कश्मीरी पंडित हेरिटेज टूर एंड कॉन्क्लेव' का आयोजन 6 जून से 14 जून 2026 तक किया जाएगा, जिसे आयोजकों ने अपनी पैतृक धरती से भावनात्मक पुनर्संपर्क की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। यह आयोजन उस समुदाय के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है, जिसे 1990 के दशक की शुरुआत में घाटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।

कार्यक्रम का स्वरूप और थीम

इस कॉन्क्लेव का समापन 13 और 14 जून 2026 को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में दो दिवसीय सम्मेलन के रूप में होगा। कार्यक्रम की थीम 'निर्वासन से उत्कृष्टता तक — कश्मीरी पंडितों की जुझारूपन, पुनर्जागरण और वापसी की यात्रा' रखी गई है। आयोजकों के अनुसार, यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि यादों, पुनर्संपर्क और पुनर्जागरण की भावनात्मक एवं ऐतिहासिक यात्रा होगी।

कार्यक्रम के अंतर्गत एक विशेष हेरिटेज टूर भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत और विदेशों से आने वाले प्रतिनिधि घाटी के मंदिरों, सांस्कृतिक धरोहर स्थलों और कश्मीरी पंडित सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों का दौरा करेंगे।

आयोजन से जुड़ी प्रमुख संस्थाएँ

इस आयोजन को सात प्रमुख संस्थाएँ मिलकर संचालित कर रही हैं — ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा, जम्मू-कश्मीर विचार मंच, यूथ ऑल इंडिया कश्मीरी समाज, कश्मीरी पंडित एसोसिएशन मुंबई, कश्मीरी ओवरसीज एसोसिएशन यूएसए, संजीवनी शारदा केंद्र जम्मू और ऑल माइनॉरिटीज एम्प्लॉइज एसोसिएशन ऑफ कश्मीर। इसके अतिरिक्त, भारत और विदेशों की 30 से अधिक संस्थाएँ भी इस पहल में सहयोग कर रही हैं।

विमर्श और संवाद का मंच

कॉन्क्लेव में विद्वानों, उद्यमियों, नीति निर्माताओं, युवाओं, कलाकारों, सांस्कृतिक विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। यहाँ सांस्कृतिक संरक्षण, राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक समरसता और कश्मीरी पंडित पहचान से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। कार्यक्रम में राउंड टेबल चर्चाएँ, युवा सत्र, अकादमिक पैनल और कश्मीरी भाषा, साहित्य, संगीत तथा अध्यात्म से जुड़े सांस्कृतिक आयोजन भी शामिल होंगे।

अमेरिका में रहने वाले प्रसिद्ध कश्मीरी मूल के डॉ. सुरिंदर कौल ने कहा कि

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस बार भावनात्मक पुनर्संपर्क ठोस नीतिगत प्रतिबद्धताओं में बदलेगा। गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से सुरक्षा और पुनर्वास पर चर्चाएँ तेज़ हुई हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर वापसी की गति अभी भी धीमी है। यह आयोजन उस अंतर को पाटने का प्रयास है — और इसकी सफलता या विफलता आने वाले वर्षों की नीति-दिशा तय कर सकती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्लोबल कश्मीरी पंडित हेरिटेज टूर एंड कॉन्क्लेव 2026 क्या है?
यह जून 2026 में कश्मीर घाटी में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक सम्मेलन है, जिसमें दुनियाभर के कश्मीरी पंडित अपनी पैतृक धरती, मंदिरों और सांस्कृतिक विरासत से पुनः जुड़ेंगे। 36 साल के विस्थापन के बाद यह समुदाय की सबसे बड़ी सामूहिक वापसी की पहल मानी जा रही है।
यह कॉन्क्लेव कब और कहाँ आयोजित होगा?
कार्यक्रम 6 जून से 14 जून 2026 तक आयोजित होगा और इसका समापन श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में दो दिवसीय कॉन्क्लेव के रूप में होगा।
इस आयोजन में कौन-कौन शामिल होंगे?
भारत, अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व से बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित प्रतिनिधि शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा कश्मीरी मुस्लिम, सिख, पीओजेके और वाल्मीकि समुदाय के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।
कश्मीरी पंडितों का पलायन कब हुआ था?
1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा था, जो जम्मू-कश्मीर के इतिहास का सबसे संवेदनशील अध्याय माना जाता है। तब से यह समुदाय भारत और विदेशों में विस्थापित जीवन जी रहा है।
इस कॉन्क्लेव में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?
सांस्कृतिक संरक्षण, राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक समरसता, कश्मीरी पंडित पहचान, भाषा, साहित्य, संगीत और अध्यात्म जैसे विषयों पर राउंड टेबल चर्चाएँ, युवा सत्र और अकादमिक पैनल आयोजित किए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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