क्या अमेरिका में कश्मीरी हिंदू समूहों ने 'पलायन दिवस' पर न्याय की मांग की?

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क्या अमेरिका में कश्मीरी हिंदू समूहों ने 'पलायन दिवस' पर न्याय की मांग की?

सारांश

अमेरिका में कश्मीरी हिंदू समूहों ने 'पलायन दिवस' पर पुनर्वास और न्याय की मांग की। क्या यह उनकी पहचान और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है? जानिए इस मुद्दे पर क्या कहा गया।

Key Takeaways

  • 19 जनवरी को कश्मीरी हिंदू पलायन दिवस मनाते हैं।
  • समुदाय के लिए न्याय की मांग की गई है।
  • विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की वापसी के लिए मार्गदर्शक प्रस्ताव की आवश्यकता है।
  • कश्मीरियत की अवधारणा को खारिज किया गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की अपील की गई है।

वॉशिंगटन, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका में कश्मीरी हिंदू अधिवक्ता समूहों ने सोमवार को (भारतीय समयानुसार) अपने समुदाय के लिए न्याय, बहाली और सुरक्षित पुनर्वास की मांग को फिर से दोहराया। उन्होंने 19 जनवरी को पलायन दिवस के रूप में मनाया।

कश्मीर हिंदू फाउंडेशन और पनुन कश्मीर ने एक बयान में कहा कि यह तारीख कश्मीर घाटी से कश्मीरी हिंदुओं के संविधानिक विस्थापन की याद दिलाती है।

समूहों ने बताया कि 19 जनवरी एक जानबूझकर और लगातार जारी जातीय सफाए की प्रक्रिया का प्रतीक है, जिसने एक मूल समुदाय को उसकी जड़ों से उखाड़ दिया। कश्मीरी हिंदुओं ने न केवल अपने घर खोए, बल्कि अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को भी खो दिया।

इन समूहों ने प्रतीकात्मक हाव-भाव, चुनिंदा भूलने की आदत और पर्यटन पर केंद्रित कहानियों को अपर्याप्त जवाब बताकर खारिज कर दिया।

लेखिका और राजनीतिक टिप्पणीकार सुनंदा वशिष्ठ ने कहा कि इन अपराधों को एक ऐतिहासिक घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा, “नरसंहार कोई एक घटना नहीं होती। यह एक लंबी प्रक्रिया होती है, जिसका उद्देश्य किसी खास पहचान वाले समूह को समाप्त करना या कमजोर करना होता है।”

पनुन कश्मीर के संयोजक डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की वापसी तभी संभव है जब भारत सरकार मार्गदर्शक प्रस्ताव को अपनाए।

उन्होंने कहा कि कोई भी वैकल्पिक तरीका इस मुद्दे के राजनीतिक, सुरक्षा और सभ्यतागत पहलुओं को हल करने में नाकाम रहा।

पनुन कश्मीर यूथ विंग के नितिन धर ने “कश्मीरियत” की अवधारणा को खारिज कर दिया और कहा कि कश्मीर में ऐतिहासिक रूप से “कश्मीर देशाचार” का पालन होता था, जो एक अलग सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान थी।

दीपक गंजू, कश्मीर हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक, ने मांग की कि 1989 के बाद विस्थापित कश्मीरी पंडितों द्वारा बेची गई सभी चल और अचल संपत्तियों को आधिकारिक तौर पर “डिस्ट्रेस सेल” घोषित किया जाए।

अनित मोंगा, केएचएफ के अध्यक्ष, ने भी खाली संपत्तियों पर कब्जा करने या अतिक्रमण करने पर रोक लगाने की मांग की।

समूहों ने कहा कि न्याय, मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास संवैधानिक और नैतिक आवश्यकताएं हैं। उन्होंने भारत, सिविल सोसायटी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे नरसंहार को मान्यता दें और कश्मीरी हिंदुओं की गरिमापूर्ण वापसी सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कदम उठाएं।

Point of View

जो न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय है।
NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

कश्मीरी हिंदुओं का पलायन दिवस कब मनाया जाता है?
कश्मीरी हिंदुओं का पलायन दिवस 19 जनवरी को मनाया जाता है।
अमेरिका में कश्मीरी हिंदू समूहों की क्या मांग है?
वे न्याय, पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
क्या कश्मीरी हिंदुओं की वापसी संभव है?
यदि भारत सरकार मार्गदर्शक प्रस्ताव को अपनाती है, तो यह संभव है।
कश्मीरी हिंदुओं की पहचान को बचाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
समूहों ने न्याय और मुआवजे की मांग की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता मांगी है।
क्या कश्मीरी हिंदुओं की संस्कृति को खतरा है?
समूहों का मानना है कि उनका सांस्कृतिक पहचान और विरासत खतरे में है।
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