भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में चर्चा की

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भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में चर्चा की

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दार्जिलिंग में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में भाग लिया, जहां उन्होंने संथाल समुदाय के ऐतिहासिक योगदान और भाषा के संरक्षण पर जोर दिया।

Key Takeaways

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में भाग लेना महत्वपूर्ण है।
  • संताल समुदाय का ऐतिहासिक योगदान गर्व का विषय है।
  • संताल भाषा का संरक्षण जरूरी है।
  • आदिवासी युवाओं को शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया गया।
  • प्रकृति संरक्षण का पाठ आने वाली पीढ़ियों को सिखाना चाहिए।

नई दिल्ली, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में भाग लिया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह संथाल समुदाय के लिए गर्व की बात है कि हमारे पूर्वज तिलका मांझी ने लगभग 240 वर्ष पूर्व शोषण के खिलाफ विद्रोह का झंडा उठाया था। उनके विद्रोह के लगभग 60 वर्ष बाद, साहसी सिदो-कान्हू और चांद-भैरव ने बहादुर फूलो-झानो के साथ मिलकर 1855 में संथाल हुल का नेतृत्व किया था।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2003 को संथाल समुदाय के इतिहास में विशेष रूप से याद रखा जाएगा। इसी वर्ष, संथाल भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। पिछले वर्ष, पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर, संथाल भाषा में ओल चिकी स्क्रिप्ट में लिखा गया भारत का संविधान जारी किया गया था।

राष्ट्रपति ने बताया कि 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओल चिकी स्क्रिप्ट का निर्माण किया था। हाल ही में, हमने इस आविष्कार की 100वीं वर्षगांठ मनाई है। उनके योगदान ने संथाल भाषा बोलने वालों को अपनी बात कहने का एक नया अवसर दिया। उन्होंने "बिदु चंदन," "खेरवाल वीर," "दलेगे धन," और "सिदो कान्हू - संताल हुल" जैसे नाटक भी लिखे। इस प्रकार, उन्होंने संथाल समुदाय में साहित्य और सामाजिक जागरूकता की रोशनी फैलाई। उन्होंने कहा कि संथाल समुदाय के लोगों को अन्य भाषाओं और स्क्रिप्ट को पढ़ना चाहिए, लेकिन अपनी भाषा से जुड़े रहना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदायों ने सदियों से अपने लोक संगीत, नृत्य और परंपराओं को संरक्षित रखा है। उन्होंने प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती आ रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रकृति संरक्षण का पाठ आने वाली पीढ़ियों को सिखाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हमें लोक परंपराओं और पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ, आधुनिक विकास को अपनाना चाहिए और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संथाल समुदाय सहित आदिवासी लोग प्रगति और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित करना अत्यावश्यक है। आदिवासी युवाओं को शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन इन सभी प्रयासों में उन्हें अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। इससे हमें एक सशक्त समाज और एक मजबूत भारत बनाने में मदद मिलेगी।

Point of View

NationPress
07/03/2026

Frequently Asked Questions

9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन का आयोजन कहां हुआ?
यह सम्मेलन दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल में आयोजित किया गया।
संताल समुदाय का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
संताल समुदाय ने अपने पूर्वजों के संघर्ष और विद्रोह के माध्यम से समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
राष्ट्रपति ने किस भाषा की महत्वता पर जोर दिया?
राष्ट्रपति ने संताल भाषा के संरक्षण और विकास पर जोर दिया।
ओल चिकी स्क्रिप्ट का निर्माण किसने किया?
ओल चिकी स्क्रिप्ट का निर्माण पंडित रघुनाथ मुर्मू ने किया था।
राष्ट्रपति ने शिक्षा के महत्व पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आदिवासी युवाओं को शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए।
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