पवन कल्याण ने राष्ट्रपति मुर्मु की टिप्पणियों पर जताई चिंता, आदिवासी समुदाय का सम्मान आवश्यक
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रपति मुर्मु की टिप्पणियों पर पवन कल्याण की चिंता।
- आदिवासी समुदाय के सम्मान और भागीदारी की आवश्यकता।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों में समावेशिता का महत्व।
- राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएँ।
- संविधान और राष्ट्रपति के पद की गरिमा को बनाए रखने की जिम्मेदारी।
अमरावती, ८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने दार्जिलिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की टिप्पणियों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की ओर से जताई गई चिंता और दुखद बातें अत्यंत गंभीर हैं और इन पर ध्यान देना आवश्यक है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में पवन कल्याण ने रविवार को कहा कि जब संताल समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव मनाने के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, तो उसमें उस संस्कृति के सम्मान, भागीदारी और गरिमा का पूरी तरह से ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह अत्यंत खेदजनक है कि ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हुईं, जिनके परिणामस्वरूप संथाल समुदाय के कई सदस्य उसी सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके, जो उनके लिए आयोजित किया गया था। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों में समावेशिता, संवेदनशीलता और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था स्पष्ट रूप से देखी जानी चाहिए।
जना सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने कहा कि भारत के राष्ट्रपति का पद देश में सर्वोच्च संवैधानिक सम्मान का प्रतीक है और इस पद की गरिमा को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति के दौरे को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न कराना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।" पवन कल्याण ने यह भी कहा कि भारत के आदिवासी समुदाय हमारे देश की पहचान और गौरव का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उनकी संस्कृति, परंपराओं और आवाज़ का हमेशा सच्चे सम्मान के साथ आदर किया जाना चाहिए।
इससे पूर्व, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी राष्ट्रपति की पीड़ा पर दुख व्यक्त किया था। उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रपति की पीड़ा देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ है। राष्ट्रपति का पद हमारे गणतंत्र की गरिमा का प्रतीक है और इसे हमेशा सर्वोच्च सम्मान और शिष्टाचार के साथ देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक जीवंत लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाएं राजनीति से ऊपर होती हैं और उनकी गरिमा बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वहीं, भाजपा की आंध्र प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पीवीएन माधव ने भी इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार का यह रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
माधव ने कहा कि राष्ट्रपति का पद हमारे संवैधानिक ढांचे में सर्वोच्च सम्मान का स्थान रखता है और राष्ट्रपति का अपमान करना दरअसल संविधान और देश की जनता का अपमान करने जैसा है। उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक बताया।