राष्ट्रपति मुर्मू का अपमान: किरेन रिजिजू ने राजनीति से परे राष्ट्रपति के पद पर जोर दिया

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राष्ट्रपति मुर्मू का अपमान: किरेन रिजिजू ने राजनीति से परे राष्ट्रपति के पद पर जोर दिया

सारांश

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे पर उठे विवाद पर कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे है। उन्होंने इसे पूरे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। जानें इस मामले में क्या कहा गया है।

Key Takeaways

  • राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे है।
  • राष्ट्रपति मुर्मू का अपमान पूरे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
  • राजनीतिक नेताओं को अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

नई दिल्ली, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय संसदीय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान उत्पन्न विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे है। राष्ट्रपति मुर्मू के सामने आने वाली चुनौतियां केवल पश्चिम बंगाल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "देश की पहली जनजातीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा इस प्रकार की पीड़ा व्यक्त करना न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि समस्त भारत के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे, राष्ट्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है।"

इससे पहले, रिजिजू ने राष्ट्रपति मुर्मू के संबोधन का वीडियो साझा करते हुए लिखा, "मैं आदिवासी और भारतीय होने पर गर्व महसूस करता हूँ। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का यह शर्मनाक कृत्य मेरे गर्व को ठेस पहुंचाता है। भारत की राष्ट्रपति, आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू का अपमान करना न केवल आदिवासी गौरव का अपमान है, बल्कि यह भारत के संविधान पर भी हमला है।"

यह टिप्पणी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में संथाल कॉन्फ्रेंस समारोह स्थल को अंतिम समय में बदलने पर नाराजगी जताने के बाद आई। राष्ट्रपति मुर्मु सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र में पहुंची थीं, लेकिन प्रोटोकॉल के अनुसार, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री उनके स्वागत के लिए नहीं पहुंचा था।

राष्ट्रपति को सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेना था, लेकिन पश्चिम बंगाल प्रशासन ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप आयोजकों को कार्यक्रम गोशाईपुर में एक छोटी जगह पर स्थानांतरित करना पड़ा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन था। जब मैं यहाँ आई, तो मुझे यह महसूस हुआ कि यदि सम्मेलन यहीं आयोजित होता तो बेहतर होता, क्योंकि यह क्षेत्र बहुत बड़ा है। मुझे समझ में नहीं आता कि प्रशासन का क्या विचार था। उन्होंने कहा कि यह स्थान भीड़-भाड़ वाला है, लेकिन मुझे लगता है कि यहाँ आसानी से पांच लाख लोग इकट्ठा हो सकते थे। मुझे नहीं पता कि उन्हें हमें यहाँ से दूर क्यों ले जाया गया।

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि मुझे समझ में नहीं आता कि प्रशासन ने सम्मेलन के लिए ऐसी जगह क्यों चुनी, जहाँ संथाल लोग नहीं जा सकते। मुझे बहुत दुख है कि यहाँ के लोग सम्मेलन में नहीं पहुँच पाए, क्योंकि यह इतनी दूर आयोजित किया गया था। शायद प्रशासन को उम्मीद थी कि कोई भी उपस्थित नहीं होगा और राष्ट्रपति चली जाएंगी।

राष्ट्रपति मुर्मू ने यह भी कहा कि यदि राष्ट्रपति किसी स्थान पर जाते हैं, तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी आना चाहिए, लेकिन वे नहीं आईं। मैं भी बंगाल की बेटी हूँ। ममता दीदी भी मेरी बहन हैं, मेरी छोटी बहन। मुझे नहीं पता कि क्या वे मुझसे नाराज थीं, इसलिए ऐसा हुआ।

Point of View

यह स्पष्ट है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान का मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हमारे संविधान और लोकतंत्र की गरिमा का है। इस विवाद ने एक बार फिर हमें यह याद दिलाया है कि राजनीति से ऊपर जाकर हमें अपने नेता का सम्मान करना चाहिए।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या राष्ट्रपति मुर्मू का अपमान हुआ?
हाँ, राष्ट्रपति मुर्मू के स्वागत के लिए कोई मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं आया, जिसे अपमानजनक माना जा रहा है।
किरन रिजिजू ने राष्ट्रपति के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे है और यह राष्ट्र की संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है।
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