मायावती ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अनादर पर जताई चिंता, कहा 'पश्चिम बंगाल में जो हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण'
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रपति मुर्मु के दौरे पर उठे विवाद ने राजनीतिक तनाव को बढ़ाया है।
- संविधान के अनुसार राष्ट्रपति पद का सम्मान आवश्यक है।
- प्रोटोकॉल का पालन न करना लोकतंत्र की गरिमा को क्षति पहुंचा सकता है।
लखनऊ, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यक्रम को अंतिम क्षणों में बदलने और मुख्यमंत्री द्वारा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान जो घटनाएँ घटीं, वे बिल्कुल भी उचित नहीं थीं। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
बसपा प्रमुख ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "भारतीय संविधान के अनुसार सभी को राष्ट्रपति पद का सम्मान करना चाहिए और इसके प्रोटोकॉल का पालन करना आवश्यक है। इस पद का राजनीतिकरण करना अनुचित है।"
उन्होंने आगे कहा, "वर्तमान समय में देश की राष्ट्रपति एक महिला हैं और वे आदिवासी समाज से भी आती हैं। हाल ही में उनके पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान जो कुछ हुआ, वह अस्वीकार्य था। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।"
मायावती की यह टिप्पणी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दार्जिलिंग जिले में आयोजित संथाल कॉन्फ्रेंस के स्थल को अंतिम समय में बदलने के बाद आई। राष्ट्रपति मुर्मु सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र में पहुंची थीं, लेकिन प्रोटोकॉल के अनुसार, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री उनके स्वागत के लिए नहीं आए थे।
राष्ट्रपति को सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेना था, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, आयोजकों को कार्यक्रम को गोशाईपुर में एक छोटे स्थान पर स्थानांतरित करना पड़ा। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस स्थिति पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
इसी बीच, सोमवार से शुरू हो रहे संसद सत्र से पहले मायावती ने अपने पोस्ट में लिखा, "पिछले कुछ समय से संसद में, विशेषकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का राजनीतिकरण भी उचित नहीं है। सभी को संवैधानिक पदों का सम्मान करते हुए उनकी गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।"