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राज्यसभा में राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन: संवैधानिक अपराध की चेतावनी

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राज्यसभा में राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन: संवैधानिक अपराध की चेतावनी

सारांश

राज्यसभा में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के स्वागत में हुई चूक को गंभीरता से लिया गया। भाजपा सांसद ने इसे संवैधानिक अपराध मानते हुए चेतावनी दी कि ऐसा आचरण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन संवैधानिक अपराध है।
पश्चिम बंगाल सरकार का व्यवहार निंदनीय है।
संविधान की गरिमा बनाए रखना सभी का कर्तव्य है।
अनुच्छेद 256 और 257 का उल्लंघन किया गया।
राज्य सरकारों को अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

नई दिल्ली, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राज्य सरकार द्वारा किए गए व्यवहार पर राज्यसभा में चर्चा हुई। यह स्पष्ट किया गया कि पश्चिम बंगाल की यह गुस्ताखी माफ नहीं की जा सकती। भाजपा सांसद ने इस संदर्भ में कहा कि राष्ट्रपति पद किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है।

यह ध्यान देने योग्य है कि राष्ट्रपति की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, संबंधित वरिष्ठ अधिकारी और अन्य व्यक्ति राष्ट्रपति के स्वागत के लिए उपस्थित नहीं थे। भाजपा सांसद बाबूराम निषाद ने इस मुद्दे को सदन में उठाया। निषाद ने कहा कि यह विषय किसी राजनीतिक दल से ऊपर है, यह भारत के राष्ट्रपति की गरिमा और हमारे संविधान की आत्मा से जुड़ा है।

निषाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन के दौरान जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ, वह केवल एक चूक नहीं बल्कि एक संवैधानिक अपराध है। जब एक राज्य सरकार जानबूझकर देश के सर्वोच्च पद का अवहेलना करती है, तो वह यह भूल जाती है कि वह संविधान की शपथ लेकर सत्ता में है। संविधान के अनुच्छेद 52 से 62 तक राष्ट्रपदों की व्याख्या की गई है। इन पदों का सम्मान करना सभी का कर्तव्य है।

भाजपा सांसद ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार का यह आचरण अनुच्छेद 256 और 257 का भी उल्लंघन है। ये अनुच्छेद राज्य सरकार को केंद्र के निर्देशों का पालन करने और संवैधानिक समकों के प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए बाध्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर राष्ट्रपति या संवैधानिक प्रमुख के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करती है, तो उसे संवैधानिक तंत्र की विफलता मानकर अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। अनुच्छेद 356 तब लागू होता है जब राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करने में असमर्थ होती है।

बाबूराम निषाद ने राष्ट्रपति के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राज्य सरकार के व्यवहार पर कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए संबंधित राज्य के विवेकाधीन अधिकार में कटौती का प्रावधान होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, प्रोटोकॉल के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों पर दंडात्मक कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा चलाना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आज बंगाल की इस गुस्ताखी को माफ किया गया, तो अन्य राज्यों की सरकारें भी इसी रुख पर चलेंगी। हमें सुनिश्चित करना होगा कि संविधान सर्वोपरि है। राष्ट्रपति पद केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल में अपमान का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले को लेकर केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय संविधान और राष्ट्रपति के पद की गरिमा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। राज्य सरकारों को संवैधानिक प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए, अन्यथा इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरा हो सकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन क्या है?
यह पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के स्वागत में राज्य सरकार की अनुपस्थिति का मामला है, जिसे संवैधानिक अपराध माना गया है।
राज्यसभा में इस मुद्दे पर कौन बोले?
भाजपा सांसद बाबूराम निषाद ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया।
संविधान के अनुच्छेद 356 का क्या महत्व है?
अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई तब की जाती है जब राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करने में असमर्थ होती है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
यदि इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो अन्य राज्य सरकारें भी इसी तरह के व्यवहार कर सकती हैं।
राष्ट्रपति पद का महत्व क्या है?
राष्ट्रपति पद सभी 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है और इसकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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