क्या पीएम मोदी ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मु के भाषण को प्रेरणादायक बताया?
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रपति मुर्मु का भाषण प्रेरणादायक था।
- यह हर नागरिक को संविधान के प्रति जिम्मेदारियों का एहसास कराता है।
- महिलाओं के योगदान को महत्वपूर्ण माना गया।
- भारत की लोकतांत्रिक यात्रा और प्रगति पर चर्चा की गई।
- एक मजबूत भारत की कल्पना की गई।
नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संबोधन की प्रशंसा की।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति के भाषण को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि यह हर नागरिक को संवैधानिक आदर्शों को मजबूत करने और विकसित भारत के निर्माण की प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए प्रेरित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने एक बहुत ही प्रेरणादायक भाषण दिया। उन्होंने हमारे संविधान की विशेषताओं पर सही जोर दिया और उस सामूहिक भावना की सराहना की जिसने हमारे देश को आगे बढ़ाया है। उनका भाषण हर नागरिक को लोकतंत्र को मजबूत करने, संवैधानिक आदर्शों को बनाए रखने और एक विकसित भारत बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से पक्का करने के लिए प्रेरित करता है।"
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र के नाम संबोधन में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, संविधान के मूल्यों और देश की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है और युवाओं की प्रतिभा से देश आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने किसानों, महिलाओं, सशस्त्र बलों और विभिन्न वर्गों के योगदान की सराहना की। उन्होंने 'वंदे मातरम' के इतिहास का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना पर जोर दिया।
राष्ट्रपति ने महिलाओं के उत्कृष्ट योगदान को विशेष रूप से उजागर किया, जैसे खेत से खेल और सेना तक उनकी भागीदारी। उन्होंने कहा कि बेटियों ने क्रिकेट विश्व कप जीतकर रिकॉर्ड बनाए और देश के विकास में महिलाओं की भूमिका बढ़ी है। संबोधन में भारत को जल्द दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने की संभावना पर भी बात की गई।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ते हुए एक मजबूत भारत की कल्पना की।
--आईएएएस
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