भारत सरकार ने सऊदी अरब में इजरायली गिरफ्तारी के दावे को गलत बताया, कांग्रेस समर्थक का था पोस्ट
सारांश
Key Takeaways
- भारत सरकार ने भ्रामक दावे को खारिज किया।
- सोशल मीडिया पर गलत जानकारी तेजी से फैलती है।
- आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना आवश्यक है।
- राजनीतिक रूप से पक्षपाती अकाउंट से फैली जानकारी।
- सऊदी अरब में भारतीय नागरिक की गिरफ्तारी की कोई पुष्टि नहीं।
नई दिल्ली, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रहे एक दावे को पूरी तरह से झूठा और भ्रामक करार दिया है। दावा यह था कि सऊदी अरब में एक भारतीय नागरिक को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट के रूप में गिरफ्तार किया गया है।
इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए लोगों से ऐसी अफवाहों से सतर्क रहने की अपील की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट तेजी से फैल रही थी, जिसमें कहा गया था कि सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियों ने मोसाद से जुड़े दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। इस पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया था कि ये दोनों एजेंट ईरान को फंसाने के लिए बम धमाकों की साजिश रच रहे थे।
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने इस दावे को पूर्णतः निराधार और मनगढ़ंत बताया है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे बेतुके और बिना आधार वाले दावों से सावधान रहें।"
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह दावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फैल रही गलत सूचनाओं की एक बड़ी लहर का हिस्सा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब में किसी भारतीय नागरिक की इस तरह की गिरफ्तारी की कोई विश्वसनीय जानकारी या आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
जांच में यह भी सामने आया कि यह भ्रामक दावा 'एमोक्सिसिलिन' नामक 'एक्स' अकाउंट से साझा किया गया था। इसी अकाउंट से यह जानकारी साझा की गई थी कि सऊदी अरब ने दो कथित मोसाद एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भारतीय भी शामिल है।
यह अकाउंट लंबे समय से राजनीतिक रूप से पक्षपाती पोस्ट साझा करता रहा है। अकाउंट पर अक्सर कांग्रेस पार्टी के पक्ष में कथित तौर पर सामग्री पोस्ट की जाती है और कई बार बिना पुष्टि वाली जानकारी भी साझा की जाती रही है।
अकाउंट पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषणों और बयानों की तारीफ करते हुए कई पोस्ट भी किए जाते हैं। कई बार उनके बयानों को साझा करते हुए उन्हें 'सांघियों' पर तीखा हमला बताया जाता है। 'सांघी' शब्द का उपयोग आमतौर पर ऑनलाइन भाजपा, आरएसएस या दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थकों के लिए किया जाता है।
इसके साथ ही, अकाउंट पर अक्सर भाजपा और उसके समर्थकों का मजाक उड़ाने या आलोचना करने वाले पोस्ट भी साझा किए जाते हैं, जिनमें 'सांघी इकोसिस्टम' और 'भक्त' जैसे शब्दों का उपयोग किया जाता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय सोशल मीडिया पर गलत जानकारी तेजी से फैलती है, इसलिए लोगों को ऐसी अपुष्ट खबरों पर भरोसा करने से बचना चाहिए और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए।