द्वारका सेक्टर-24 गोल्फ कोर्स के तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत, डीडीए जमीन पर हुई घटना
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर-24 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की जमीन पर निर्माणाधीन गोल्फ कोर्स परिसर के भीतर बने एक कृत्रिम तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गई। दिल्ली पुलिस ने 30 अप्रैल को इस घटना की पुष्टि की। मृत बच्चों की उम्र 8 से 10 साल के बीच बताई जा रही है।
घटनाक्रम: कैसे मिली सूचना
पुलिस के अनुसार, द्वारका सेक्टर-23 पुलिस स्टेशन को सुबह लगभग 7 बजकर 7 मिनट पर एक पीसीआर कॉल मिली, जिसमें गोल्फ कोर्स परिसर के अंदर स्थित तालाब में तीन बच्चों के डूबने की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) पुलिसकर्मियों के साथ तत्काल मौके पर पहुँचे और अन्य आपातकालीन एजेंसियों को भी सूचित किया गया।
बचाव अभियान और मौत की पुष्टि
मौके पर पहुँचने पर अधिकारियों ने तालाब में तीनों बच्चों को डूबा हुआ पाया। दमकल विभाग की सहायता से तीनों को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन उन्हें मौके पर ही मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल बच्चों की पहचान नहीं हो पाई है और पुलिस को उनके संबंध में कोई गुमशुदगी की रिपोर्ट भी प्राप्त नहीं हुई है।
शुरुआती जांच में क्या सामने आया
प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि बच्चे कथित तौर पर देर शाम बाउंड्री वॉल फाँदकर परिसर में घुसे थे। तालाब के बाहर उनके कपड़े मिले, जिससे पुलिस को संदेह है कि वे नहाने के इरादे से वहाँ गए थे और दुर्घटनावश डूब गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विस्तृत जांच के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
दिल्ली में डूबने की पिछली घटनाएँ
यह ऐसी पहली घटना नहीं है। जून 2025 में उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के पीतमपुरा में एक स्विमिंग पूल में डूबने से 6 वर्षीय तक्ष राठी की जान चली गई थी। कथित तौर पर वह अपने इलाके के अन्य बच्चों के साथ पूल में गया था और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित किया गया। इससे पहले अप्रैल 2024 में रोहिणी के बवाना नहर में तैरते समय तीन किशोर लड़के डूब गए थे, जिनके शव गहन तलाशी के बाद बरामद हुए थे। यह घटना ऐसे समय में आई है जब राजधानी में असुरक्षित जल-निकायों तक बच्चों की पहुँच को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आगे की जांच और प्रशासनिक जवाबदेही
पुलिस ने मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। डीडीए की जमीन पर निर्माणाधीन परिसर में सुरक्षा इंतज़ामों की कमी और बाउंड्री वॉल की अपर्याप्त निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और बच्चों की पहचान सामने आने की उम्मीद है।