नारियल किसानों के लिए संवर्धन योजना को अंतिम रूप देंगे: शिवराज सिंह चौहान
सारांश
Key Takeaways
- नारियल संवर्धन योजना का गठन किसानों की बातचीत के आधार पर किया जाएगा।
- उत्पादन, उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार का मुख्य लक्ष्य है।
- तमिलनाडु में लगभग 12.5 करोड़ किसान नारियल की खेती कर रहे हैं।
- किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जैसे पुरानी फसलें और रोग।
- जलवायु के अनुकूल अच्छी किस्म के पौधों का चयन किया जाएगा।
चेन्नई, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को चेन्नई का दौरा किया। उन्होंने कहा कि आज मैं नारियल उत्पादक राज्यों के किसानों से संवाद करने आया हूं। आईआईटी चेन्नई में तमिलनाडु समेत विभिन्न नारियल उत्पादक राज्यों के किसान, कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, अधिकारी, नारियल बोर्ड के अध्यक्ष और भारत सरकार के सभी अधिकारी एकत्रित हुए हैं।
उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने नारियल उत्पादक किसानों के लिए नारियल संवर्धन योजना की घोषणा की है, जिसका उद्घाटन वित्त मंत्री ने बजट में किया था। इस योजना को किसानों से बातचीत करके अंतिम रूप दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य उत्पादन, उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि करना है, ताकि हम नारियल किसानों की आय को बढ़ा सकें। किसानों से चर्चा के बाद नारियल संवर्धन बोर्ड की योजना बनाई जाएगी।"
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब भी मैं तमिलनाडु की इस पवित्र भूमि पर आता हूं, मेरा हृदय आनंद से भर जाता है। मैं तमिलनाडु की संस्कृति, परंपराओं और महान व्यक्तित्वों को नमन करता हूं। तमिलनाडु भारत का हृदय है।
उन्होंने आगे कहा कि आज मैं एक विशेष उद्देश्य से आया हूं। तमिलनाडु भारत में, विशेषकर दक्षिणी राज्यों में, नारियल उत्पादन का अग्रणी राज्य है। यहाँ लगभग 12.5 करोड़ किसान नारियल की खेती करते हैं और लगभग 3 करोड़ लोग अपनी आजीविका के लिए नारियल पर निर्भर हैं। तमिलनाडु के किसान कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नारियल के बाग बहुत पुराने हो गए हैं। 60-60 वर्ष पुराने नारियल के पेड़ों में उत्पादन कम हो गया है। इससे उत्पादकता में कमी आई है और कई बीमारियाँ भी उत्पन्न हो रही हैं।
बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हमें इन रोगों को रोकने के लिए उपाय खोजने की आवश्यकता है। अच्छी किस्म के पौधे तैयार किए जाने चाहिए जो जलवायु के अनुकूल हों, रोग प्रतिरोधक क्षमता रखते हों, और जिनकी उत्पादकता और गुणवत्ता बेहतर हो।