किसानों की आय में सुधार को लेकर सरकार का दृढ़ संकल्प: शिवराज सिंह चौहान
सारांश
Key Takeaways
- सरकार किसानों की आय और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
- तंबाकू की खेती को छोड़ने की अपील की गई है।
- एमएसपी में वृद्धि की गई है और रिकॉर्ड खरीद की जा रही है।
- फसल बीमा योजना में सुधार किया गया है।
- भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जैसे कि तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों को छोड़कर लाभकारी फसलों को बढ़ावा देना, एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद, फसल बीमा योजना में सुधार और कड़ी निगरानी प्रणाली लागू करना।
कृषि मंत्री चौहान ने सांसदों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि सरकार ने किसानों से तंबाकू की खेती को छोड़ने की अपील की है और इसके विकल्प के रूप में फायदे वाली फसलों की पहचान की है। इनमें हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, आलू, चिया, फीड बीन्स, लोबिया, रागी, अरहर, गन्ना, सोयाबीन, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें शामिल हैं, ताकि किसानों की नकद आय सुरक्षित बनी रहे।
उन्होंने बताया कि देश में अधिकांश किसानों के पास छोटी भूमि होती है, जिससे केवल एक फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इस समस्या को देखते हुए, सरकार ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग (मिश्रित खेती) के कई मॉडल विकसित किए हैं, जिनका विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन किया जा रहा है।
इन मॉडलों में किसान अनाज (गेहूं और धान), सब्जियां, फल, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और एग्रो-फॉरेस्ट्री जैसी गतिविधियों को एक साथ अपनाकर सालभर स्थिर और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।
चौहान ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए एमएसपी बढ़ाया गया है और इस सीजन में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद की जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि दालों जैसे तूर, मसूर और उड़द के लिए भी व्यवस्था की गई है, जिसमें किसान रजिस्ट्रेशन के बाद अपनी सम्पूर्ण उपज बेच सकते हैं, और सरकार उसे खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे दाल उत्पादक किसानों को बड़ा सहारा मिला है।
फसल बीमा योजना के संबंध में उन्होंने कहा कि पहले किसानों को मुआवजा प्राप्त करने में कई महीने लगते थे, लेकिन अब नियमों में सुधार किया गया है, जिससे यदि किसी एक किसान की फसल भी खराब होती है, तो उसे मुआवजा मिलना अनिवार्य होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि 21 दिनों के भीतर बीमा राशि किसान के खाते में नहीं आती है, तो बीमा कंपनी और राज्य सरकार को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इससे किसानों को देरी का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है और फसल बीमा या अन्य योजनाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि रक्षक पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है और जहां भी अनियमितता पाई जाती है, वहां दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में राजस्थान सहित कई राज्यों में फसल बीमा के तहत हजारों करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे गए हैं, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिला है।