भारत को वैश्विक 'फूड बास्केट' बनाने की दिशा में शिवराज सिंह चौहान के प्रयास
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नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में यह घोषणा की कि भारत को वैश्विक स्तर पर 'फूड बास्केट' बनाने के लिए केंद्र सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में केंद्र की कई योजनाओं का सही तरीके से कार्यान्वयन नहीं हो रहा है, जिससे वहां के गरीब किसान इन योजनाओं के लाभ से वंचित रह रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश में खाद्यान्न का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है और भारत की कृषि क्षमता की विश्व स्तर पर सराहना की जा रही है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 357 मिलियन टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोनों में सुधार हुआ है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत ने लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ वैश्विक स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया है, और इस क्षेत्र में चीन को पीछे छोड़ दिया है। इसके अतिरिक्त, गेहूं, सरसों, सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख फसलों में भी अभूतपूर्व उत्पादन हुआ है।
उन्होंने कहा कि पहले भारत को पीएल-480 योजना के तहत आयातित गेहूं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज देश के गोदाम गेहूं और चावल से भरे हुए हैं। स्थिति ऐसी है कि सरकार को अनाज के भंडारण की चिंता करनी पड़ रही है, जबकि वैश्विक स्तर पर भारत के किसानों और कृषि नीतियों की प्रशंसा हो रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने दालों, फलों और सब्जियों के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि दालों का उत्पादन लगभग 19 मिलियन टन से बढ़कर 25-26 मिलियन टन के स्तर पर पहुँच गया है।
इसी प्रकार, बागवानी उत्पादन भी 369 मिलियन टन से अधिक हो चुका है, जो किसानों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन रहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर रही है। इसके अंतर्गत गंगा जैसी नदियों के किनारे बड़े क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देशभर में एक करोड़ से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक और प्रशिक्षित किया गया है, और लाखों हेक्टेयर भूमि पर इस पद्धति को अपनाया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि यदि प्राकृतिक खेती सही तरीके से की जाए, तो उत्पादन में कमी नहीं होती, बल्कि कई मामलों में यह पहले से अधिक बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में किसानों को प्रति एकड़ वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिससे वे महंगे रासायनिक खाद और कीटनाशकों के स्थान पर स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर सकें।
इस मॉडल में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जैविक घोलों का उपयोग किया जाता है। साथ ही, इंटरक्रॉपिंग के जरिए एक ही खेत में अलग-अलग फसलें उगाई जाती हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और किसानों की लागत भी कम होती है।
कृषि मंत्री ने कहा कि आज भारत का खाद्यान्न उत्पादन हरित क्रांति के प्रारंभिक दौर की तुलना में कई गुना बढ़ चुका है, और अब इसकी वृद्धि दर भी पहले से तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि 2014-15 की तुलना में खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 40 से 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
दलहन, तिलहन, बागवानी और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी लगातार नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, जो किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा दोनों को मजबूत कर रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट उद्देश्य है कि भारत केवल अपने नागरिकों की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने तक सीमित न रहे, बल्कि “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के साथ विश्व की खाद्य आवश्यकताओं को भी पूरा करने वाला देश बने।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड उत्पादन, बेहतर भंडारण क्षमता और बढ़ती निर्यात संभावनाओं के कारण भारत वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय खाद्यान्न आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है। आने वाले समय में भारत की यह भूमिका और भी मजबूत होगी।