मोदी सरकार की कृषि नीतियों से बढ़ा खाद्यान्न उत्पादन, चावल में भारत बना विश्व का नंबर-1: शिवराज सिंह चौहान

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मोदी सरकार की कृषि नीतियों से बढ़ा खाद्यान्न उत्पादन, चावल में भारत बना विश्व का नंबर-1: शिवराज सिंह चौहान

सारांश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कृषि नीतियों में अभूतपूर्व सुधार हुए हैं। चावल उत्पादन में भारत ने विश्व में नंबर-1 स्थान हासिल किया है।

Key Takeaways

  • भारत ने चावल में विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया।
  • कृषि ऋण की उपलब्धता में वृद्धि हुई है।
  • सरकार ने कई महत्वपूर्ण नीतियां लागू की हैं।
  • किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।
  • महिला किसानों को भी योजना का लाभ मिल रहा है।

नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत के कृषि क्षेत्र में अद्वितीय परिवर्तन और प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों से गेहूं मंगाना पड़ता था। उस समय अमेरिका से पीएल-480 योजना के तहत लाल गेहूं आयात कर देशवासियों को खिलाया जाता था। लेकिन आजस्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और भारत खाद्यान्न उत्पादन में न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि दुनिया के शीर्ष देशों में भी शामिल हो गया है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि आज किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों के कारण देश के अन्न भंडार भर चुके हैं। विशेष रूप से चावल के उत्पादन में भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ भारत ने चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में पहला स्थान प्राप्त किया है।

उन्होंने कहा कि कुल खाद्यान्न उत्पादन की बात करें तो 2014 तक देश में लगभग 252 मिलियन टन उत्पादन होता था, जबकि अब यह बढ़कर करीब 357 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि किसानों की मेहनत, बेहतर नीतियों और आधुनिक तकनीकों के उपयोग का परिणाम है।

केंद्रीय मंत्री ने बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फलों और सब्जियों के उत्पादन, क्षेत्रफल और उत्पादकता—तीनों में निरंतर वृद्धि हो रही है। पहले जहां बागवानी फसलों का उत्पादन लगभग 277 मिलियन टन था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 369 मिलियन टन हो गया है। इससे किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है।

उन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। हालांकि, कुछ मात्रा में आयात करना पड़ता है, लेकिन सरकार लगातार उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। इसी दिशा में तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों की किसानों के जितनी चाहें उतनी खरीद करने का निर्णय लिया गया है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि किसानों को सही जानकारी और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए सरकार एक बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके। इस प्लेटफॉर्म के पहले चरण को भी लॉन्च किया जा चुका है, जिसमें किसान अपनी भाषा में फोन कॉल के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं, धान, दलहन और तिलहन की रिकॉर्ड खरीद की है। साथ ही, किसानों को सस्ती दर पर खाद उपलब्ध कराने के लिए उर्वरक सब्सिडी भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले साल उर्वरकों पर लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी, जबकि इस वर्ष के बजट में भी करीब 1.70 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

कृषि क्षेत्र में ऋण की उपलब्धता के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 तक कृषि ऋण का आंकड़ा लगभग 8.45 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 28.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे किसानों को खेती के लिए आवश्यक निवेश करने में मदद मिल रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का भी उल्लेख किया और बताया कि इस योजना के तहत अब तक करीब 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों को क्लेम के रूप में दी जा चुकी है। इससे प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों को बड़ी राहत मिलती है।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बताया। उन्होंने कहा कि 13 मार्च को पीएम नरेंद्र मोदी असम की राजधानी गुवाहाटी से लगभग 9 करोड़ 32 लाख किसानों के खातों में 18,640 करोड़ रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजेंगे।

उन्होंने बताया कि यह योजना फरवरी 2019 में शुरू हुई थी और तब से अब तक किसानों के खातों में 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। 22वीं किस्त जारी होने के बाद यह राशि बढ़कर लगभग 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने यह भी बताया कि इस योजना का लाभ बड़ी संख्या में महिला किसानों को भी मिल रहा है। लगभग 2 करोड़ 15 लाख से अधिक महिला किसानों के खातों में भी यह राशि भेजी जा रही है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि इस योजना से किसानों का कृषि में निवेश बढ़ा है, आवश्यक कार्यों के लिए कर्ज पर निर्भरता कम हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

उन्होंने देश के किसान भाई-बहनों को बधाई और शुभकामनाएं दीं और कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण और कृषि विकास का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

Point of View

NationPress
12/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने चावल उत्पादन में पहला स्थान कब प्राप्त किया?
भारत ने लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ दुनिया में पहला स्थान प्राप्त किया है।
कृषि क्षेत्र में सरकार की योजनाएं क्या हैं?
सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल बीमा योजना और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी कई योजनाएं लागू की हैं।
कृषि ऋण की उपलब्धता कितनी बढ़ी है?
2014 तक कृषि ऋण का आंकड़ा लगभग 8.45 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 28.69 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ किसे मिलता है?
इस योजना का लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिलता है, जिसमें महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है।
भारत खाद्यान्न उत्पादन में किस स्थिति में है?
भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है और दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
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