क्या शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 नई किस्में राष्ट्र को समर्पित की?
Key Takeaways
- कृषि विकास के लिए नई किस्में महत्वपूर्ण हैं।
- भारत अब खाद्य सुरक्षा में एक वैश्विक नेता है।
- नई किस्में जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करेंगी।
- किसानों को अनुसंधान का लाभ मिलना चाहिए।
- पोषण सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स स्थित एपी शिंदे ऑडिटोरियम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित 25 फील्ड फसलों की 184 उन्नत किस्मों का अनावरण किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत एक खाद्य-कमी वाले देश से वैश्विक खाद्य प्रदाता वाले देश में बदल गया है, जो कृषि विकास एवं खाद्य सुरक्षा में ऐतिहासिक रूप से मील का पत्थर साबित हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने चावल के उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ दिया है और दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन है, जिससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। साथ ही, दुनिया के खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका भी मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि “कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और खेती की आत्मा बीज है। अच्छे बीज उत्पादकता, पोषण और खाद्य सुरक्षा की नींव हैं।” चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान का सीधा फायदा किसानों को मिलना चाहिए और उन्होंने एक स्पष्ट लक्ष्य की घोषणा की और कहा कि नई जारी की गई किस्में तीन साल के अंदर किसानों तक पहुंचनी चाहिए। अनुसंधान तभी सार्थक है जब उसका फायदा समय पर खेतों तक पहुंचे।”
उन्होंने पोषण सुरक्षा पर सरकार के फोकस पर भी जोर दिया और कहा कि भारत का लक्ष्य अब सिर्फ पर्याप्त भोजन पैदा करना नहीं है, बल्कि दालों और तिलहनों पर विशेष ध्यान देते हुए पौष्टिक तथा उच्च गुणवत्ता वाली फसलें सुनिश्चित करना भी है।
केंद्रीय मंत्री ने बीज उत्पादन, प्रदर्शन और किसानों में जागरूकता लाने में तेजी लाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों, कृषि विश्वविद्यालयों, भाकृअनुप संस्थानों तथा निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल का आह्वान किया। सरकार के उद्देश्यों को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर, मजबूत तथा विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें किसान इस बदलाव के केन्द्र में हैं।
बताया गया कि 1969 में किस्मों की अधिसूचना शुरू होने के बाद से, 57 सालों में 7,205 फसल किस्मों को अधिसूचित किया गया है। इनमें से, 3,236 किस्में अकेले पिछले 11-12 सालों में अधिसूचित की गईं, जिसमें पिछले पांच सालों में 1,661 किस्में शामिल हैं, जो किस्मों के विकास में तेजी को दिखाती हैं।
हाल ही में जारी की गई 184 किस्मों में 122 अनाज, 6 दालें, 13 तिलहन, 11 चारा फसलें, 6 गन्ना, 24 कपास (जिसमें 22 बीटी कपास शामिल हैं) और जूट तथा तंबाकू की एक-एक किस्म शामिल हैं। भाकृअनुप संस्थानों, राज्य/केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालयों तथा निजी बीज कंपनियों द्वारा विकसित ये किस्में जलवायु-अनुकूल, अधिक उपज देने वाली तथा प्रमुख कीटों और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी हैं।
नई जारी की गई किस्में जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की लवणता, सूखा तथा अन्य जैविक एवं अजैविक तनाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित की गई हैं, साथ ही प्राकृतिक और जैविक खेती के तरीकों का भी समर्थन करती हैं।
कई किस्मों में विशेष गुण होते हैं, जैसे लवणता, सूखा, कम फास्फोरस, शाकनाशी, कीटों और बीमारियों के प्रति सहनशीलता, जल्दी पकना, बायोफोर्टिफिकेशन, उच्च प्रोटीन, दाना न झड़ना तथा कई बार कटाई वाली चारे की क्षमता। इनमें बेहतर चावल, मक्का, बाजरा, दालें, तिलहन, गन्ना, कपास, जूट और चारा फसलें शामिल हैं, जो विशिष्ट तनावों और उत्पादन प्रणालियों के लिए डिजाइन की गई हैं।