क्या भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया?
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने चीन को पछाड़कर चावल उत्पादन में पहला स्थान प्राप्त किया।
- कृषि के विकास में उच्च पैदावार वाले बीजों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- 184 नई उन्नत किस्में किसानों के लिए फायदेमंद होंगी।
- प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने पिछले 11 वर्षों में 3,236 किस्मों को मंजूरी दी।
- नई किस्में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद करेंगी।
नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत अब चावल उत्पादन में चीन को पछाड़कर दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साझा की।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत ने 150.18 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन रहा है।
चौहान ने बताया कि यह उपलब्धि उच्च पैदावार वाले बीजों के विकास के कारण हुई है। इसके साथ ही, भारत अब दुनिया के चावल के प्रमुख निर्यातकों में से एक है।
केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों का शुभारंभ किया। इनमें 122 अनाज, 6 दालें, 13 तिलहन, 11 चारा फसलें, 6 गन्ना, 24 कपास और जूट एवं तंबाकू की एक-एक किस्म शामिल हैं।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये नई किस्में किसानों तक जल्द पहुंचें। चौहान ने कहा कि ये किस्में किसानों के लिए लाभकारी होंगी क्योंकि ये उन्हें अधिक पैदावार एवं बेहतर गुणवत्ता की फसल प्राप्त करने में सहायता करेंगी।
इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों से भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दालों और तिलहनों के उत्पादन को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने को भी कहा।
चौहान ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 11 वर्षों में 3,236 उच्च उपज वाली किस्मों को मंजूरी दी गई, जबकि 1969 से 2014 के बीच केवल 3,969 किस्मों को मंजूरी मिली थी।
नई किस्में जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की लवणता, सूखा और अन्य जैविक एवं अजैविक तनावों से निपटने के लिए विकसित की गई हैं, इसके साथ ही ये प्राकृतिक और जैविक खेती पद्धतियों को बढ़ावा देने में भी सहायक होंगी।