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भारतीय सेना का ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास: वास्तविक युद्ध जैसी चुनौतियों का सामना

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भारतीय सेना का ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास: वास्तविक युद्ध जैसी चुनौतियों का सामना

सारांश

भारतीय सेना ने २४ फरवरी से ‘अग्नि वर्षा’ का आयोजन किया है, जिसमें कई आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाएगा। यह अभ्यास वास्तविक युद्ध की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

मुख्य बातें

अग्नि वर्षा अभ्यास की शुरुआत २४ फरवरी को हुई।
इसमें आधुनिक सैन्य तकनीक का उपयोग किया गया है।
अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त युद्धक क्षमता का परीक्षण करना है।
अभ्यास में २५ देशों के विशेषज्ञों की भागीदारी है।
यह भारतीय सेना की तकनीकी विशेषज्ञता का प्रदर्शन है।

नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना ने आज, २४ फरवरी से ‘अग्नि वर्षा’ का आयोजन आरंभ किया है। इस विशेष अभ्यास में आधुनिक टैंक, तोप, ड्रोन, रोबोट, मिसाइल, हेलिकॉप्टर और हवाई शक्ति का समावेश है।

‘अग्नि वर्षा’ वास्तव में भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास है। भारतीय सेना के अनुसार, यह अभ्यास वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में किया जा रहा है। २४ फरवरी को भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के अंतर्गत रेगिस्तानी क्षेत्र में यह प्रमुख सैन्य अभ्यास आयोजित किया जा रहा है।

इस व्यापक अभ्यास का उद्देश्य सेना की ऑपरेशनल तैयारी, संयुक्त युद्धक क्षमता और आधुनिक युद्ध प्रणाली की प्रभावशीलता का परीक्षण करना है। रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में सेना की विभिन्न शाखाएँ इस अभ्यास का हिस्सा बनी हैं। इनमें पैदल सेना, बख्तरबंद कोर, तोपखाना, वायु रक्षा और संचार इकाइयां शामिल हैं। ये सभी इकाइयाँ एकीकृत रूप से इस अभ्यास में भाग लेंगी।

इसका मुख्य ध्यान सभी हथियारों का समन्वित उपयोग करना है। यहाँ लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। नेटवर्क आधारित कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम को भी परखा जाएगा। युद्धाभ्यास में तेज और निर्णायक कार्रवाई की रणनीतियाँ विकसित की जाएँगी। रेगिस्तानी इलाके की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में यह अभ्यास अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके माध्यम से सेना यह मूल्यांकन करेगी कि आधुनिक तकनीकों और स्वदेशी हथियार प्रणालियों का उपयोग कर युद्ध में किस प्रकार त्वरित और प्रभावी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

इस अभ्यास का अवलोकन २५ देशों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ करेंगे। इससे न केवल भारत की सैन्य क्षमता का वैश्विक प्रदर्शन होगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वास निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। तकनीक और आत्मनिर्भरता को लेकर यह अभ्यास भारतीय सेना की उस स्थायी नीति को दर्शाता है, जिसमें आधुनिक तकनीक का समावेश, स्वदेशीकरण और युद्धक क्षमता के निरंतर विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

सेना का उद्देश्य है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के अनुसार अपनी रणनीति, संसाधनों और प्रणालियों को पूरी तरह सक्षम और अद्यतन बनाए रखें। यह राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप सेना की तैयारी है। सेना के अनुसार, यह अभ्यास एक स्पष्ट संदेश भी देता है कि भारतीय सेना राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव तैयार है। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित, सटीक और निर्णायक अभियान चलाने की क्षमता सेना के पास मौजूद है।

‘अग्नि वर्षा’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह आधुनिक, आत्मनिर्भर और तकनीक-सक्षम भारतीय सेना की शक्ति और संकल्प का प्रदर्शन है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए सेना की क्षमता को भी उजागर करता है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अग्नि वर्षा अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सेना की ऑपरेशनल तैयारी, संयुक्त युद्धक क्षमता और आधुनिक युद्ध प्रणाली की प्रभावशीलता का परीक्षण करना है।
इस अभ्यास में कौन-कौन सी तकनीकें शामिल हैं?
इस अभ्यास में आधुनिक टैंक, तोप, ड्रोन, रोबोट, मिसाइल, हेलिकॉप्टर और हवाई शक्ति शामिल हैं।
अग्नि वर्षा का अवलोकन कौन करेगा?
इस अभ्यास का अवलोकन २५ देशों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ करेंगे।
इस अभ्यास का स्थान क्या है?
यह अभ्यास भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के तत्वावधान में रेगिस्तानी क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है।
क्या यह अभ्यास केवल भारतीय सेना के लिए है?
नहीं, यह अभ्यास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जा रहा है, जिससे भारत की सैन्य क्षमता का वैश्विक प्रदर्शन हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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