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केंद्र सरकार ने केरल का नाम 'केरलम' रखने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

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केंद्र सरकार ने केरल का नाम 'केरलम' रखने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

सारांश

केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केरल का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह निर्णय स्थानीय भाषा के अनुरूप नामकरण की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने के लिए है।

मुख्य बातें

केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने का प्रस्ताव मंजूर हुआ है।
यह निर्णय लोकल भाषा की पहचान को सम्मान देता है।
निर्णय के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने इसे एक दीर्घकालिक मांग को पूरा करने वाला कदम बताया।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा कि कैबिनेट द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों में सबसे प्रमुख 'केरलम' नामकरण करना है। उन्होंने बताया कि भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद से ही यह मांग उठती रही है कि राज्य का आधिकारिक नाम उसकी स्थानीय भाषा के अनुरूप होना चाहिए। मलयालम में राज्य को 'केरलम' कहा जाता है, इसलिए यह मांग लंबे समय से की जा रही थी कि आधिकारिक रूप से भी राज्य का नाम 'केरलम' किया जाए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल केंद्र का एकतरफा निर्णय नहीं है, बल्कि इसके लिए एक निर्धारित संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इस प्रक्रिया में राज्य सरकार और राज्य विधानसभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राज्य विधानसभा की मंजूरी के बाद, केंद्र सरकार आवश्यक विधायी प्रक्रिया को पूरा करेगी और इसके बाद संसद में प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नाम में बदलाव से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा।

गौरतलब है कि देश के कई राज्यों के नाम स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप बदले जा चुके हैं। इसी क्रम में अब केरल को 'केरलम' नाम देने की दिशा में प्रक्रिया बढ़ाई जा रही है। संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य का आधिकारिक नाम 'केरलम' हो जाएगा।

केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद, भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु केरल (नाम में बदलाव) बिल, २०२६ को भारत के संविधान के आर्टिकल ३ के प्रोविजो के तहत अपनी राय बताने के लिए केरल राज्य विधानसभा को भेजेंगे। केरल राज्य विधानसभा की राय मिलने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और केरल राज्य का नाम बदलने के लिए केरल (नाम में बदलाव) बिल, २०२६ को संसद में पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश ली जाएगी।

बता दें कि संविधान के आर्टिकल ३ में मौजूदा राज्यों के नाम बदलने का प्रावधान है। आर्टिकल ३ के अनुसार, संसद कानून बनाकर किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय संघ के विविधता के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल का नाम बदलने का मुख्य कारण क्या है?
केरल का नाम बदलने का मुख्य कारण स्थानीय भाषा के अनुरूप नामकरण की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करना है।
इस प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी?
इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए एक संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाएगा, जिसमें राज्य विधानसभा की मंजूरी आवश्यक होगी।
क्या यह निर्णय केवल केंद्र का है?
नहीं, यह निर्णय केंद्र की एकतरफा कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसमें राज्य सरकार और विधानसभा की महत्वपूर्ण भूमिका है।
राष्ट्र प्रेस
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