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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन को उम्रकैद, BJP बोली — मौत की सजा में होगी तब्दील

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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन को उम्रकैद, BJP बोली — मौत की सजा में होगी तब्दील

सारांश

छह साल की कानूनी लड़ाई के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में ताहिर हुसैन को उम्रकैद सुनाई। भाजपा ने इसे न्याय की जीत बताते हुए मौत की सजा की माँग की, जबकि अन्य पक्षों ने दंगों की व्यापक जांच की जरूरत दोहराई।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को ताहिर हुसैन को IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में उम्रकैद और ₹5 लाख जुर्माने की सजा सुनाई।
ताहिर हुसैन के चार सहयोगियों को भी उम्रकैद और प्रत्येक को ₹20,000 जुर्माना।
13 जुलाई को दोषसिद्धि के बाद 31 जुलाई को सजा का ऐलान — छह वर्षों की कानूनी प्रक्रिया पूर्ण।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी और मंत्री कपिल मिश्रा ने उम्रकैद को मौत की सजा में बदलवाने की अपील का ऐलान किया।
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने फैसले का स्वागत करते हुए हाई कोर्ट जज से दंगों की जांच की पुरानी माँग दोहराई।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को 2020 दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और ₹5 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई। इस मामले में ताहिर हुसैन के चार अन्य सहयोगियों को भी उम्रकैद और प्रत्येक को ₹20,000 जुर्माने की सजा दी गई। छह वर्षों की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक प्रतिक्रिया का केंद्र बन गया है।

मुख्य घटनाक्रम

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में भड़के दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या ताहिर हुसैन के घर के सामने की गई थी और उनके शव को नाले में फेंकने की कोशिश की गई थी। संयुक्त पुलिस आयुक्त सुरेंद्र कुमार ने बताया, 'नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या ताहिर हुसैन के घर के सामने कर दी गई थी और उनकी लाश को नाले में फेंकने की कोशिश की गई थी।' कोर्ट ने 13 जुलाई को पहले ताहिर हुसैन और उनके चार साथियों को दोषी करार दिया था, और अब सजा सुनाकर इस विधिक प्रक्रिया को पूर्ण किया गया।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'आज के फैसले ने न्याय में हमारा भरोसा और मजबूत किया है। जिस व्यक्ति को मैं दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड मानता हूं, जो उस समय आम आदमी पार्टी का पार्षद था, उसे और उसके साथियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।' तिवारी ने यह भी कहा कि यह ट्रायल कोर्ट का पहला फैसला है और उन्हें उम्मीद है कि आगे चलकर इस सजा को मौत की सजा में बदला जाएगा।

दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने फैसले को 'न्याय की शुरुआत' बताया। उनके अनुसार, ताहिर हुसैन पर आरोप है कि उन्होंने बम और पत्थर जमा किए, गुलेलें बनाईं और सैकड़ों दंगाइयों को अपनी छत पर इकट्ठा होने दिया। मिश्रा ने कहा कि उनकी पार्टी उम्रकैद को मौत की सजा में बदलने की अपील करेगी। मंत्री आशीष सूद ने AAP नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने ताहिर हुसैन का खर्च उठाया — हालाँकि यह आरोप अभी तक सत्यापित नहीं है।

अन्य पक्षों की राय

मौलाना साजिद रशीदी ने 2020 के दंगों को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि उस दौरान कई मस्जिदें जलाई गईं और मुसलमानों की सैकड़ों दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने दावा किया कि घटना की रात ताहिर हुसैन ने उन्हें फोन कर बताया था कि वे 'चारों तरफ से घिरे हुए हैं और पुलिस मदद नहीं कर रही।' समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने फैसले का स्वागत करते हुए यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने दिल्ली दंगों की जांच हाई कोर्ट के जज से कराने की मांग की थी, लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकार ने ऐसा आदेश नहीं दिया।

आगे क्या होगा

यह फैसला ट्रायल कोर्ट स्तर का है और दोनों पक्ष उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे सजा को मौत की सजा में बदलवाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। गौरतलब है कि यह मामला 2020 के उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से जुड़े व्यापक मुकदमों का हिस्सा है, जिनमें अन्य आरोपियों के मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शुरुआत है — दोनों पक्ष उच्च न्यायालय जाएंगे और असली परीक्षण वहाँ होगा। ध्यान देने योग्य है कि 2020 के दंगों में दोनों समुदायों के लोग हताहत हुए और संपत्तियाँ नष्ट हुईं, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी अक्सर इस जटिलता को एकांगी बना देती है। मंत्री आशीष सूद का AAP पर ताहिर हुसैन का खर्च उठाने का आरोप अभी तक न्यायालय में सिद्ध नहीं हुआ है — ऐसे असत्यापित दावों और सत्यापित तथ्यों के बीच की रेखा इस पूरी कवरेज में धुंधली होती दिख रही है। दंगों की व्यापक और निष्पक्ष जांच की माँग — जो सपा सहित कई दलों ने उठाई थी — आज भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकित शर्मा हत्याकांड में कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य दोषी मानते हुए उम्रकैद और ₹5 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। उनके चार सहयोगियों को भी उम्रकैद और ₹20,000-₹20,000 जुर्माना लगाया गया।
अंकित शर्मा कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी थे। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों के दौरान उनकी हत्या ताहिर हुसैन के घर के सामने की गई थी और उनके शव को नाले में फेंकने की कोशिश की गई थी।
भाजपा ने मौत की सजा की माँग क्यों की?
भाजपा सांसद मनोज तिवारी और मंत्री कपिल मिश्रा का कहना है कि अपराध की बेरहमी और साजिश की गहराई को देखते हुए उम्रकैद पर्याप्त नहीं है। उन्होंने उच्च न्यायालय में सजा को मौत की सजा में बदलवाने की अपील करने का ऐलान किया है।
क्या इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई होगी?
यह ट्रायल कोर्ट का फैसला है और दोनों पक्ष दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। भाजपा नेताओं ने सजा बढ़ाने के लिए अपील का स्पष्ट संकेत दिया है, जबकि बचाव पक्ष भी फैसले को चुनौती दे सकता है।
2020 दिल्ली दंगों की व्यापक जांच की माँग का क्या हुआ?
समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा के अनुसार, उनकी पार्टी ने दिल्ली दंगों की जांच हाई कोर्ट के जज से कराने की माँग की थी, लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकार ने ऐसा आदेश नहीं दिया। यह माँग अभी भी अनुत्तरित है।
राष्ट्र प्रेस
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