ताहिर हुसैन को उम्रकैद: अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पाँच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने इस घटना को 'बहुत गंभीर' करार देते हुए कहा कि शर्मा की 'बेरहमी से हत्या' की गई और उनके शव को 'किसी जानवर की तरह' छोड़ दिया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज (ASJ) प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन के साथ-साथ चार अन्य दोषियों — जावेद, अनस, नाजिम और कासिम — को हत्या, अपहरण, दंगा और विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने के अपराधों में दोषी पाया। इससे पहले 28 जुलाई को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सजा पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि इस घटना ने 'समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया' — एक असाधारण टिप्पणी जो मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है।
दिल्ली पुलिस और अभियोजन पक्ष का रुख
दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए मौत की सजा की माँग की थी। पुलिस ने तर्क दिया था कि अंकित शर्मा के शरीर पर मिले 51 जख्म हमले की असाधारण क्रूरता को दर्शाते हैं और यह हत्या ठंडे दिमाग से की गई थी।
गौरतलब है कि यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) सहित कई गंभीर धाराओं में दर्ज था।
बचाव पक्ष के तर्क
हुसैन और अन्य दोषियों के वकीलों ने मौत की सजा का विरोध करते हुए दलील दी कि यह मामला 'बेहद दुर्लभ' श्रेणी में नहीं आता, जिसके लिए फाँसी की सजा दी जाए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि ट्रायल के दौरान आपराधिक साजिश का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया और अदालत से हुसैन के सुधरने की संभावना पर विचार करने का आग्रह किया।
कपिल मिश्रा की प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि 'ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा न्याय की शुरुआत है।' उन्होंने आगे लिखा कि जिस निर्दयता के साथ अंकित शर्मा को मारा गया — मृत्यु के बाद भी चाकूओं से गोदा जाता रहा और शव को नाले में फेंक दिया गया — वह निश्चित तौर पर 'बेहद दुर्लभ' है।
मिश्रा ने यह भी उम्मीद जताई कि उच्च न्यायालय में यह उम्रकैद फाँसी की सजा में बदली जाए।
आगे क्या होगा
यह मामला अब उच्च न्यायालय में अपील के लिए खुला है — दोनों पक्षों से। दिल्ली पुलिस मौत की सजा की माँग को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है। यह फैसला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मुकदमों में से एक का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसमें दर्जनों लोगों की जान गई थी।