31 जुलाई 2026
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ताहिर हुसैन को उम्रकैद: अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला

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ताहिर हुसैन को उम्रकैद: अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला

सारांश

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के दंगों में IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन और चार अन्य को उम्रकैद सुनाई। अदालत ने घटना को 'बहुत गंभीर' बताया; दिल्ली पुलिस ने माँगी थी फाँसी। मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे 'न्याय की शुरुआत' कहा।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा कोर्ट के ASJ प्रवीण सिंह ने 31 जुलाई को ताहिर हुसैन सहित पाँच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
दोषियों में जावेद, अनस, नाजिम और कासिम शामिल हैं; सभी पर हत्या, अपहरण और दंगा भड़काने के आरोप सिद्ध हुए।
IB अधिकारी अंकित शर्मा के शरीर पर 51 जख्म मिले थे; शव नाले में फेंका गया था।
दिल्ली पुलिस ने मौत की सजा की माँग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
मंत्री कपिल मिश्रा ने एक्स पर फैसले को 'न्याय की शुरुआत' बताया और उच्च न्यायालय में फाँसी की उम्मीद जताई।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पाँच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने इस घटना को 'बहुत गंभीर' करार देते हुए कहा कि शर्मा की 'बेरहमी से हत्या' की गई और उनके शव को 'किसी जानवर की तरह' छोड़ दिया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज (ASJ) प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन के साथ-साथ चार अन्य दोषियों — जावेद, अनस, नाजिम और कासिम — को हत्या, अपहरण, दंगा और विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने के अपराधों में दोषी पाया। इससे पहले 28 जुलाई को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सजा पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि इस घटना ने 'समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया' — एक असाधारण टिप्पणी जो मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है।

दिल्ली पुलिस और अभियोजन पक्ष का रुख

दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए मौत की सजा की माँग की थी। पुलिस ने तर्क दिया था कि अंकित शर्मा के शरीर पर मिले 51 जख्म हमले की असाधारण क्रूरता को दर्शाते हैं और यह हत्या ठंडे दिमाग से की गई थी।

गौरतलब है कि यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) सहित कई गंभीर धाराओं में दर्ज था।

बचाव पक्ष के तर्क

हुसैन और अन्य दोषियों के वकीलों ने मौत की सजा का विरोध करते हुए दलील दी कि यह मामला 'बेहद दुर्लभ' श्रेणी में नहीं आता, जिसके लिए फाँसी की सजा दी जाए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि ट्रायल के दौरान आपराधिक साजिश का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया और अदालत से हुसैन के सुधरने की संभावना पर विचार करने का आग्रह किया।

कपिल मिश्रा की प्रतिक्रिया

दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि 'ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा न्याय की शुरुआत है।' उन्होंने आगे लिखा कि जिस निर्दयता के साथ अंकित शर्मा को मारा गया — मृत्यु के बाद भी चाकूओं से गोदा जाता रहा और शव को नाले में फेंक दिया गया — वह निश्चित तौर पर 'बेहद दुर्लभ' है।

मिश्रा ने यह भी उम्मीद जताई कि उच्च न्यायालय में यह उम्रकैद फाँसी की सजा में बदली जाए।

आगे क्या होगा

यह मामला अब उच्च न्यायालय में अपील के लिए खुला है — दोनों पक्षों से। दिल्ली पुलिस मौत की सजा की माँग को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है। यह फैसला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मुकदमों में से एक का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसमें दर्जनों लोगों की जान गई थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि उम्रकैद और माँगी गई फाँसी के बीच की खाई को उच्च न्यायालय कैसे देखता है। अदालत ने 'बेहद दुर्लभ' की कसौटी पर मौत की सजा देने से इनकार किया, जबकि 51 जख्म और शव को नाले में फेंकने जैसी परिस्थितियाँ इस मानक के करीब दिखती हैं — यह विरोधाभास उच्च न्यायालय में केंद्रीय बहस बनेगा। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि 2020 के दंगों में हुई हिंसा के व्यापक संदर्भ में जवाबदेही की प्रक्रिया कितनी पूरी हुई है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ताहिर हुसैन को किस मामले में उम्रकैद की सजा मिली?
ताहिर हुसैन को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा मिली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई को यह फैसला सुनाया।
अंकित शर्मा की हत्या कैसे हुई थी?
IB अधिकारी अंकित शर्मा की 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान बेरहमी से हत्या की गई थी। उनके शरीर पर 51 जख्म पाए गए थे और उनका शव नाले में फेंक दिया गया था।
क्या ताहिर हुसैन को फाँसी की सजा हो सकती थी?
दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए मौत की सजा की माँग की थी, लेकिन अदालत ने माना कि यह मामला 'बेहद दुर्लभ' की उस श्रेणी में नहीं आता जिसके लिए फाँसी दी जाए। बचाव पक्ष ने भी यही तर्क दिया था।
कपिल मिश्रा ने इस फैसले पर क्या कहा?
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने एक्स पर लिखा कि यह सजा 'न्याय की शुरुआत' है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च न्यायालय इस उम्रकैद को फाँसी की सजा में बदलेगा।
इस मामले में आगे क्या होगा?
फैसले के बाद दोनों पक्ष दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। दिल्ली पुलिस मौत की सजा की माँग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख कर सकती है, जबकि दोषी भी सजा के खिलाफ अपील कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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