फिल्म 'सहिया' पर कपिल सिब्बल बोले — 'सेंसर बोर्ड का फैसला हैरान करने वाला, इसे अवॉर्ड मिलना चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने 14 सितंबर 2026 को फिल्म 'सहिया' देखने के बाद सेंसर बोर्ड के उस फैसले पर खुलकर हैरानी जताई, जिसके तहत फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार किया गया है। सिब्बल ने कहा कि फिल्म में एक भी ऐसा दृश्य नहीं है जिसे आपत्तिजनक ठहराया जा सके, और इसे रोकने के बजाय सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मामला अदालत में ले जाया जाएगा।
सिब्बल की तीखी प्रतिक्रिया
सिब्बल ने कहा, 'मैं इस बात से हैरान हूं कि आखिर सेंसर बोर्ड ने ऐसी फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार कैसे कर दिया। अब इस मामले को अदालत में ले जाया जाएगा और फिल्म को रिलीज कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। कहीं फिल्म को रोकने की वजह इसके साथ जुड़े '4 पीएम' नाम तो नहीं है।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'सरकार जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है। देश का माहौल बदल रहा है, लेकिन सरकार को शायद अभी इसका अहसास नहीं हो रहा।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की रिवाइजिंग कमेटी पर पारदर्शिता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं।
फिल्म के बारे में सिब्बल का मत
सिब्बल ने फिल्म की विषयवस्तु का बचाव करते हुए कहा, 'मैंने फिल्म देखी है, इसका मकसद हिंसा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि हिंसा के बीच फंसे आम इंसान और उसके प्रेम की कहानी को सामने रखना है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि फिल्म में कोई आपत्तिजनक हिस्सा है, तो बोर्ड को उसे स्पष्ट रूप से बताना चाहिए — न कि समग्र प्रमाणपत्र ही रोक देना चाहिए।
सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया पर सवाल
निर्माता पक्ष के अनुसार, 23 अगस्त 2026 को बोर्ड के समक्ष अंतिम प्रत्यावेदन दिया गया था। तय प्रक्रिया के तहत इस पर पाँच दिन के भीतर फैसला दिया जाना चाहिए था। लेकिन 14 सितंबर 2026 तक, यानी करीब 22 दिन बीतने के बाद भी, बोर्ड ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि फिल्म को दोबारा देखा गया या नहीं, प्रत्यावेदन पर क्या विचार हुआ, और आगे बोर्ड का फैसला क्या होगा।
गौरतलब है कि विवाद तब शुरू हुआ जब CBFC की रिवाइजिंग कमेटी ने 27 अगस्त 2026 को फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। फिल्म के निर्माता संजय शर्मा ने बताया था कि बोर्ड ने फिल्म पर नक्सलवाद से जुड़े होने का आरोप लगाकर इसे पास करने में अड़चन पैदा की।
शूटिंग स्थान को लेकर विवादास्पद टिप्पणी
निर्माता संजय शर्मा ने एक और चौंकाने वाली बात साझा की। उनके अनुसार, बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे कहा कि यदि फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश में हुई होती, तो उन्हें प्रमाणपत्र दे दिया जाता।
शर्मा ने कहा, 'यह बात सुनकर मैं हैरान रह गया। अगर कहानी और फिल्म वही है, लेकिन सिर्फ शूटिंग की जगह बदल जाने से फिल्म का मतलब कैसे बदल सकता है? झारखंड या छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी और कभी नक्सल प्रभावित माने जाने वाले इलाकों में शूट करने की वजह से उसी फिल्म पर सवाल उठता है, तो यह सोचने वाली बात है।' उन्होंने यह भी चेताया कि ऐसी सोच से आदिवासी इलाके फिल्मों की शूटिंग से ही बाहर हो सकते हैं।
आगे क्या होगा
कपिल सिब्बल के बयान के बाद यह मामला कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर तेज़ होने के संकेत हैं। फिल्म की रिलीज के लिए न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी की जा रही है। CBFC की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है, और यह मामला फिल्म सेंसरशिप की सीमाओं और प्रक्रियागत पारदर्शिता पर व्यापक बहस का केंद्र बनता जा रहा है।