14 सितंबर 2026
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फिल्म 'सहिया' पर कपिल सिब्बल बोले — 'सेंसर बोर्ड का फैसला हैरान करने वाला, इसे अवॉर्ड मिलना चाहिए'

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फिल्म 'सहिया' पर कपिल सिब्बल बोले — 'सेंसर बोर्ड का फैसला हैरान करने वाला, इसे अवॉर्ड मिलना चाहिए'

सारांश

फिल्म 'सहिया' को CBFC का प्रमाणपत्र न मिलने का विवाद अब कानूनी लड़ाई की दहलीज़ पर है। कपिल सिब्बल ने फिल्म देखने के बाद बोर्ड के फैसले को 'हैरान करने वाला' बताया और न्यायालय जाने का संकेत दिया — यह मामला सेंसरशिप, आदिवासी भूगोल और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

मुख्य बातें

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने 14 सितंबर 2026 को फिल्म 'सहिया' देखने के बाद CBFC के फैसले पर हैरानी जताई।
सिब्बल ने कहा फिल्म में कोई आपत्तिजनक दृश्य नहीं; इसे रोकने के बजाय अवॉर्ड दिया जाना चाहिए।
निर्माता संजय शर्मा के अनुसार 23 अगस्त 2026 को दिए अंतिम प्रत्यावेदन पर 22 दिन बाद भी बोर्ड ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
CBFC की रिवाइजिंग कमेटी ने 27 अगस्त 2026 को फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार किया था — आरोप: नक्सलवाद से संबंध।
बोर्ड के एक अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि उत्तर प्रदेश में शूट होती तो सर्टिफिकेट मिल जाता — इस टिप्पणी पर निर्माता ने गहरी आपत्ति जताई।
सिब्बल ने मामले को अदालत में ले जाने का संकेत दिया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने 14 सितंबर 2026 को फिल्म 'सहिया' देखने के बाद सेंसर बोर्ड के उस फैसले पर खुलकर हैरानी जताई, जिसके तहत फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार किया गया है। सिब्बल ने कहा कि फिल्म में एक भी ऐसा दृश्य नहीं है जिसे आपत्तिजनक ठहराया जा सके, और इसे रोकने के बजाय सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मामला अदालत में ले जाया जाएगा।

सिब्बल की तीखी प्रतिक्रिया

सिब्बल ने कहा, 'मैं इस बात से हैरान हूं कि आखिर सेंसर बोर्ड ने ऐसी फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार कैसे कर दिया। अब इस मामले को अदालत में ले जाया जाएगा और फिल्म को रिलीज कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। कहीं फिल्म को रोकने की वजह इसके साथ जुड़े '4 पीएम' नाम तो नहीं है।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'सरकार जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है। देश का माहौल बदल रहा है, लेकिन सरकार को शायद अभी इसका अहसास नहीं हो रहा।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की रिवाइजिंग कमेटी पर पारदर्शिता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं।

फिल्म के बारे में सिब्बल का मत

सिब्बल ने फिल्म की विषयवस्तु का बचाव करते हुए कहा, 'मैंने फिल्म देखी है, इसका मकसद हिंसा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि हिंसा के बीच फंसे आम इंसान और उसके प्रेम की कहानी को सामने रखना है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि फिल्म में कोई आपत्तिजनक हिस्सा है, तो बोर्ड को उसे स्पष्ट रूप से बताना चाहिए — न कि समग्र प्रमाणपत्र ही रोक देना चाहिए।

सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया पर सवाल

निर्माता पक्ष के अनुसार, 23 अगस्त 2026 को बोर्ड के समक्ष अंतिम प्रत्यावेदन दिया गया था। तय प्रक्रिया के तहत इस पर पाँच दिन के भीतर फैसला दिया जाना चाहिए था। लेकिन 14 सितंबर 2026 तक, यानी करीब 22 दिन बीतने के बाद भी, बोर्ड ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि फिल्म को दोबारा देखा गया या नहीं, प्रत्यावेदन पर क्या विचार हुआ, और आगे बोर्ड का फैसला क्या होगा।

गौरतलब है कि विवाद तब शुरू हुआ जब CBFC की रिवाइजिंग कमेटी ने 27 अगस्त 2026 को फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। फिल्म के निर्माता संजय शर्मा ने बताया था कि बोर्ड ने फिल्म पर नक्सलवाद से जुड़े होने का आरोप लगाकर इसे पास करने में अड़चन पैदा की।

शूटिंग स्थान को लेकर विवादास्पद टिप्पणी

निर्माता संजय शर्मा ने एक और चौंकाने वाली बात साझा की। उनके अनुसार, बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे कहा कि यदि फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश में हुई होती, तो उन्हें प्रमाणपत्र दे दिया जाता।

शर्मा ने कहा, 'यह बात सुनकर मैं हैरान रह गया। अगर कहानी और फिल्म वही है, लेकिन सिर्फ शूटिंग की जगह बदल जाने से फिल्म का मतलब कैसे बदल सकता है? झारखंड या छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी और कभी नक्सल प्रभावित माने जाने वाले इलाकों में शूट करने की वजह से उसी फिल्म पर सवाल उठता है, तो यह सोचने वाली बात है।' उन्होंने यह भी चेताया कि ऐसी सोच से आदिवासी इलाके फिल्मों की शूटिंग से ही बाहर हो सकते हैं।

आगे क्या होगा

कपिल सिब्बल के बयान के बाद यह मामला कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर तेज़ होने के संकेत हैं। फिल्म की रिलीज के लिए न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी की जा रही है। CBFC की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है, और यह मामला फिल्म सेंसरशिप की सीमाओं और प्रक्रियागत पारदर्शिता पर व्यापक बहस का केंद्र बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह प्रमाणन की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। तय समयसीमा के बावजूद 22 दिनों की चुप्पी प्रक्रियागत अनुशासन की कमी दर्शाती है। मुख्यधारा की कवरेज सिब्बल के बयान पर केंद्रित है, लेकिन असली कहानी यह है कि आदिवासी और पूर्व-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में फिल्मांकन खुद एक 'रेड फ्लैग' बन गया है — और यह सोच सिनेमा की विविधता के लिए दीर्घकालिक नुकसान है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'सहिया' को सेंसर बोर्ड ने प्रमाणपत्र क्यों नहीं दिया?
CBFC की रिवाइजिंग कमेटी ने 27 अगस्त 2026 को फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया। निर्माता संजय शर्मा के अनुसार, बोर्ड ने फिल्म पर नक्सलवाद से जुड़े होने का आरोप लगाया, जिसे निर्माता पक्ष बेबुनियाद बताता है।
कपिल सिब्बल का 'सहिया' विवाद से क्या संबंध है?
वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने 14 सितंबर 2026 को फिल्म देखी और सेंसर बोर्ड के फैसले पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि फिल्म में कोई आपत्तिजनक दृश्य नहीं है और मामले को अदालत में ले जाने का संकेत दिया।
सेंसर बोर्ड ने 22 दिनों में जवाब क्यों नहीं दिया?
निर्माता पक्ष के अनुसार, 23 अगस्त 2026 को अंतिम प्रत्यावेदन दिया गया था, जिस पर तय प्रक्रिया के तहत पाँच दिन में फैसला आना चाहिए था। 14 सितंबर 2026 तक 22 दिन बीत चुके हैं और CBFC ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
शूटिंग की जगह को लेकर क्या विवाद है?
निर्माता संजय शर्मा ने दावा किया कि CBFC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि यदि फिल्म उत्तर प्रदेश में शूट होती तो सर्टिफिकेट मिल जाता। निर्माता का तर्क है कि झारखंड या छत्तीसगढ़ में शूटिंग की वजह से फिल्म की विषयवस्तु का अर्थ नहीं बदलता।
'सहिया' फिल्म आगे रिलीज होगी या नहीं?
कपिल सिब्बल ने संकेत दिया है कि मामले को अदालत में ले जाया जाएगा और कानूनी लड़ाई के ज़रिए रिलीज कराने की कोशिश होगी। CBFC की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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