जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल विवाद: राजेश ठाकुर बोले — 'लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर, कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में 15 सितंबर 2026 को होने वाली सुनवाई से एक दिन पहले कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने रांची में कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल एक भर्ती प्रक्रिया का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है, और कांग्रेस इस मुद्दे पर कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी।
मामले की पृष्ठभूमि और जांच की स्थिति
राज्य सरकार की ओर से इस मामले की जांच सीआईडी के माध्यम से कराई जा रही है। ठाकुर के अनुसार, जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, लेकिन जिन्हें वे मामले का मुख्य आरोपी या कथित संरक्षणदाता मानते हैं, उन तक अभी कार्रवाई नहीं पहुँची है। उन्होंने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष के जेल जाने का उदाहरण देते हुए माँग की कि जाँच में दोषी पाए गए हर व्यक्ति के विरुद्ध समान रूप से कठोर कानूनी कदम उठाए जाएँ।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
राजेश ठाकुर ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल परीक्षा प्रक्रिया से सीधे जुड़े लोगों की जांच करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'बिना अधिकारियों के संरक्षण के इस तरह की गड़बड़ी होना संभव नहीं है।' उनके अनुसार, व्यवस्था में जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की भूमिका की भी विस्तृत जांच होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी ओहदे पर क्यों न हों।
मुख्यमंत्री और सरकार पर भरोसा
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में मामले से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सोरेन किसी भी दोषी को बख्शेंगे नहीं और जांच में जैसे-जैसे नाम उभरेंगे, संबंधितों पर कार्रवाई होती रहेगी। गौरतलब है कि यह बयान हाई कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले आया है, जो इसे राजनीतिक और न्यायिक — दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाता है।
पारदर्शिता और भर्ती व्यवस्था पर असर
ठाकुर ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना अनिवार्य है। परीक्षा में किसी भी प्रकार की धाँधली से न केवल सीधे प्रभावित अभ्यर्थियों को नुकसान होता है, बल्कि पूरी भर्ती प्रणाली में युवाओं का विश्वास भी डगमगाता है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड सहित देशभर में सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े हो चुके हैं।
आगे क्या
झारखंड हाई कोर्ट में 15 सितंबर 2026 को होने वाली सुनवाई इस मामले में अगला निर्णायक मोड़ मानी जा रही है। सीआईडी की जांच जारी है और कांग्रेस का रुख स्पष्ट है कि दोषियों की पहचान और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को तार्किक अंत तक पहुँचाया जाए। राजेश ठाकुर के बयान से साफ है कि यह विवाद आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में केंद्रीय मुद्दा बना रहेगा।