जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: राकेश सिन्हा बोले — 'कांग्रेस छात्रों के साथ थी, है और रहेगी'; भाजपा पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर राजनीतिक तापमान 30 जुलाई को और चढ़ गया, जब कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने रांची में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला बोला। सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से देश के छात्रों के साथ खड़ी रही है और महागठबंधन सरकार भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
सीआईडी जांच और गिरफ्तारियां
राकेश सिन्हा ने कहा कि महागठबंधन सरकार ने जवाबदेही का परिचय देते हुए जेपीएससी मामले की सीआईडी जांच कराई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन से घंटों पूछताछ की जा रही है और संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई जारी है। उनके अनुसार, सीआईडी की पैनी नजर मामले के हर पहलू पर है और जांच निरंतर आगे बढ़ रही है।
सिन्हा ने यह भी कहा कि वर्षों से जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार को समाप्त करने में समय लगता है, लेकिन सरकार उसे पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने छात्रों की जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग को उचित बताया, किंतु यह भी कहा कि जांच को पूरी तरह निष्कर्ष तक पहुंचने देना जरूरी है।
भ्रष्टाचार की जड़ें और भाजपा पर आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जेपीएससी में भ्रष्टाचार की शुरुआत भाजपा के शुरुआती शासनकाल में हुई थी। उनके अनुसार, बाबूलाल मरांडी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान इस भ्रष्टाचार ने जन्म लिया, जिसे बाद में अर्जुन मुंडा और रघुवर दास सरकारों के दौरान और बढ़ावा मिला। सिन्हा ने कहा कि महागठबंधन सरकार उसी 'भ्रष्टाचार के वटवृक्ष' को काटने का काम कर रही है और इसीलिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई संभव हो सकी है।
भाजपा के मौन व्रत पर तीखी प्रतिक्रिया
झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की मांग को लेकर भाजपा द्वारा संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रस्तावित मौन व्रत पर सिन्हा ने कहा कि भाजपा ने नीट पेपर लीक, रेलवे भर्ती परीक्षा, व्यापम घोटाले और महिलाओं व खिलाड़ियों से जुड़े कई मामलों में चुप्पी साधे रखी। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि शायद गांधीजी के चरणों में बैठने से भाजपा नेताओं को यह सद्बुद्धि मिले कि छात्रों पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
पेपर लीक और राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें
सिन्हा ने पेपर लीक की समस्या पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि केवल कानून पेश कर देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित समिति ने 110 सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपी थीं, लेकिन उन पर अमल नहीं किया गया। उनके अनुसार, जब तक पेपर लीक माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहेगा, केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
जंतर-मंतर कार्रवाई, बांकीपुर उपचुनाव और अन्य मुद्दे
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई पर सिन्हा ने केंद्र सरकार से जवाबदेही मांगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए छात्रों पर लाठीचार्ज की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर सिन्हा ने दावा किया कि युवाओं, छात्रों और महिलाओं का बड़ा वर्ग भाजपा से नाराज है और लोकतंत्र व संविधान में विश्वास रखने वाली ताकतों की जीत होगी। कोयला घोटाले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ केस बंद होने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने पर सिन्हा ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से माफी की मांग की। आने वाले दिनों में जेपीएससी-जेएसएससी विवाद और सीआईडी जांच के नतीजे झारखंड की राजनीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।