राहुल गांधी ने रांची के आंदोलनकारी छात्रों से की फोन पर बात, JPSC-JSSC अनियमितताओं पर झारखंड सरकार से बात का दिया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 6 अगस्त 2026 की रात रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 13 दिनों से धरने पर बैठे छात्रों से फोन पर बातचीत की। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 25 जुलाई से आंदोलनरत इन छात्रों ने गांधी को पेपर लीक, लंबित नियुक्तियों और पारदर्शिता की माँग से अवगत कराया। गांधी ने मांगों का विस्तृत ज्ञापन व्हाट्सएप पर भेजने को कहा और झारखंड सरकार से बात करने का भरोसा दिलाया।
बातचीत कैसे हुई
यह संवाद रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा के मोबाइल फोन के ज़रिए कराया गया। करीब 10 मिनट तक चली इस बातचीत में छात्र नेताओं ने भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के अनशन पर बैठे होने की जानकारी दी। राहुल गांधी ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि 'छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए।'
11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन
छात्रों ने सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी की। इसमें 8 छात्र प्रतिनिधि, 2 पत्रकार और 1 अधिवक्ता शामिल हैं। हालाँकि, छात्रों ने स्पष्ट किया कि सरकार के सामने मांगें केवल छात्र प्रतिनिधि ही रखेंगे — पत्रकार और अधिवक्ता केवल अभिभावक और मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे।
पारदर्शी वार्ता की शर्त
आंदोलनकारियों ने दोहराया कि वे बंद कमरे में किसी भी वार्ता में शामिल नहीं होंगे। उनकी माँग है कि बातचीत पूरी तरह सार्वजनिक और पारदर्शी हो। प्रतिनिधिमंडल की सूची सरकार को भेजे जाने के बावजूद देर रात तक वार्ता का समय और स्थान तय नहीं हो पाया था।
छात्रों की मुख्य माँगें
छात्र JPSC, JSSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई (CBI) जाँच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की माँग कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी नौकरियों की पारदर्शिता को लेकर युवाओं में व्यापक असंतोष है।
आगे क्या होगा
आंदोलनकारियों ने 7 अगस्त को विधानसभा मार्च का आह्वान किया है। गौरतलब है कि यह झारखंड में सरकारी भर्ती को लेकर हाल के वर्षों में सबसे लंबे चले छात्र आंदोलनों में से एक है। राहुल गांधी की सक्रियता से इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक ध्यान मिला है, और अब सभी की निगाहें झारखंड सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।