7 अगस्त 2026
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झारखंड: JPSC-JSSC विवाद पर सरकार-छात्र वार्ता सकारात्मक, 14वें दिन भी सत्याग्रह जारी

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झारखंड: JPSC-JSSC विवाद पर सरकार-छात्र वार्ता सकारात्मक, 14वें दिन भी सत्याग्रह जारी

सारांश

झारखंड में 14 दिनों से चल रहे JPSC-JSSC विरोध आंदोलन में पहली बार सरकार और छात्र आमने-सामने आए। वार्ता सकारात्मक रही, पर समझौता नहीं हुआ — सत्याग्रह जारी है और दूसरे दौर की बातचीत की उम्मीद है।

मुख्य बातें

7 अगस्त, शुक्रवार को रांची के मोरहाबादी अतिथिशाला में सरकार और छात्रों के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई, जो करीब डेढ़ घंटे चली।
सरकारी टीम में 4 मंत्री — चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव — और विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह शामिल रहे।
छात्रों ने 14वीं जेपीएससी पीटी और जेएसएससी सीजीएल विवादों की निष्पक्ष जाँच तथा भर्ती प्रक्रिया में सुधार की माँग दोहराई।
बातचीत को 'सकारात्मक' बताया गया, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हुआ; छात्रों ने सत्याग्रह जारी रखने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संवाद के ज़रिए समाधान का भरोसा दिलाया; दूसरे दौर की वार्ता जल्द संभावित।

झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे 14 दिवसीय छात्र आंदोलन के बीच 7 अगस्त, शुक्रवार की शाम राज्य सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई। रांची के मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में हुई यह वार्ता करीब डेढ़ घंटे — रात 9 बजकर 25 मिनट तक — चली। छात्र प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया, हालाँकि अंतिम समझौता अभी नहीं हुआ है और सत्याग्रह जारी रहेगा।

वार्ता का स्वरूप और प्रतिनिधिमंडल

बैठक में सरकार की ओर से पाँच सदस्यीय टीम और छात्रों की ओर से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ। सरकारी पक्ष में मंत्री चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह और संजय प्रसाद यादव के साथ विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह भी उपस्थित रहे।

छात्र प्रतिनिधिमंडल में रवींद्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल थे। गौरतलब है कि गुरुवार को प्रतिनिधिमंडल की संरचना को लेकर गतिरोध था — सरकार ने केवल छात्रों से बातचीत की शर्त रखी थी, जिसके बाद छात्रों ने नई सूची सौंपी और शुक्रवार को वार्ता संभव हुई।

छात्रों की मुख्य माँगें

छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, 14वीं जेपीएससी पीटी और जेएसएससी सीजीएल से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जाँच और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की माँग एक-एक बिंदु पर सरकार के सामने रखी। प्रतिनिधियों ने कहा कि वे केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्रियों ने छात्रों को आश्वस्त किया कि सरकार उनके एक-एक मुद्दे के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी। माना जा रहा है कि चारों मंत्रियों की यह समिति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को छात्रों की माँगों से अवगत कराएगी, जिसके बाद जल्द ही दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है।

वार्ता से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा परिसर में कहा, 'सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है। बातचीत के ज़रिए समाधान निकाला जा सकता है। छात्रों के सवाल, सुझाव और जिज्ञासाएँ खुलकर सामने आनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की भागीदारी से भर्ती और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार संभव हैं।

आंदोलन की स्थिति और आगे की राह

पहली औपचारिक वार्ता के बावजूद छात्रों ने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौता होने और माँगें पूरी होने तक सत्याग्रह जारी रहेगा। यह आंदोलन 14वें दिन भी अपनी धार बनाए रहा। अब दूसरे दौर की वार्ता और सरकार की ओर से ठोस घोषणाओं पर सबकी नज़र है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अंत नहीं — और यही इसकी सीमा भी है। सरकार का 'सकारात्मक कदम' वाला आश्वासन तब तक खोखला रहेगा, जब तक JPSC-JSSC जाँच के लिए कोई स्वतंत्र और समयबद्ध तंत्र घोषित नहीं होता। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर यह पहला बड़ा आंदोलन नहीं है — बार-बार वार्ता और बार-बार गतिरोध का यह चक्र संस्थागत खामियों की ओर इशारा करता है। असली सवाल यह है कि क्या इस बार सुधार की माँग केवल 'संज्ञान' तक सीमित रहेगी, या परीक्षा प्रणाली में ढाँचागत बदलाव होगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में JPSC-JSSC छात्र आंदोलन क्यों हो रहा है?
छात्र 14वीं जेपीएससी पीटी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। यह सत्याग्रह 7 अगस्त तक 14 दिनों से जारी था।
7 अगस्त की सरकार-छात्र वार्ता में क्या हुआ?
रांची के मोरहाबादी अतिथिशाला में सरकार की 5 सदस्यीय टीम और छात्रों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब डेढ़ घंटे की बातचीत हुई। छात्रों ने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हुआ और सत्याग्रह जारी रखने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्र आंदोलन पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा परिसर में कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और बातचीत के ज़रिए समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने युवाओं की भागीदारी से भर्ती और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात भी कही।
क्या झारखंड में दूसरे दौर की वार्ता होगी?
माना जा रहा है कि चारों मंत्रियों की समिति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को छात्रों की माँगों से अवगत कराएगी, जिसके बाद जल्द ही दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है। हालाँकि इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।
वार्ता से पहले गुरुवार को क्या गतिरोध था?
गुरुवार को सरकार ने केवल छात्रों से बातचीत की शर्त रखी थी, जिससे प्रतिनिधिमंडल की संरचना को लेकर गतिरोध पैदा हो गया था। इसके बाद छात्रों ने नई 10 सदस्यीय सूची सरकार को सौंपी, जिससे शुक्रवार को वार्ता संभव हुई।
राष्ट्र प्रेस
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