जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन: रांची में आज दूसरे दौर की वार्ता, 15वें दिन भी सत्याग्रह जारी
सारांश
मुख्य बातें
जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच के छात्रों और झारखंड सरकार के बीच वार्ता का दूसरा दौर शनिवार, 8 अगस्त 2026 को सुबह 10:30 बजे स्टेट गेस्ट हाउस, रांची में निर्धारित है। मंच का 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सरकार द्वारा गठित दल के साथ सीधी बातचीत करेगा। छात्रों का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आज अपने 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह विवाद 2 जुलाई को जेपीएससी द्वारा आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के उजागर होने के बाद शुरू हुआ। छात्रों ने 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आरंभ किया और तब से लगातार संघर्ष जारी है। छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो पिछले छह दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिससे आंदोलन की तीव्रता और बढ़ गई है।
छात्र प्रतिनिधिमंडल में कौन शामिल
मंच ने सरकार से वार्ता के लिए 8 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल तय किया है — चंदन कुमार, दीनबंधु मंडल, रविशंकर, प्रेम कुमार, पूजा कुमारी, रामवतार महतो, बिमल कुमार और अमित कुमार शर्मा। ये सभी मंच की ओर से अपनी माँगों को सरकार के सामने औपचारिक रूप से रखेंगे।
पहले दौर की वार्ता का हाल
इससे पहले शुक्रवार शाम को मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में पहली औपचारिक बैठक हुई, जो करीब डेढ़ घंटे चली और रात 9:25 बजे समाप्त हुई। उस बैठक में सरकार की 5 सदस्यीय टीम और छात्रों का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ था। छात्र प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया, हालाँकि कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।
सरकार की ओर से मंत्री चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह और संजय प्रसाद यादव बैठक में उपस्थित थे। विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह भी इस बैठक का हिस्सा रहे।
छात्रों की प्रमुख माँगें
छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच और परीक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की माँग दोहराई है। मंच ने स्पष्ट किया है कि जब तक ठोस कार्रवाई और माँगों की पूर्ण स्वीकृति नहीं होती, सत्याग्रह समाप्त नहीं होगा।
आगे क्या होगा
आज के दूसरे दौर की वार्ता के नतीजे इस आंदोलन की दिशा तय करेंगे। यदि सरकार और छात्रों के बीच सहमति नहीं बनी, तो भूख हड़ताल और सत्याग्रह और अधिक तीव्र होने की संभावना है। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर यह टकराव राज्य की भर्ती प्रक्रिया पर दीर्घकालिक प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।