झारखंड JPSC विरोध: 16वें दिन भी अड़े छात्र, भूख हड़ताली देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन 9 अगस्त को अपने 16वें दिन में प्रवेश कर गया। राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत के दो दौर बेनतीजे रहने के बाद गतिरोध और गहरा हो गया है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डेरा डाले छात्रों ने सरकार पर "खोखले वादे" करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है।
भूख हड़ताली नेता की बिगड़ी तबीयत
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं। शनिवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुँची और उन्हें सलाइन चढ़ाया गया। महतो ने बताया, "रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।"
उपस्थित चिकित्सक डॉ. ए.के. सिन्हा ने बताया कि लंबे समय तक उपवास के कारण पेट में अधिक एसिड बनने लगता है, जिससे सीने में दर्द होता है। उन्होंने कहा, "हालाँकि उनका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।" इसके बावजूद महतो ने स्पष्ट किया कि वे आंदोलन और अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।
बातचीत के दोनों दौर बेनतीजे
शुक्रवार को हुई पहली बातचीत में सरकार के 5 सदस्यीय और छात्रों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। छात्रों ने अपनी सभी मांगें सरकार के सामने रखीं और स्पष्ट जवाब माँगा। शनिवार को बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया। दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और छात्र आंदोलन वापस लेने को तैयार नहीं हुए।
यह ऐसे समय में आया है जब 2 जुलाई को आयोजित JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से छात्र लगातार सड़क पर हैं। गौरतलब है कि यह झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर हाल के वर्षों में सबसे लंबा चला छात्र आंदोलन बन गया है।
छात्र नेताओं की बेबाक आवाज़
भूख हड़ताल पर बैठे एक अन्य छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, "भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। आंदोलन को कमज़ोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूँ कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।"
छात्र नेता चंदन ने आरोप लगाया कि "पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे।" वहीं छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा कि झारखंड के भ्रष्ट सिस्टम की वजह से नौकरी न मिलने के बाद उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 10 अगस्त को विधानसभा तक विरोध मार्च निकाला जाएगा।
छात्रों की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं — कथित गड़बड़ी वाली परीक्षाओं को रद्द किया जाए, भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जाँच हो और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आगे क्या होगा
10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च आंदोलन की तीव्रता का अगला पड़ाव होगा। भूख हड़ताली नेताओं की बिगड़ती सेहत और सरकार की ओर से ठोस आश्वासन के अभाव में यह गतिरोध और लंबा खिंचने की आशंका है। झारखंड सरकार पर अब यह दबाव है कि वह छात्रों की मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाए, अन्यथा यह आंदोलन राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।