23 सितंबर 2026
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ओडिशा विधानसभा में लगातार दूसरे दिन हंगामा: पाठ्यपुस्तक गलतियों पर मंत्री के इस्तीफे की माँग, MMDR कानून पर कांग्रेस अड़ी

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ओडिशा विधानसभा में लगातार दूसरे दिन हंगामा: पाठ्यपुस्तक गलतियों पर मंत्री के इस्तीफे की माँग, MMDR कानून पर कांग्रेस अड़ी

सारांश

ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र में लगातार दूसरे दिन गतिरोध — एक तरफ पाठ्यपुस्तक की गलतियाँ और अर्धवार्षिक परीक्षाओं की आसन्न समयसीमा, दूसरी तरफ MMDR कानून पर विपक्ष की अडिग माँग। सदन शाम 4 बजे तक स्थगित।

मुख्य बातें

ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन 23 सितंबर 2026 को भी कार्यवाही बाधित रही।
बीजद ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में गलतियों पर मंत्री नित्यानंद गोंड के तत्काल इस्तीफे की माँग की।
कांग्रेस ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 निरस्त करने और सदन में बहस की माँग दोहराई।
अर्धवार्षिक परीक्षाएं अगले 15 दिनों में शुरू होनी हैं, पर छात्रों को अभी तक सुधरी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिलीं।
उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई को सदन शाम 4 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
भाजपा ने विपक्ष पर राजनीतिक हित के लिए जानबूझकर बाधा डालने का आरोप लगाया।

ओडिशा विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन बुधवार, 23 सितंबर 2026 को भी कार्यवाही बाधित रही, जब विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस के विधायकों ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में गलतियों तथा एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 के विरोध में जमकर हंगामा किया। लगातार दूसरे दिन व्यवधान के चलते उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई को सदन को शाम 4 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

सदन में क्या हुआ

जैसे ही प्रश्नकाल की कार्यवाही प्रारंभ हुई, कांग्रेस और बीजद के विधायक बैनर और तख्तियाँ लेकर स्पीकर के पोडियम के समीप एकत्र हो गए और सरकार-विरोधी नारे लगाने लगे। भारी शोर-शराबे के बीच उपाध्यक्ष ने कार्यवाही चलाने का प्रयास किया, किंतु विरोध थमा नहीं और अंततः सदन स्थगित करना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की विधायी कार्यवाही पहले से ही दबाव में है।

पाठ्यपुस्तक विवाद और मंत्री के इस्तीफे की माँग

बीजद विधायकों ने राज्य की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में पाई गई गलतियों को लेकर स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के तत्काल इस्तीफे की माँग एक बार फिर दोहराई। बीजद विधायक शारदा प्रसन्न जेना ने कहा, 'सरकार में कोई भी इस चूक की नैतिक जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। अर्धवार्षिक परीक्षाएं अगले 15 दिनों में शुरू होने वाली हैं, लेकिन छात्रों को अभी तक सुधारी गई पाठ्यपुस्तकें नहीं दी गई हैं। इसलिए स्कूल और जन शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि भाजपा हमेशा खुद को विचारधारा पर आधारित पार्टी बताती रही है।' गौरतलब है कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों की परीक्षा-तैयारी से सीधे जुड़ा हुआ है।

MMDR संशोधन अधिनियम पर कांग्रेस का विरोध

कांग्रेस विधायक दल के नेता रमा चंद्र कदम ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 को निरस्त करने और सदन में इस कानून पर विस्तृत बहस कराने की अपनी माँग कायम रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा, 'जब तक एमएमडीआर संशोधन अधिनियम निरस्त नहीं हो जाता, हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। चाहे विधानसभा हो, संसद हो या सड़क, कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती रहेगी।' आलोचकों का कहना है कि यह कानून राज्य के खनिज संसाधनों पर केंद्र के नियंत्रण को बढ़ाता है।

सत्तारूढ़ BJP का पलटवार

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक हित साधने के लिए जानबूझकर सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं। भाजपा विधायक मानस कुमार दत्ता ने कहा कि बीजद ने पहले विधानसभा के नियमों के अनुसार बहस के लिए प्रस्ताव दिया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार भी कर लिया था, और सरकार भी बहस के लिए तैयार थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजद सदस्य बहस में भाग लेने के बजाय जानबूझकर व्यवधान डाल रहे थे, ताकि भुवनेश्वर में उनकी पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन की ओर ध्यान खींचा जा सके।

आगे क्या होगा

मानसून सत्र अभी जारी है और दोनों विपक्षी दलों ने अपने-अपने मुद्दों पर दबाव बनाए रखने का संकेत दिया है। यदि सुधरी हुई पाठ्यपुस्तकें समय पर वितरित नहीं हुईं, तो पाठ्यपुस्तक विवाद और गहरा हो सकता है। वहीं, एमएमडीआर कानून पर बहस की माँग भी सदन के बाहर आंदोलन का रूप लेती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि अर्धवार्षिक परीक्षाएं सिर पर हैं और लाखों छात्र अब भी सुधरी किताबों का इंतजार कर रहे हैं। MMDR कानून पर विपक्ष की माँग भी केवल विधायी बहस तक सीमित नहीं — यह राज्य के खनिज संसाधनों पर नियंत्रण के बड़े सवाल से जुड़ी है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है। BJP का यह तर्क कि विपक्ष बहस से भाग रहा है, अपने आप में एक राजनीतिक कथा है जो असली जवाबदेही की जगह नहीं ले सकती।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा विधानसभा में किन मुद्दों पर हंगामा हो रहा है?
ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र में दो प्रमुख मुद्दों पर हंगामा हो रहा है — स्कूली पाठ्यपुस्तकों में गलतियाँ और एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026। बीजद मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा माँग रहा है, जबकि कांग्रेस MMDR कानून निरस्त करने की माँग पर अड़ी है।
एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 क्या है और विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है?
एमएमडीआर (खान और खनिज विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026 केंद्रीय खनन कानून में किया गया बदलाव है। आलोचकों का कहना है कि यह राज्यों के खनिज संसाधनों पर नियंत्रण को प्रभावित करता है। कांग्रेस विधायक दल के नेता रमा चंद्र कदम ने इसे निरस्त करने और सदन में विस्तृत बहस की माँग की है।
पाठ्यपुस्तक विवाद में छात्रों पर क्या असर पड़ रहा है?
बीजद विधायक शारदा प्रसन्न जेना के अनुसार, अर्धवार्षिक परीक्षाएं अगले 15 दिनों में शुरू होने वाली हैं, लेकिन ओडिशा के छात्रों को अभी तक सुधरी हुई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। यह स्थिति लाखों विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारी को सीधे प्रभावित कर रही है।
BJP ने विपक्ष के विरोध पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भाजपा विधायक मानस कुमार दत्ता ने आरोप लगाया कि बीजद ने पहले बहस के लिए प्रस्ताव दिया था जिसे स्पीकर ने स्वीकार भी किया, लेकिन बीजद सदस्य जानबूझकर सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे। भाजपा का कहना है कि सरकार राज्य हित के हर मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है।
ओडिशा विधानसभा की कार्यवाही कब तक स्थगित हुई?
23 सितंबर 2026 को हंगामे के बाद उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई ने सदन को शाम 4 बजे तक स्थगित किया। यह मानसून सत्र का लगातार दूसरा दिन था जब व्यवधान के कारण कार्यवाही बाधित रही।
राष्ट्र प्रेस
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