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ओडिशा मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, बीजेडी ने MMDR संशोधन पर चर्चा की माँग की

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ओडिशा मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, बीजेडी ने MMDR संशोधन पर चर्चा की माँग की

सारांश

ओडिशा विधानसभा के 9 दिवसीय मानसून सत्र (22 सितंबर–3 अक्टूबर) से पहले सर्वदलीय बैठक में बीजेडी ने MMDR संशोधन से राज्य को हुए नुकसान पर चर्चा की माँग रखी। कांग्रेस ने भी समर्थन दिया। सरकार ने चर्चा को विधानसभा अध्यक्ष के विवेक पर छोड़ा।

मुख्य बातें

ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने 21 सितंबर 2026 को मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई।
बीजू जनता दल (बीजेडी) ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम से ओडिशा को हुए नुकसान पर सदन में विस्तृत चर्चा की माँग की।
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अशोक दास ने भी इस मुद्दे को सत्र में उठाने की पुष्टि की।
संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा — एमएमडीआर चर्चा पर फैसला विधानसभा अध्यक्ष करेंगी।
सत्र के लिए अब तक छह विधेयकों के नोटिस प्राप्त; प्राथमिकता सलाहकार समिति तय करेगी।
17वीं विधानसभा का सातवाँ सत्र 22 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक, कुल नौ दिन ।

ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाधी ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में आगामी मानसून सत्र से पूर्व सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने में सहयोग की अपील की गई। विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) ने इस अवसर पर एमएमडीआर (खान एवं खनिज विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम से ओडिशा को हुए नुकसान पर सदन में विस्तृत चर्चा कराने की माँग रखी।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

सर्वदलीय बैठक में विधानसभा उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, नेता प्रतिपक्ष के उपनेता प्रसन्न आचार्य तथा सभी प्रमुख दलों के वरिष्ठ विधायक मौजूद रहे। संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने सत्तापक्ष की ओर से भागीदारी की।

बीजेडी और कांग्रेस की माँगें

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए विपक्ष की मुख्य सचेतक और बीजेडी की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने कहा, 'विपक्ष के रूप में हमने बीजेडी की ओर से एमएमडीआर संशोधन के कारण राज्य को हुए नुकसान पर सदन में चर्चा की माँग की है। हमने इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा के लिए एक प्रस्ताव भी दिया है।' उन्होंने आगे कहा कि सरकार या तो बीजेडी के प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दे या धन्यवाद प्रस्ताव के माध्यम से इस मुद्दे पर विमर्श कराए।

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अशोक दास ने भी पुष्टि की कि उनकी पार्टी मानसून सत्र के दौरान एमएमडीआर संशोधन अधिनियम सहित ओडिशा के हितों से जुड़े अन्य मुद्दों को सदन के पटल पर लाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के खनन राजस्व पर केंद्रीय नीतियों के प्रभाव को लेकर विपक्षी एकता बनती दिख रही है।

सरकार का रुख

संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सदन में उठने वाले सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, 'सत्र के दौरान जो भी विधेयक और मुद्दे सामने आएँ, उन पर सकारात्मक तरीके से चर्चा होनी चाहिए।' एमएमडीआर संशोधन पर उन्होंने कहा कि यह मामला अब पूरी तरह विधानसभा अध्यक्ष के विवेक और अधिकार क्षेत्र में है — वही तय करेंगी कि चर्चा किस स्वरूप और किस प्राथमिकता के साथ हो।

महालिंग ने यह भी बताया कि विधानसभा को अब तक छह विधेयकों के नोटिस प्राप्त हो चुके हैं। विधानसभा की सलाहकार समिति यह निर्धारित करेगी कि किन विधेयकों को प्राथमिकता दी जाए और उन पर कितना समय आवंटित किया जाए।

मानसून सत्र का कार्यक्रम

ओडिशा की 17वीं विधानसभा का सातवाँ सत्र 22 सितंबर 2026 से शुरू होकर 3 अक्टूबर 2026 तक चलेगा — कुल नौ दिनों का यह सत्र राज्य की राजनीति के लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि बीजेडी अब विपक्ष में है और केंद्रीय खनन नीतियों के मुद्दे पर वह अपनी धार तेज करती दिख रही है।

आगे क्या होगा

प्रमिला मलिक ने संकेत दिया कि बीजेडी का अगला कदम विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा। यदि एमएमडीआर चर्चा की अनुमति नहीं मिली, तो विपक्ष सदन में वैकल्पिक रणनीति अपना सकता है। सत्र की शुरुआत 22 सितंबर से है और पहले दिन से ही सदन में तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

और MMDR संशोधन पर केंद्र-राज्य तनाव वास्तविक है — लेकिन सवाल यह है कि क्या विपक्ष के पास इस मुद्दे को संख्याओं और दस्तावेज़ों के साथ साबित करने की तैयारी है। विधानसभा अध्यक्ष का 'विचार करने का आश्वासन' एक कूटनीतिक टालमटोल भी हो सकता है। यदि चर्चा की अनुमति नहीं मिली, तो बीजेडी के लिए यह सत्र सड़क पर आंदोलन की ज़मीन तैयार कर सकता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा मानसून सत्र 2026 कब से शुरू होगा?
ओडिशा की 17वीं विधानसभा का सातवाँ सत्र 22 सितंबर 2026 से शुरू होकर 3 अक्टूबर 2026 तक चलेगा — कुल नौ दिनों का यह सत्र है।
बीजेडी ने MMDR संशोधन पर चर्चा की माँग क्यों की?
बीजेडी का कहना है कि एमएमडीआर (खान एवं खनिज विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम से ओडिशा को राजस्व का नुकसान हुआ है। पार्टी ने इस पर सदन में विस्तृत बहस के लिए प्रस्ताव दिया है और विधानसभा अध्यक्ष से इसे प्राथमिकता देने की अपील की है।
सर्वदलीय बैठक में क्या निर्णय हुआ?
बैठक में कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ। विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने बीजेडी की MMDR चर्चा की माँग पर विचार करने का आश्वासन दिया। संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह फैसला विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में है।
कांग्रेस का इस सत्र में क्या रुख है?
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अशोक दास ने कहा कि उनकी पार्टी मानसून सत्र के दौरान MMDR संशोधन सहित ओडिशा के हितों से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाएगी। यह संकेत देता है कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है।
आगामी सत्र में कितने विधेयक लाए जाएँगे?
अब तक विधानसभा को छह विधेयकों के नोटिस मिले हैं। हालाँकि विधानसभा की सलाहकार समिति यह तय करेगी कि किन विधेयकों को प्राथमिकता दी जाए और प्रत्येक पर कितना समय आवंटित किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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