श्रीनगर सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा मंजूर, 3 नवंबर से सीट रिक्त
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने श्रीनगर-बडगाम संसदीय सीट से सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है, जिससे यह सीट 3 नवंबर 2026 से आधिकारिक तौर पर रिक्त हो गई है। लोकसभा सचिवालय ने गुरुवार, 6 नवंबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। मेहदी ने जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) से बगावत करते हुए पार्टी सदस्यता और संसदीय पद दोनों से इस्तीफा दिया था।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
2024 के आम चुनावों में श्रीनगर से लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद से ही आगा रूहुल्लाह मेहदी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे थे। उनका आरोप है कि पार्टी ने चुनावी घोषणापत्र में मतदाताओं से किए गए वादों को पूरा नहीं किया। इसके अलावा, उन्होंने पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को लिखे एक पत्र में अनुच्छेद 370 पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के रुख को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए थे।
गौरतलब है कि मेहदी ने पिछले साल बडगाम विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार आगा सैयद महमूद के चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लिया था। यह सीट तब रिक्त हुई थी जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बडगाम और गांदरबल दोनों सीटों से जीत हासिल करने के बाद बडगाम से इस्तीफा देकर गांदरबल सीट अपने पास रखने का फैसला किया था।
मेहदी का उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला
3 नवंबर को इस्तीफे के बाद बडगाम में समर्थकों की बड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए मेहदी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'आज आप जिस कुर्सी पर बैठे हैं, उसमें सत्ता तो है, लेकिन सम्मान नहीं है। अगर आपको सम्मान देखना है, तो बडगाम आइए।' यह बयान नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व के लिए एक खुली चुनौती माना जा रहा है।
श्रीनगर सीट पर अब क्या होगा
लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद अब भारत निर्वाचन आयोग को श्रीनगर-बडगाम संसदीय सीट पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी करनी होगी। यह सीट जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील और महत्वपूर्ण सीटों में से एक मानी जाती है।
यह ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार अपने शुरुआती दौर में है और पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत अब सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे हैं। मेहदी की बगावत से उमर अब्दुल्ला सरकार की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए राजनीतिक संकट
मेहदी जैसे वरिष्ठ और लोकप्रिय नेता का पार्टी से अलग होना नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व को चुनावी वादों और सरकारी फैसलों के बीच की खाई को पाटने पर ध्यान देना होगा, अन्यथा आने वाले उपचुनाव में पार्टी के लिए यह सीट वापस जीतना मुश्किल हो सकता है।