31 अगस्त 2026
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नेशनल कॉन्फ्रेंस में मतभेद की खबरें 'अफवाह': जम्मू-कश्मीर मंत्री जावेद अहमद डार

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नेशनल कॉन्फ्रेंस में मतभेद की खबरें 'अफवाह': जम्मू-कश्मीर मंत्री जावेद अहमद डार

सारांश

नेशनल कॉन्फ्रेंस के मंत्री जावेद अहमद डार ने पार्टी में फूट की खबरों को 'टीआरपी की अफवाह' कहा — लेकिन सांसद रुहुल्लाह मेहदी की 3 नवंबर को इस्तीफे की घोषणा और अनुच्छेद 370 पर सार्वजनिक आरोप बताते हैं कि एनसी के भीतर दरार महज अफवाह नहीं है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर मंत्री जावेद अहमद डार ने 31 अगस्त को नेशनल कॉन्फ्रेंस में मतभेद की खबरों को 'अफवाह' बताया।
सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को राज्यसभा और लोकसभा दोनों से इस्तीफे की घोषणा की है।
रुहुल्लाह ने आरोप लगाया कि एनसी नेतृत्व ने अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली के मुद्दे को दरकिनार किया।
डार ने 2012 का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व के हर फैसले को स्वीकार करती आई है।
फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्लाह को बिना एनसी समर्थन के चुनाव जीतकर दिखाने की खुली चुनौती दी है।

जम्मू-कश्मीर के मंत्री और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेता जावेद अहमद डार ने सोमवार, 31 अगस्त को श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए पार्टी के भीतर मतभेद की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इन्हें 'टीआरपी बढ़ाने के लिए फैलाई जा रही अफवाहें' करार दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वरिष्ठ एनसी सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी से अपनी नाराज़गी सार्वजनिक रूप से जताई है।

मंत्री का बयान: 'पार्टी पूरी तरह एकजुट'

डार ने पत्रकारों से स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ऐसा कुछ नहीं है। कोई निराश नहीं है। हमारे नेता मजबूत हैं और उनकी टीम भी मजबूत है।' उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वे अटकलों और अफवाहों से बचें। उनके अनुसार, पार्टी में किसी भी प्रकार की आंतरिक निराशा नहीं है।

उन्होंने 2012 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय आठ मंत्रियों को पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और जम्मू डिवीजन के कुछ मंत्रियों को छोड़कर सभी ने नेतृत्व के फैसले को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा, 'हमारे नेता जो भी फैसला करेंगे, हम उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।'

रुहुल्लाह मेहदी का विरोध और इस्तीफे की घोषणा

मंत्री के दावों के बावजूद, श्रीनगर लोकसभा सीट से एनसी सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पार्टी ने जनता से किए गए वादे पूरे नहीं किए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी नेताओं द्वारा राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग दरअसल अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली के मुद्दे को हमेशा के लिए बंद करने की कोशिश थी।

रुहुल्लाह ने घोषणा की है कि वे 3 नवंबर को राज्यसभा और लोकसभा — दोनों सदनों से इस्तीफा दे देंगे। यह तारीख उनके लिए व्यक्तिगत रूप से अत्यंत संवेदनशील है — 26 साल पहले इसी दिन उनके पिता आगा सैयद मेहदी की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। गौरतलब है कि उमर अब्दुल्ला के साथ रुहुल्लाह के संबंध लंबे समय से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं, जो अब पार्टी छोड़ने के निर्णय पर आकर समाप्त हुए हैं।

वरिष्ठ नेतृत्व की चुनौती

पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला सहित वरिष्ठ एनसी नेताओं ने रुहुल्लाह को खुली चुनौती दी है कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन के बिना अकेले चुनाव लड़ें और जीतकर दिखाएँ। यह बयान पार्टी की ओर से रुहुल्लाह पर बढ़ते दबाव का संकेत है।

आगे की स्थिति

एनसी के भीतर यह घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नई परत जोड़ता है, जहाँ अनुच्छेद 370 की बहाली और राज्य के दर्जे का मुद्दा अभी भी केंद्रीय राजनीतिक विमर्श में बना हुआ है। 3 नवंबर की तारीख जैसे-जैसे करीब आएगी, पार्टी के भीतर और बाहर दबाव बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अनुच्छेद 370 और राज्य के दर्जे पर एनसी की रणनीतिक चुप्पी पर एक बड़ा राजनीतिक सवाल है। फारूक अब्दुल्ला की 'अकेले जीतकर दिखाओ' वाली चुनौती पार्टी के आत्मविश्वास से कम, रक्षात्मकता से अधिक लगती है। जम्मू-कश्मीर में जहाँ जनता का भरोसा जीतना पहले से कठिन है, वहाँ पार्टी के भीतर यह दरार एनसी के लिए दीर्घकालिक नुकसानदेह साबित हो सकती है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जावेद अहमद डार ने नेशनल कॉन्फ्रेंस में मतभेद की खबरों पर क्या कहा?
जावेद अहमद डार ने 31 अगस्त को श्रीनगर में पत्रकारों से कहा कि पार्टी में मतभेद की खबरें 'टीआरपी बढ़ाने के लिए फैलाई जा रही अफवाहें' हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और नेतृत्व मजबूत है।
रुहुल्लाह मेहदी ने इस्तीफे की घोषणा क्यों की?
आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने कहा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जनता से किए गए वादे पूरे नहीं किए और अनुच्छेद 370 व 35ए की बहाली के मुद्दे को दरकिनार किया गया। उन्होंने 3 नवंबर को राज्यसभा और लोकसभा दोनों से इस्तीफे का ऐलान किया है — यह तारीख उनके पिता की आतंकवादियों द्वारा हत्या की 26वीं बरसी है।
रुहुल्लाह मेहदी कौन हैं और वे किस सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं?
आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और श्रीनगर लोकसभा सीट के सांसद हैं। वे लंबे समय से उमर अब्दुल्ला के करीबी माने जाते रहे हैं, लेकिन हाल के घटनाक्रम के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है।
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्लाह को क्या चुनौती दी?
पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और वरिष्ठ एनसी नेताओं ने रुहुल्लाह को चुनौती दी है कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन के बिना अकेले चुनाव लड़ें और जीतकर दिखाएँ। यह बयान पार्टी की ओर से रुहुल्लाह पर राजनीतिक दबाव का हिस्सा माना जा रहा है।
2012 में नेशनल कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ था जिसका डार ने उल्लेख किया?
जावेद अहमद डार के अनुसार, 2012 में आठ मंत्रियों को पार्टी के मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जम्मू डिवीजन के कुछ मंत्रियों को छोड़कर बाकी सभी ने नेतृत्व के फैसले को स्वीकार किया था। डार ने इस उदाहरण से यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में अनुशासन की परंपरा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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