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अनुच्छेद 370 बहाली ही असली मुद्दा: एनसी सांसद रुहुल्लाह मेहदी का जंतर-मंतर प्रदर्शन पर स्पष्ट रुख

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अनुच्छेद 370 बहाली ही असली मुद्दा: एनसी सांसद रुहुल्लाह मेहदी का जंतर-मंतर प्रदर्शन पर स्पष्ट रुख

सारांश

एनसी सांसद रुहुल्लाह मेहदी का जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान, लेकिन शर्त साफ — माँग राज्य के दर्जे तक नहीं, अनुच्छेद 370 की पूर्ण बहाली तक जानी चाहिए। पार्टी नेतृत्व से बढ़ती दूरी और 2024 के घोषणापत्र पर सवाल — एनसी के भीतर एक नई दरार की तस्वीर।

मुख्य बातें

आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में भाग लेने की पुष्टि की, लेकिन कहा कि अनुच्छेद 370 की बहाली ही केंद्रीय मुद्दा होनी चाहिए।
उन्होंने एक दिन के आयोजन की बजाय सतत और संगठित राजनीतिक अभियान की माँग की।
भूमि अधिकारों, नौकरियों और आरक्षण नीतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि स्थानीय लोगों को उचित हिस्से से वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 'स्थायी शांति' केवल 'न्याय' से मिलेगी, प्रतीकात्मक उपायों से नहीं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व पर 2024 के चुनाव घोषणापत्र के वादे पूरे न करने का आरोप; पार्टी बैठकों से दूरी जारी।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने मंगलवार, 9 जून को स्पष्ट किया कि वे जंतर-मंतर पर होने वाले पार्टी प्रदर्शन में भाग लेंगे, लेकिन उनका जोर इस बात पर रहा कि इस आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा संविधान के अनुच्छेद 370 की बहाली होना चाहिए — महज राज्य का दर्जा पाना नहीं। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि एक दिन का राजनीतिक आयोजन पर्याप्त नहीं है और एक सतत, संगठित अभियान की ज़रूरत है।

मुख्य माँगें और रुहुल्लाह का रुख

रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि माँग केवल राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें 2019 से पहले की संवैधानिक सुरक्षाओं की पूर्ण बहाली भी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी व्यापक चिंताओं को इस आंदोलन में प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रूप में चल रहा है।

युवाओं की समस्याएँ और न्याय की माँग

सांसद ने 2019 के बाद की अवधि में युवा पीढ़ी के सामने आने वाली कठिनाइयों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने भूमि अधिकारों, नौकरियों और आरक्षण नीतियों पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को उनके उचित हिस्से से वंचित किया जा रहा है। पुलवामा सहित ग्रामीण क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि और आजीविका को प्रभावित करने वाले प्रतिबंध कथित व्यवस्थागत अन्याय की ओर इशारा करते हैं।

रुहुल्लाह मेहदी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि 'स्थायी शांति' केवल 'न्याय' के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है — प्रतीकात्मक उपायों से नहीं। उनके अनुसार बेहतर शासन व्यवस्था से तनाव कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन अनसुलझे मुद्दे जनता की असंतुष्टि को बढ़ावा देते रहते हैं।

एनसी नेतृत्व से दूरी

गौरतलब है कि रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व पर यह आरोप भी लगाया है कि पार्टी ने 2024 के चुनाव घोषणापत्र में जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए — उन्हीं वादों के आधार पर पार्टी सत्ता में आई थी। इस मतभेद के चलते सांसद और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, एनसी नेतृत्व उन्हें पार्टी की बैठकों में आमंत्रित नहीं कर रहा, और मेहदी भी पार्टी के आंतरिक मामलों से किनारा किए हुए हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब एनसी जम्मू-कश्मीर में सत्ता में है और केंद्र के साथ राज्य के दर्जे की बहाली पर बातचीत जारी है। आलोचकों का कहना है कि पार्टी के भीतर यह दरार उस व्यापक असंतोष को दर्शाती है जो 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में गहरी पैठ बना चुका है। प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिबद्धताओं के अभी तक पूरा न होने का मुद्दा आगामी दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि मेहदी जैसे नेता जनाधार को जवाब देने की ज़िम्मेदारी महसूस कर रहे हैं। 2024 के घोषणापत्र पर उठाए सवाल यह भी बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर की जनता चुनावी वादों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई को पहचान रही है। जब तक एनसी इस आंतरिक विरोधाभास को सार्वजनिक रूप से संबोधित नहीं करती, पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहेंगे।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुहुल्लाह मेहदी ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर क्या कहा?
उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने की पुष्टि की, लेकिन स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 370 की बहाली ही केंद्रीय माँग होनी चाहिए। उनके अनुसार एक दिन का आयोजन पर्याप्त नहीं है और एक सतत राजनीतिक अभियान ज़रूरी है।
रुहुल्लाह मेहदी और एनसी नेतृत्व के बीच विवाद क्यों है?
मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व पर आरोप लगाया है कि पार्टी ने 2024 के चुनाव घोषणापत्र के वादे पूरे नहीं किए। इस मतभेद के चलते एनसी नेतृत्व उन्हें पार्टी बैठकों में आमंत्रित नहीं कर रहा और सांसद भी पार्टी मामलों से दूरी बनाए हुए हैं।
रुहुल्लाह मेहदी की 'न्याय से शांति' की माँग का क्या अर्थ है?
उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति तभी संभव है जब भूमि अधिकार, नौकरियाँ, आरक्षण नीतियाँ और संवैधानिक सुरक्षाएँ बहाल हों। प्रतीकात्मक उपाय या आंशिक राहत से दीर्घकालिक समाधान नहीं निकलेगा।
अनुच्छेद 370 बहाली और राज्य के दर्जे की माँग में क्या फ़र्क है?
राज्य का दर्जा जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बनाने की माँग है, जबकि अनुच्छेद 370 की बहाली का अर्थ है 2019 से पहले की विशेष संवैधानिक स्थिति — जिसमें अलग संविधान, झंडा और स्वायत्तता शामिल थी — को वापस लाना। मेहदी का कहना है कि केवल राज्य के दर्जे से काम नहीं चलेगा।
जम्मू-कश्मीर में 2019 के बाद युवाओं को किन समस्याओं का सामना है?
रुहुल्लाह मेहदी के अनुसार भूमि अधिकारों में बदलाव, स्थानीय आरक्षण नीतियों में कटौती और कृषि पर प्रतिबंधों ने ग्रामीण युवाओं की आजीविका प्रभावित की है। उनका आरोप है कि स्थानीय लोगों को रोज़गार और संसाधनों में उचित हिस्सेदारी नहीं मिल रही।
राष्ट्र प्रेस
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