अनुच्छेद 370 बहाली ही असली मुद्दा: एनसी सांसद रुहुल्लाह मेहदी का जंतर-मंतर प्रदर्शन पर स्पष्ट रुख
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने मंगलवार, 9 जून को स्पष्ट किया कि वे जंतर-मंतर पर होने वाले पार्टी प्रदर्शन में भाग लेंगे, लेकिन उनका जोर इस बात पर रहा कि इस आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा संविधान के अनुच्छेद 370 की बहाली होना चाहिए — महज राज्य का दर्जा पाना नहीं। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि एक दिन का राजनीतिक आयोजन पर्याप्त नहीं है और एक सतत, संगठित अभियान की ज़रूरत है।
मुख्य माँगें और रुहुल्लाह का रुख
रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि माँग केवल राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें 2019 से पहले की संवैधानिक सुरक्षाओं की पूर्ण बहाली भी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी व्यापक चिंताओं को इस आंदोलन में प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रूप में चल रहा है।
युवाओं की समस्याएँ और न्याय की माँग
सांसद ने 2019 के बाद की अवधि में युवा पीढ़ी के सामने आने वाली कठिनाइयों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने भूमि अधिकारों, नौकरियों और आरक्षण नीतियों पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को उनके उचित हिस्से से वंचित किया जा रहा है। पुलवामा सहित ग्रामीण क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि और आजीविका को प्रभावित करने वाले प्रतिबंध कथित व्यवस्थागत अन्याय की ओर इशारा करते हैं।
रुहुल्लाह मेहदी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि 'स्थायी शांति' केवल 'न्याय' के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है — प्रतीकात्मक उपायों से नहीं। उनके अनुसार बेहतर शासन व्यवस्था से तनाव कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन अनसुलझे मुद्दे जनता की असंतुष्टि को बढ़ावा देते रहते हैं।
एनसी नेतृत्व से दूरी
गौरतलब है कि रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व पर यह आरोप भी लगाया है कि पार्टी ने 2024 के चुनाव घोषणापत्र में जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए — उन्हीं वादों के आधार पर पार्टी सत्ता में आई थी। इस मतभेद के चलते सांसद और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, एनसी नेतृत्व उन्हें पार्टी की बैठकों में आमंत्रित नहीं कर रहा, और मेहदी भी पार्टी के आंतरिक मामलों से किनारा किए हुए हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब एनसी जम्मू-कश्मीर में सत्ता में है और केंद्र के साथ राज्य के दर्जे की बहाली पर बातचीत जारी है। आलोचकों का कहना है कि पार्टी के भीतर यह दरार उस व्यापक असंतोष को दर्शाती है जो 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में गहरी पैठ बना चुका है। प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिबद्धताओं के अभी तक पूरा न होने का मुद्दा आगामी दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।