18 जुलाई 2026
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महबूबा मुफ्ती ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से किया किनारा, फारूक अब्दुल्ला को पत्र — अनुच्छेद 370 बहाली शर्त

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महबूबा मुफ्ती ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से किया किनारा, फारूक अब्दुल्ला को पत्र — अनुच्छेद 370 बहाली शर्त

सारांश

महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के जंतर-मंतर प्रदर्शन से किनारा कर साफ कर दिया — राज्य-दर्जा अकेली माँग उनके लिए काफी नहीं। अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई के बिना PDP का साथ नहीं मिलेगा। यह जम्मू-कश्मीर की विपक्षी एकता में गहरी दरार की ओर इशारा करता है।

मुख्य बातें

PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 18 जुलाई को नेशनल कॉन्फ्रेंस के जंतर-मंतर प्रदर्शन से दूरी बनाने की घोषणा की।
PDP की शर्त: प्रदर्शन के एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई शामिल हो।
महबूबा ने फारूक अब्दुल्ला को पत्र लिखकर कहा कि केवल राज्य-दर्जा की माँग 5 अगस्त, 2019 के केंद्र सरकार के कदमों को अप्रत्यक्ष वैधता देती है।
उन्होंने याद दिलाया कि 2024 विधानसभा चुनाव में PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ने अनुच्छेद 370 बहाली को घोषणापत्र में प्रमुख एजेंडा बनाया था।
महबूबा के अनुसार जनता का समर्थन इसी वादे पर आधारित था और उससे पीछे हटना जनादेश के साथ विश्वासघात होगा।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 18 जुलाई को स्पष्ट कर दिया कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर प्रस्तावित राज्य-दर्जा बहाली प्रदर्शन में तब तक शामिल नहीं होंगी, जब तक उसके एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई को केंद्रीय स्थान नहीं दिया जाता। उन्होंने इस संबंध में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को औपचारिक पत्र भी लिखा है।

महबूबा का रुख: केवल राज्य-दर्जा पर्याप्त नहीं

महबूबा मुफ्ती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, "गहन विचार-विमर्श के बाद PDP ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने का निर्णय लिया है, परंतु इसकी शर्त यह है कि अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई एजेंडे का मुख्य हिस्सा हो।" उनका कहना है कि महज राज्य-दर्जा बहाली तक सीमित प्रदर्शन में भाग लेना 5 अगस्त, 2019 के केंद्र सरकार के कदमों को अप्रत्यक्ष वैधता देने जैसा होगा।

उन्होंने कहा, "सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अनुच्छेद 370 की बहाली के हमारे व्यापक संवैधानिक संघर्ष के ताबूत में आखिरी कील ठोकने जैसा होगा।" उनके अनुसार यह कदम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 5 अगस्त, 2019 के निर्णयों को वैध ठहराने का संदेश देगा।

फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र के मुख्य बिंदु

महबूबा ने फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र में प्रदर्शन के निमंत्रण के लिए आभार जताते हुए स्पष्ट किया कि वरिष्ठ सहयोगियों से परामर्श के बाद PDP इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि केवल राज्य-दर्जा बहाली के उद्देश्य वाले प्रदर्शन में शामिल होना उचित नहीं होगा। पत्र में उन्होंने लिखा, "यह आधी-अधूरी माँग न केवल BJP द्वारा अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के कदम को सही ठहराती है, बल्कि 5 अगस्त, 2019 को किए गए गैर-कानूनी और असंवैधानिक कदम को भी पीछे छोड़ देने का खतरा पैदा करती है।"

उन्होंने जम्मू-कश्मीर की जनता की "सामूहिक स्मृति" का हवाला देते हुए कहा कि 2019 के बाद से लोगों ने जो अपमान और पीड़ा झेली है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

2024 चुनाव घोषणापत्र और जनसमर्थन का तर्क

महबूबा ने अपने पत्र में याद दिलाया कि PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ने 2024 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 की बहाली को प्रमुख एजेंडा बनाया था। उन्होंने कहा, "आपने राज्य के लोगों को भरोसा दिलाया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा और उसकी शेष संवैधानिक शक्तियाँ बहाल करने के लिए संघर्ष करेगी।" उनके अनुसार नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिला जनसमर्थन इसी वादे पर आधारित था।

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विपक्षी दलों के बीच अनुच्छेद 370 को लेकर रणनीतिक एकता की कमी उजागर हो रही है। गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया था — एक निर्णय जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने बाद में बरकरार रखा।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

महबूबा मुफ्ती की यह घोषणा जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच अनुच्छेद 370 को लेकर सैद्धांतिक सहमति के बावजूद, इस प्रदर्शन के स्वरूप पर मतभेद सामने आए हैं। अब देखना होगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने प्रस्तावित प्रदर्शन के एजेंडे में कोई संशोधन करती है या नहीं, और क्या PDP अंततः इसमें शामिल होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि PDP विपक्ष में रहकर अनुच्छेद 370 को केंद्र में रखना चाहती है। विडंबना यह है कि दोनों दलों ने 2024 के चुनाव में एक ही घोषणापत्र-भावना के साथ वोट माँगे थे। यदि यह दरार बनी रही, तो जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई एकजुट आवाज़ के बजाय खंडित राजनीतिक हितों में बिखरने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महबूबा मुफ्ती ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से दूरी क्यों बनाई?
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि केवल राज्य-दर्जा बहाली तक सीमित प्रदर्शन में शामिल होना 5 अगस्त, 2019 के केंद्र सरकार के निर्णयों को अप्रत्यक्ष वैधता देने जैसा होगा। PDP की शर्त है कि अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई एजेंडे का केंद्रीय हिस्सा हो।
PDP जंतर-मंतर प्रदर्शन में किन शर्तों पर शामिल होगी?
PDP तभी प्रदर्शन में शामिल होगी जब उसके एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई को प्रमुखता दी जाए। महबूबा ने एक्स पर पोस्ट और फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र दोनों में यह स्पष्ट किया है।
महबूबा मुफ्ती ने फारूक अब्दुल्ला को पत्र में क्या लिखा?
महबूबा ने पत्र में निमंत्रण के लिए आभार जताते हुए कहा कि केवल राज्य-दर्जे की माँग 5 अगस्त, 2019 के कदमों को सही ठहराती है और जम्मू-कश्मीर के लोगों की सामूहिक पीड़ा को नज़रअंदाज़ करती है। उन्होंने 2024 चुनाव घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 बहाली के वादे की भी याद दिलाई।
अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के राज्य-दर्जे का मुद्दा क्या है?
5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 निरस्त कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया था। तब से क्षेत्रीय दलों की माँग है कि राज्य-दर्जा बहाल हो और अनुच्छेद 370 को पुनः लागू किया जाए, हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र के निर्णय को बरकरार रखा है।
क्या PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच अनुच्छेद 370 पर मतभेद हैं?
दोनों दलों ने 2024 चुनाव घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 बहाली का वादा किया था, लेकिन प्रस्तावित प्रदर्शन के एजेंडे को लेकर मतभेद सामने आए हैं। महबूबा का आरोप है कि केवल राज्य-दर्जे तक सीमित रहना उस व्यापक संवैधानिक संघर्ष से पीछे हटना है जिसका वादा जनता से किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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