महबूबा मुफ्ती ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से किया किनारा, फारूक अब्दुल्ला को पत्र — अनुच्छेद 370 बहाली शर्त
सारांश
मुख्य बातें
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 18 जुलाई को स्पष्ट कर दिया कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर प्रस्तावित राज्य-दर्जा बहाली प्रदर्शन में तब तक शामिल नहीं होंगी, जब तक उसके एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई को केंद्रीय स्थान नहीं दिया जाता। उन्होंने इस संबंध में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को औपचारिक पत्र भी लिखा है।
महबूबा का रुख: केवल राज्य-दर्जा पर्याप्त नहीं
महबूबा मुफ्ती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, "गहन विचार-विमर्श के बाद PDP ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने का निर्णय लिया है, परंतु इसकी शर्त यह है कि अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई एजेंडे का मुख्य हिस्सा हो।" उनका कहना है कि महज राज्य-दर्जा बहाली तक सीमित प्रदर्शन में भाग लेना 5 अगस्त, 2019 के केंद्र सरकार के कदमों को अप्रत्यक्ष वैधता देने जैसा होगा।
उन्होंने कहा, "सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अनुच्छेद 370 की बहाली के हमारे व्यापक संवैधानिक संघर्ष के ताबूत में आखिरी कील ठोकने जैसा होगा।" उनके अनुसार यह कदम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 5 अगस्त, 2019 के निर्णयों को वैध ठहराने का संदेश देगा।
फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र के मुख्य बिंदु
महबूबा ने फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र में प्रदर्शन के निमंत्रण के लिए आभार जताते हुए स्पष्ट किया कि वरिष्ठ सहयोगियों से परामर्श के बाद PDP इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि केवल राज्य-दर्जा बहाली के उद्देश्य वाले प्रदर्शन में शामिल होना उचित नहीं होगा। पत्र में उन्होंने लिखा, "यह आधी-अधूरी माँग न केवल BJP द्वारा अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के कदम को सही ठहराती है, बल्कि 5 अगस्त, 2019 को किए गए गैर-कानूनी और असंवैधानिक कदम को भी पीछे छोड़ देने का खतरा पैदा करती है।"
उन्होंने जम्मू-कश्मीर की जनता की "सामूहिक स्मृति" का हवाला देते हुए कहा कि 2019 के बाद से लोगों ने जो अपमान और पीड़ा झेली है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
2024 चुनाव घोषणापत्र और जनसमर्थन का तर्क
महबूबा ने अपने पत्र में याद दिलाया कि PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ने 2024 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 की बहाली को प्रमुख एजेंडा बनाया था। उन्होंने कहा, "आपने राज्य के लोगों को भरोसा दिलाया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा और उसकी शेष संवैधानिक शक्तियाँ बहाल करने के लिए संघर्ष करेगी।" उनके अनुसार नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिला जनसमर्थन इसी वादे पर आधारित था।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विपक्षी दलों के बीच अनुच्छेद 370 को लेकर रणनीतिक एकता की कमी उजागर हो रही है। गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया था — एक निर्णय जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने बाद में बरकरार रखा।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
महबूबा मुफ्ती की यह घोषणा जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच अनुच्छेद 370 को लेकर सैद्धांतिक सहमति के बावजूद, इस प्रदर्शन के स्वरूप पर मतभेद सामने आए हैं। अब देखना होगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने प्रस्तावित प्रदर्शन के एजेंडे में कोई संशोधन करती है या नहीं, और क्या PDP अंततः इसमें शामिल होगी।