महबूबा मुफ्ती की अपील: J&K के सभी दल एकजुट हों, PM मोदी और अमित शाह से मिलें
सारांश
मुख्य बातें
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने 2 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से आह्वान किया कि वे दलगत मतभेद भुलाकर एकजुट हों और केंद्र सरकार के साथ सार्थक संवाद की पहल करें। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की शांति, सुरक्षा और गरिमा की बहाली के लिए भारत सरकार के साथ निरंतर बातचीत अपरिहार्य है।
किसे लिखा पत्र, क्या है माँग
महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता सुनील शर्मा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के तारिक कर्रा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने सभी दलों से मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से संयुक्त रूप से भेंट करने की अपील की है। उनका तर्क है कि व्यक्तिगत प्रयासों की तुलना में सामूहिक राजनीतिक दबाव कहीं अधिक प्रभावी होता है।
लद्दाख का उदाहरण, जम्मू-कश्मीर के लिए सबक
महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संगठनों ने केंद्र सरकार के साथ संवाद के ज़रिए हालिया सफलताएँ हासिल की हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि बातचीत से सार्थक समाधान निकल सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि लद्दाख के विभिन्न संगठन साझा हितों के लिए एकजुट हो सकते हैं, तो जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल भी ऐसा कर सकते हैं।
2019 के बाद की राजनीतिक खींचतान पर चिंता
मुफ्ती ने कहा कि 2019 के बाद से क्षेत्रीय दलों के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिस्पर्धा और आपसी टकराव ने जम्मू-कश्मीर के सामूहिक हितों को नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे सभी दलों की एक औपचारिक बैठक बुलाएँ, ताकि केंद्र के साथ संवाद के लिए साझा रणनीति तैयार की जा सके। उनके अनुसार यह समय राजनीतिक श्रेय लेने का नहीं, बल्कि जनहित में एकजुट होने का है।
इल्तिजा मुफ्ती का समर्थन
PDP नेता और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने भी इस पहल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश जम्मू-कश्मीर की राजनीति अक्सर आपसी मतभेदों से प्रभावित रही है, जबकि मौजूदा परिस्थितियों में एकजुट प्रयास अनिवार्य हैं। इल्तिजा के अनुसार केवल निरंतर और सार्थक बातचीत के माध्यम से ही जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों, सम्मान और संवैधानिक सुरक्षा को पुनर्स्थापित किया जा सकता है।
आगे की राह
महबूबा मुफ्ती की यह अपील ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिरोध और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और अन्य दल इस प्रस्ताव पर कितनी जल्दी और किस रूप में प्रतिक्रिया देते हैं — क्योंकि सर्वदलीय एकता की यह पहल जम्मू-कश्मीर के भविष्य की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।