7 जुलाई 2026
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उमर अब्दुल्ला ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले श्रीनगर में सिविल सोसायटी से की अहम बैठक

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उमर अब्दुल्ला ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले श्रीनगर में सिविल सोसायटी से की अहम बैठक

सारांश

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 20 जुलाई के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले श्रीनगर में सिविल सोसायटी को एकजुट किया। महबूबा मुफ्ती समर्थन में, लेकिन बागी सांसद रूहुल्लाह की माँग अनुच्छेद 370 बहाली की — और अपनी पार्टी ने पूरे प्रदर्शन को 'राजनीतिक हथकंडा' बताया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 7 जुलाई को SKICC, श्रीनगर में सिविल सोसायटी, बुद्धिजीवियों और धार्मिक नेताओं के साथ संवादात्मक बैठक की।
नेशनल कॉन्फ्रेंस 20 जुलाई को संसद सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर राज्य का दर्जा बहाली के लिए प्रदर्शन करेगी।
PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन में शामिल होने की पुष्टि की; NDA से बाहर की पार्टियों को भी न्योता दिया गया।
सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी प्रदर्शन में शामिल होंगे, लेकिन उनकी माँग अनुच्छेद 370 की बहाली की है।
अपनी पार्टी के अध्यक्ष सैयद अल्ताफ बुखारी ने इसे 'राजनीतिक हथकंडा' बताया और प्रदर्शन की दिल्ली में उपयोगिता पर सवाल उठाए।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार, 7 जुलाई को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में सिविल सोसायटी के प्रमुख सदस्यों के साथ एक संवादात्मक बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक सत्तारूढ़ जम्मू एंड कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित 'राज्य का दर्जा बहाल करो' विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई। इस बैठक में बुद्धिजीवियों, धार्मिक नेताओं और जन-प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया गया ताकि अभियान को व्यापक जनसमर्थन दिया जा सके।

बैठक का एजेंडा और मुख्य घटनाक्रम

बैठक में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उपस्थित लोगों को बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस संसद के आगामी सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे जम्मू-कश्मीर के सभी संबंधित पक्षों को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर इस अभियान में शामिल होने और अपने सुझाव देने के लिए आमंत्रित करेंगे।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एनडीए से बाहर की पार्टियों को भी जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने का न्योता दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन में शामिल होने की पुष्टि की है। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के बागी नेता और श्रीनगर-बडगाम सीट से लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि वे प्रदर्शन में तो शामिल होंगे, लेकिन उनकी मुख्य माँग जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली की होगी — जो कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के आधिकारिक एजेंडे से अलग है।

अपनी पार्टी की आलोचना

जम्मू एंड कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष सैयद अल्ताफ बुखारी ने इस विरोध प्रदर्शन को 'नेशनल कॉन्फ्रेंस का एक और राजनीतिक हथकंडा' करार दिया। बुखारी ने आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी 2024 के विधानसभा चुनावों में मिले भारी जनादेश के बावजूद लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में नाकाम रही है। जब उनसे यह पूछा गया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपनी पार्टी को भाजपा का 'स्थानीय चेहरा' बताया है, तो बुखारी ने स्पष्ट किया — 'अपनी पार्टी जम्मू-कश्मीर में भाजपा का विकल्प है, न कि भाजपा का स्थानीय चेहरा।'

दिल्ली बनाम श्रीनगर — रणनीति पर सवाल

बुखारी ने यह भी सवाल उठाया कि प्रदर्शन श्रीनगर में भी किया जा सकता था — नई दिल्ली में जाने की क्या ज़रूरत थी? उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा, 'क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद छोड़कर प्रदर्शनकारियों से बात करने जंतर-मंतर आएंगे?' यह टिप्पणी प्रदर्शन की व्यावहारिक उपयोगिता पर सीधा सवाल खड़ा करती है। गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना यहाँ की अधिकांश पार्टियों की साझा माँग रही है, लेकिन इस माँग को लेकर एकजुट रणनीति का अभाव बना हुआ है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के व्यक्तिगत पत्रों के ज़रिए व्यापक गठबंधन बनाने के प्रयास से यह स्पष्ट है कि 20 जुलाई का जंतर-मंतर प्रदर्शन केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस का नहीं, बल्कि एक बहुदलीय प्रदर्शन बनाने की कोशिश है। हालाँकि, अनुच्छेद 370 की बहाली जैसे विभाजनकारी मुद्दों पर दलों के बीच मतभेद इस एकता की सीमाएँ तय करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य के दर्जे की असली लड़ाई लड़ने वाली ताकत है। लेकिन विरोधाभास यह है कि जिस सरकार में वे मुख्यमंत्री हैं, उसी केंद्र सरकार के खिलाफ वे दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रहे हैं। अपनी पार्टी का यह सवाल — 'क्या अमित शाह जंतर-मंतर आएंगे?' — महज व्यंग्य नहीं, बल्कि इस प्रदर्शन की व्यावहारिक सीमाओं का सटीक खाका है। जब तक राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 की माँग अलग-अलग दिशाओं में खिंचती रहेगी, तब तक यह गठबंधन प्रतीकात्मक एकता से आगे नहीं बढ़ पाएगा।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर अब्दुल्ला ने सिविल सोसायटी से बैठक क्यों की?
यह बैठक 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित 'राज्य का दर्जा बहाल करो' प्रदर्शन की तैयारी के तहत हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुद्धिजीवियों, धार्मिक नेताओं और जन-प्रतिनिधियों से सुझाव माँगे और अभियान को व्यापक समर्थन दिलाने की कोशिश की।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का जंतर-मंतर प्रदर्शन कब और क्यों होगा?
नेशनल कॉन्फ्रेंस 20 जुलाई को संसद के आगामी सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग को लेकर प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने एनडीए से बाहर के दलों को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया है।
महबूबा मुफ्ती और रूहुल्लाह मेहदी का इस प्रदर्शन पर क्या रुख है?
PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन में शामिल होने की पुष्टि की है। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के बागी सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी भी प्रदर्शन में शामिल होंगे, लेकिन उनकी माँग राज्य के दर्जे के बजाय अनुच्छेद 370 की बहाली की है।
अपनी पार्टी ने इस प्रदर्शन की आलोचना क्यों की?
अपनी पार्टी के अध्यक्ष सैयद अल्ताफ बुखारी ने इसे 'नेशनल कॉन्फ्रेंस का राजनीतिक हथकंडा' बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी 2024 के विधानसभा चुनावों में मिले जनादेश के बावजूद लोगों की उम्मीदें पूरी करने में नाकाम रही, और यह भी सवाल उठाया कि प्रदर्शन दिल्ली में क्यों, श्रीनगर में क्यों नहीं।
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग कब से चल रही है?
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद से यह माँग लगातार उठती रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में संकेत दिए हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक कोई ठोस समयसीमा नहीं दी है।
राष्ट्र प्रेस
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