उमर अब्दुल्ला ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले श्रीनगर में सिविल सोसायटी से की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार, 7 जुलाई को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में सिविल सोसायटी के प्रमुख सदस्यों के साथ एक संवादात्मक बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक सत्तारूढ़ जम्मू एंड कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित 'राज्य का दर्जा बहाल करो' विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई। इस बैठक में बुद्धिजीवियों, धार्मिक नेताओं और जन-प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया गया ताकि अभियान को व्यापक जनसमर्थन दिया जा सके।
बैठक का एजेंडा और मुख्य घटनाक्रम
बैठक में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उपस्थित लोगों को बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस संसद के आगामी सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे जम्मू-कश्मीर के सभी संबंधित पक्षों को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर इस अभियान में शामिल होने और अपने सुझाव देने के लिए आमंत्रित करेंगे।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एनडीए से बाहर की पार्टियों को भी जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने का न्योता दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन में शामिल होने की पुष्टि की है। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के बागी नेता और श्रीनगर-बडगाम सीट से लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि वे प्रदर्शन में तो शामिल होंगे, लेकिन उनकी मुख्य माँग जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली की होगी — जो कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के आधिकारिक एजेंडे से अलग है।
अपनी पार्टी की आलोचना
जम्मू एंड कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष सैयद अल्ताफ बुखारी ने इस विरोध प्रदर्शन को 'नेशनल कॉन्फ्रेंस का एक और राजनीतिक हथकंडा' करार दिया। बुखारी ने आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी 2024 के विधानसभा चुनावों में मिले भारी जनादेश के बावजूद लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में नाकाम रही है। जब उनसे यह पूछा गया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपनी पार्टी को भाजपा का 'स्थानीय चेहरा' बताया है, तो बुखारी ने स्पष्ट किया — 'अपनी पार्टी जम्मू-कश्मीर में भाजपा का विकल्प है, न कि भाजपा का स्थानीय चेहरा।'
दिल्ली बनाम श्रीनगर — रणनीति पर सवाल
बुखारी ने यह भी सवाल उठाया कि प्रदर्शन श्रीनगर में भी किया जा सकता था — नई दिल्ली में जाने की क्या ज़रूरत थी? उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा, 'क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद छोड़कर प्रदर्शनकारियों से बात करने जंतर-मंतर आएंगे?' यह टिप्पणी प्रदर्शन की व्यावहारिक उपयोगिता पर सीधा सवाल खड़ा करती है। गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना यहाँ की अधिकांश पार्टियों की साझा माँग रही है, लेकिन इस माँग को लेकर एकजुट रणनीति का अभाव बना हुआ है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के व्यक्तिगत पत्रों के ज़रिए व्यापक गठबंधन बनाने के प्रयास से यह स्पष्ट है कि 20 जुलाई का जंतर-मंतर प्रदर्शन केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस का नहीं, बल्कि एक बहुदलीय प्रदर्शन बनाने की कोशिश है। हालाँकि, अनुच्छेद 370 की बहाली जैसे विभाजनकारी मुद्दों पर दलों के बीच मतभेद इस एकता की सीमाएँ तय करते हैं।