28 जुलाई 2026
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उमर अब्दुल्ला ने PM मोदी से मिलकर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की उठाई मांग

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उमर अब्दुल्ला ने PM मोदी से मिलकर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की उठाई मांग

सारांश

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 11 जून को PM मोदी से मिलकर राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग की — और साथ ही मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी भी पूरी है। PDP का समर्थन और पार्टी में रुहुल्लाह मेहदी की बगावत इस आंदोलन को और पेचीदा बनाती है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में PM नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग की।
CMO के अनुसार बैठक में अर्थव्यवस्था, संपर्क व्यवस्था, रोजगार और बुनियादी ढाँचे पर चर्चा हुई।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का निर्णय लिया है।
PDP के विधायक भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे।
NC सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने अनुच्छेद 370 की बहाली को प्रदर्शन का मुख्य फोकस बनाने की माँग की; पार्टी बैठकों से उन्हें दूर रखा जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर केंद्र शासित प्रदेश को शीघ्र राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग सीधे केंद्र के सामने रखी। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर की आर्थिक स्थिति, विकास कार्यों की रफ्तार और रोजगार सृजन जैसे अहम मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने क्या बताया

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री के साथ जम्मू-कश्मीर से जुड़े प्रमुख विषयों पर बातचीत की — जिनमें राज्य का दर्जा बहाल करना, अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और विकास परियोजनाओं की प्रगति शामिल रही। CMO के अनुसार, मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से बेहतर संपर्क व्यवस्था, रोजगार के अवसरों में विस्तार, बुनियादी ढाँचे की मजबूती और जनकल्याण योजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक के दौरान उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार 12 वर्ष तक प्रधानमंत्री पद पर कार्यकाल पूरा करने पर बधाई भी दी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि उमर अब्दुल्ला हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया गठबंधन की बैठक में भी शामिल हुए थे। उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) इंडिया गठबंधन के 35 घटक दलों में से एक है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य के दर्जे की माँग को लेकर संसद के बाहर भी दबाव की रणनीति अपना रही है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन की तैयारी

उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में 3 जून को डाचीगाम नेशनल पार्क में हुई नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की करीब सात घंटे लंबी बैठक में निर्णय लिया गया कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन पार्टी का विधायक दल नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगा। इस प्रदर्शन का उद्देश्य राज्य का दर्जा बहाल करने और अन्य संवैधानिक गारंटियों की माँग को लेकर केंद्र पर दबाव बनाना है।

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने भी घोषणा की है कि उसके विधायक इस प्रदर्शन में शामिल होंगे, जिससे इसे व्यापक राजनीतिक समर्थन मिलने की संभावना है।

पार्टी में आंतरिक मतभेद

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा जताई है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का मुख्य फोकस जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि रुहुल्लाह मेहदी ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व पर 2024 के चुनावी घोषणापत्र के वादों को पूरा करने में पर्याप्त प्रयास न करने का आरोप लगाया था। इसके बाद से उन्हें पार्टी की बैठकों में नहीं बुलाया जा रहा है — 3 जून की डाचीगाम बैठक में भी वे अनुपस्थित रहे।

आगे क्या होगा

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही जंतर-मंतर प्रदर्शन की योजना को अंतिम रूप दिया जाना है। यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार राज्य के दर्जे की माँग पर कोई ठोस समयसीमा देती है या नहीं — जो जम्मू-कश्मीर की राजनीति का सबसे संवेदनशील प्रश्न बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सीमाएँ स्पष्ट हैं — केंद्र ने राज्य के दर्जे पर अब तक कोई ठोस समयसीमा नहीं दी है। जंतर-मंतर प्रदर्शन की घोषणा यह संकेत देती है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अब केवल वार्ता पर निर्भर नहीं रहना चाहती, लेकिन पार्टी के भीतर रुहुल्लाह मेहदी की बगावत यह दर्शाती है कि नेतृत्व पर चुनावी वादों को लेकर आंतरिक दबाव भी है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बने लगभग सात वर्ष हो चुके हैं और राज्य का दर्जा अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर अब्दुल्ला ने PM मोदी से मुलाकात में क्या माँगें रखीं?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 11 जून 2026 को PM मोदी से जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा शीघ्र बहाल करने की माँग की। इसके अलावा आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, बेहतर संपर्क व्यवस्था और जनकल्याण योजनाओं को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
नेशनल कॉन्फ्रेंस जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों करेगी?
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का फैसला किया है ताकि राज्य के दर्जे की बहाली और अन्य संवैधानिक गारंटियों की माँग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके। यह निर्णय 3 जून को डाचीगाम नेशनल पार्क में हुई सात घंटे लंबी बैठक में लिया गया।
PDP इस प्रदर्शन में क्यों शामिल हो रही है?
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP ने घोषणा की है कि उसके विधायक नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाले जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होंगे। दोनों दलों की साझा माँग जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करना है।
रुहुल्लाह मेहदी का नेशनल कॉन्फ्रेंस से विवाद क्या है?
NC सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व पर 2024 के चुनावी घोषणापत्र के वादे पूरे न करने का आरोप लगाया था। इसके बाद से उन्हें पार्टी बैठकों में नहीं बुलाया जा रहा है और 3 जून की अहम डाचीगाम बैठक में भी वे अनुपस्थित रहे।
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा कब मिल सकता है?
केंद्र सरकार ने अब तक राज्य के दर्जे की बहाली के लिए कोई ठोस समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था और तब से यह माँग राजनीतिक एजेंडे पर बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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