जम्मू-कश्मीर राज्य दर्जे की मांग: 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर एनसी का बड़ा प्रदर्शन, फारूक-उमर दिल्ली पहुंचे
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला 19 जुलाई को नई दिल्ली पहुंचे, ताकि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन की तैयारियों का जायजा लिया जा सके। इस प्रदर्शन का मकसद केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए दबाव बनाना है। एनसी के विधायक, वरिष्ठ नेता और पार्टी कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुके हैं।
प्रदर्शन की तैयारी और अनुमति का सवाल
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि विरोध-प्रदर्शन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित होगा। हालांकि, शनिवार शाम तक दिल्ली प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक अनुमति प्राप्त नहीं हुई थी, जिससे यह अनिश्चितता बनी हुई है कि जंतर-मंतर पर एकत्र होने की इजाजत मिलेगी या नहीं।
यह ऐसे समय में आया है जब हाल ही में दिल्ली में सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी, जिसमें वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया और कई प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल से हटाया गया था। उस घटनाक्रम के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि एनसी को भी अनुमति प्रक्रिया में अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।
एनसी की मांग: लोकतांत्रिक स्वायत्तता का सवाल
जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन के बाद से ही एनसी लगातार राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाती रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने, प्रशासनिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा अनिवार्य है। पार्टी इस प्रदर्शन को एक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक पहल के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जिसका उद्देश्य केंद्र को उसके अपने वादे की याद दिलाना है।
केंद्र सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने अब तक कई बार यह आश्वासन दिया है कि जम्मू-कश्मीर को उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन इसके लिए कोई ठोस समयसीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था — एक मुद्दा जो आज भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
पीडीपी की सशर्त भागीदारी
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि उनकी पार्टी इस प्रदर्शन में शामिल होने को तैयार है, बशर्ते एजेंडे का दायरा बढ़ाया जाए और उसमें अनुच्छेद 370 की बहाली तथा जम्मू-कश्मीर से जुड़े अन्य संवैधानिक मुद्दों को भी स्थान दिया जाए। यह मांग एनसी और पीडीपी के बीच रणनीतिक मतभेद को उजागर करती है — दोनों दल राज्य का दर्जा चाहते हैं, लेकिन व्यापक संवैधानिक प्रश्नों पर उनके रुख अलग-अलग हैं।
आगे क्या होगा
20 जुलाई का प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है। यदि दिल्ली प्रशासन अनुमति देने से इनकार करता है, तो यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तापमान पैदा कर सकता है। एनसी के लिए यह परीक्षण की घड़ी है कि वह केंद्र के साथ संवाद और जनदबाव के बीच संतुलन कैसे बनाती है।