19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जम्मू-कश्मीर राज्य दर्जे की मांग: 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर एनसी का बड़ा प्रदर्शन, फारूक-उमर दिल्ली पहुंचे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जम्मू-कश्मीर राज्य दर्जे की मांग: 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर एनसी का बड़ा प्रदर्शन, फारूक-उमर दिल्ली पहुंचे

सारांश

जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने राज्य दर्जे की मांग को लेकर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुंकार भरने का फैसला किया है। फारूक और उमर अब्दुल्ला दिल्ली पहुंच चुके हैं, लेकिन अनुमति अभी अधर में है — और सोनम वांगचुक प्रकरण की छाया इस प्रदर्शन पर मंडरा रही है।

मुख्य बातें

नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की है।
एनसी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तैयारियों की निगरानी के लिए नई दिल्ली पहुंचे।
शनिवार शाम तक दिल्ली प्रशासन की ओर से जंतर-मंतर पर एकत्र होने की कोई आधिकारिक अनुमति प्राप्त नहीं हुई।
सोनम वांगचुक के प्रदर्शन पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद एनसी के लिए अनुमति मिलने पर अनिश्चितता बनी हुई है।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन में शामिल होने की सशर्त तैयारी जताई — शर्त है अनुच्छेद 370 बहाली को एजेंडे में शामिल करना।
केंद्र सरकार ने राज्य दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया है, लेकिन कोई ठोस समयसीमा घोषित नहीं की।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला 19 जुलाई को नई दिल्ली पहुंचे, ताकि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन की तैयारियों का जायजा लिया जा सके। इस प्रदर्शन का मकसद केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए दबाव बनाना है। एनसी के विधायक, वरिष्ठ नेता और पार्टी कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुके हैं।

प्रदर्शन की तैयारी और अनुमति का सवाल

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि विरोध-प्रदर्शन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित होगा। हालांकि, शनिवार शाम तक दिल्ली प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक अनुमति प्राप्त नहीं हुई थी, जिससे यह अनिश्चितता बनी हुई है कि जंतर-मंतर पर एकत्र होने की इजाजत मिलेगी या नहीं।

यह ऐसे समय में आया है जब हाल ही में दिल्ली में सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी, जिसमें वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया और कई प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल से हटाया गया था। उस घटनाक्रम के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि एनसी को भी अनुमति प्रक्रिया में अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।

एनसी की मांग: लोकतांत्रिक स्वायत्तता का सवाल

जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन के बाद से ही एनसी लगातार राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाती रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने, प्रशासनिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा अनिवार्य है। पार्टी इस प्रदर्शन को एक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक पहल के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जिसका उद्देश्य केंद्र को उसके अपने वादे की याद दिलाना है।

केंद्र सरकार का रुख

केंद्र सरकार ने अब तक कई बार यह आश्वासन दिया है कि जम्मू-कश्मीर को उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन इसके लिए कोई ठोस समयसीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था — एक मुद्दा जो आज भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।

पीडीपी की सशर्त भागीदारी

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि उनकी पार्टी इस प्रदर्शन में शामिल होने को तैयार है, बशर्ते एजेंडे का दायरा बढ़ाया जाए और उसमें अनुच्छेद 370 की बहाली तथा जम्मू-कश्मीर से जुड़े अन्य संवैधानिक मुद्दों को भी स्थान दिया जाए। यह मांग एनसी और पीडीपी के बीच रणनीतिक मतभेद को उजागर करती है — दोनों दल राज्य का दर्जा चाहते हैं, लेकिन व्यापक संवैधानिक प्रश्नों पर उनके रुख अलग-अलग हैं।

आगे क्या होगा

20 जुलाई का प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है। यदि दिल्ली प्रशासन अनुमति देने से इनकार करता है, तो यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तापमान पैदा कर सकता है। एनसी के लिए यह परीक्षण की घड़ी है कि वह केंद्र के साथ संवाद और जनदबाव के बीच संतुलन कैसे बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन्हें एनसी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती। दिल्ली प्रशासन की अनुमति पर अनिश्चितता, सोनम वांगचुक प्रकरण के बाद, यह सवाल भी खड़ा करती है कि राजधानी में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार किसके लिए और किन शर्तों पर उपलब्ध है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल कॉन्फ्रेंस 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर क्यों प्रदर्शन कर रही है?
एनसी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए यह प्रदर्शन आयोजित कर रही है। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, और पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक स्वायत्तता के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा अनिवार्य है।
क्या एनसी को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मिली है?
शनिवार शाम तक दिल्ली प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक अनुमति नहीं मिली थी। सोनम वांगचुक के प्रदर्शन पर हुई हालिया प्रशासनिक कार्रवाई के मद्देनज़र अनुमति मिलने पर अनिश्चितता बनी हुई है, हालांकि एनसी ने कहा है कि प्रदर्शन योजना के अनुसार ही होगा।
पीडीपी और महबूबा मुफ्ती का इस प्रदर्शन पर क्या रुख है?
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि उनकी पार्टी प्रदर्शन में शामिल होने को तैयार है, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर से जुड़े अन्य संवैधानिक मुद्दों को भी शामिल किया जाए। यह मांग एनसी के मौजूदा एजेंडे से आगे जाती है।
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को राज्य दर्जे पर क्या कहा है?
केंद्र सरकार ने बार-बार यह आश्वासन दिया है कि जम्मू-कश्मीर को उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कोई ठोस समयसीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
सोनम वांगचुक प्रकरण का इस प्रदर्शन से क्या संबंध है?
हाल ही में दिल्ली में सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी, जिसमें वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया और प्रदर्शनकारियों को हटाया गया था। इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में यह आशंका जताई जा रही है कि एनसी को भी अनुमति प्रक्रिया में अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले