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महबूबा मुफ्ती का आह्वान: व्यापार, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से सुधरेंगे भारत-पाकिस्तान संबंध

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महबूबा मुफ्ती का आह्वान: व्यापार, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से सुधरेंगे भारत-पाकिस्तान संबंध

सारांश

महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में दो-टूक कहा — जम्मू-कश्मीर जंग का अखाड़ा नहीं, अमन का पुल बने। 117 हस्तियों के संयुक्त पत्र का समर्थन करते हुए उन्होंने सार्क को पुनर्जीवित करने और ऐतिहासिक व्यापार मार्ग खोलने की माँग की।

मुख्य बातें

PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 1 जुलाई 2026 को श्रीनगर में भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की वकालत की।
'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' की पहल के तहत दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने PM मोदी और शहबाज शरीफ को संयुक्त खुला पत्र लिखा।
महबूबा मुफ्ती ने सार्क (SAARC) को पुनर्सक्रिय करने और जम्मू-कश्मीर को सार्क सहयोग का मॉडल बनाने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर की समस्याएँ हल नहीं हुईं और क्षेत्र 'ओपन प्रिजन' जैसा महसूस होता है।
उन्होंने खोतान, यारकंद और काशगर जैसे ऐतिहासिक मार्गों को लद्दाख के रास्ते खोलने की माँग की, ताकि भारत मध्य एशिया का प्रवेश द्वार बन सके।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने 1 जुलाई 2026 को श्रीनगर में भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की पुरज़ोर वकालत की। उन्होंने 'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' द्वारा आयोजित उस संयुक्त पहल का समर्थन किया, जिसमें दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र लिखा है।

संवाद की अपील और PDP का रुख

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि PDP शुरू से यह मानती रही है कि संवाद ही एकमात्र ऐसा रास्ता है जो दोनों देशों के बीच की खाई को पाट सकता है। उनके अनुसार, मौजूदा हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसका असर सिर्फ जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश पर पड़ रहा है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस शांति पहल और संयुक्त पत्र की जानकारी लें।

जम्मू-कश्मीर को 'अमन के पुल' के रूप में देखने की दृष्टि

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति का सेतु बनना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही, व्यापारिक रास्तों को खोलने और सामान्य द्विपक्षीय संबंधों की बहाली की माँग की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध कथन का हवाला दिया — 'दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं।'

सार्क को पुनर्जीवित करने और क्षेत्रीय संपर्क का प्रस्ताव

उन्होंने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क/SAARC) को फिर से सक्रिय करने का सुझाव दिया और कहा कि भारत को इसकी अगुवाई करनी चाहिए। महबूबा मुफ्ती के अनुसार, जम्मू-कश्मीर को सार्क सहयोग का मॉडल बनाया जाना चाहिए, जहाँ सदस्य देश निवेश करें। उन्होंने उत्तराखंड में लिपुलेख मार्ग खोले जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि चीन की दिशा में संपर्क बढ़ाया जा सकता है, तो खोतान, यारकंद और काशगर जैसे ऐतिहासिक मार्ग लद्दाख के रास्ते क्यों नहीं खोले जा सकते।

आर्टिकल 370 और अलगाव की भावना पर आरोप

महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उनका दावा है कि आज भी क्षेत्र के लोग अलगाव की भावना से जूझ रहे हैं और पूरा क्षेत्र एक 'ओपन प्रिजन' जैसा महसूस करता है। उन्होंने यह भी कहा कि 2019 के बाद लद्दाख में चीन के साथ तनाव भी बढ़ा है, और इसलिए भारत को पाकिस्तान तथा चीन, दोनों के साथ बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

आगे का रास्ता

महबूबा मुफ्ती के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति भारत को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया का प्रवेश द्वार बना सकती है। सियालकोट, करगिल, स्कर्दू और मध्य एशिया की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों को खोलने से जम्मू-कश्मीर ही नहीं, पूरे देश को आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता की असली विरासत ताकत से नहीं, बल्कि बड़े विवादों के समाधान से तय होती है — और आज दोनों देशों के नेताओं के पास यह सुनहरा अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद के तनावपूर्ण माहौल में इसका समय और संदर्भ महत्वपूर्ण है। 117 हस्तियों का संयुक्त पत्र नागरिक समाज की उस बेचैनी को दर्शाता है जो सरकारी चैनलों से बाहर है। हालाँकि, सार्क को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव व्यावहारिक रूप से कठिन है — संगठन 2016 से निष्क्रिय है और पाकिस्तान की भूमिका पर मतभेद बने हुए हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह बयानबाज़ी ज़मीनी राजनीतिक इच्छाशक्ति में तब्दील हो सकती है, या यह चुनावी दृष्टि से उपयोगी प्रतीकात्मकता तक ही सीमित रहेगी।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महबूबा मुफ्ती ने भारत-पाकिस्तान संबंधों पर क्या कहा?
महबूबा मुफ्ती ने 1 जुलाई 2026 को श्रीनगर में कहा कि बातचीत, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ही दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने का सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने 'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' द्वारा PM मोदी और पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ को लिखे संयुक्त खुले पत्र का समर्थन किया।
'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' का संयुक्त पत्र क्या है?
यह भारत और पाकिस्तान की 117 प्रमुख हस्तियों द्वारा दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को लिखा गया एक संयुक्त खुला पत्र है, जिसमें शांति, बातचीत और सामान्य द्विपक्षीय संबंध बहाल करने की अपील की गई है। यह पहल 'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' संस्था की ओर से की गई है।
महबूबा मुफ्ती ने सार्क के बारे में क्या प्रस्ताव दिया?
उन्होंने सार्क (SAARC) को पुनर्सक्रिय करने और भारत को इसकी अगुवाई करने का सुझाव दिया। उनका प्रस्ताव है कि जम्मू-कश्मीर को सार्क सहयोग का मॉडल बनाया जाए, जहाँ सदस्य देश निवेश करें और क्षेत्र के विकास में भागीदारी निभाएँ।
महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 हटाने पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उनका दावा है कि आज भी क्षेत्र के लोग अलगाव की भावना से जूझ रहे हैं और पूरा क्षेत्र 'ओपन प्रिजन' जैसा महसूस होता है।
जम्मू-कश्मीर को मध्य एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में कैसे विकसित किया जा सकता है?
महबूबा मुफ्ती के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान, सियालकोट, करगिल, स्कर्दू और मध्य एशिया को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग हैं। यदि खोतान, यारकंद और काशगर जैसे ऐतिहासिक मार्गों को लद्दाख के रास्ते खोला जाए, तो जम्मू-कश्मीर दक्षिण एशिया और मध्य एशिया को जोड़ने वाला प्रमुख केंद्र बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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