इल्तिजा मुफ्ती का केंद्र पर हमला: 'डर से नहीं, भरोसे से जीता जाता है कश्मीर'
सारांश
मुख्य बातें
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) नेता इल्तिजा मुफ्ती ने 13 जुलाई 2026 को जम्मू-कश्मीर प्रशासन की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन 'डर का माहौल' बना रहा है और कश्मीर की ऐतिहासिक पहचान को मिटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दबाव और भय की राजनीति से लोगों का भरोसा नहीं जीता जा सकता।
एक्स पर पोस्ट से शुरू हुई बहस
इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में उन्होंने इतना 'डरा-सहमा प्रशासन' पहले कभी नहीं देखा। उनके अनुसार, इतिहास को बदलने या मिटाने की कोशिशें न केवल गलत हैं, बल्कि इससे आम जनता और प्रशासन के बीच की खाई और गहरी होती है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 13 जुलाई को कश्मीर में 1931 के शहीद दिवस की स्मृति में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं — एक ऐसा अवसर जो दशकों से कश्मीरी राजनीतिक चेतना का प्रतीक रहा है।
1931 के शहीदों का संदर्भ
मुफ्ती ने 1931 के 22 शहीदों का उल्लेख करते हुए कहा कि कश्मीरी समाज उन्हें अपने आदर्श और नायकों के रूप में देखता है। उनके अनुसार, इन शहीदों ने कश्मीर में राजनीतिक जागरूकता और सम्मान की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि कश्मीरी समाज अपने इतिहास और राजनीतिक चेतना को पीढ़ियों से संजोकर रखता आया है।
वैचारिक मतभेद और केंद्र पर निशाना
इल्तिजा मुफ्ती ने वैचारिक मतभेदों का भी जिक्र किया। उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर और नाथूराम गोडसे का संदर्भ देते हुए कहा कि अलग-अलग समुदाय और क्षेत्र अपने-अपने ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को भिन्न नजरिए से देखते हैं। उनका तर्क था कि जब देश के एक हिस्से में कुछ विचारधाराओं को स्वीकार्यता मिलती है, तो कश्मीर के अपने ऐतिहासिक नायकों को नकारना एकतरफा और अन्यायपूर्ण है।
नजरबंदी और निगरानी पर सवाल
PDP नेता ने आरोप लगाया कि लोगों को घरों में नजरबंद करना, निगरानी रखना और सार्वजनिक गतिविधियों से रोकना — ये कदम 'सामान्य स्थिति बहाल होने' के सरकारी दावों को खोखला साबित करते हैं। उन्होंने 'दिल की दूरी' और 'दिल्ली की दूरी' का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की नीतियाँ जनता से जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रही हैं।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से प्रशासनिक नीतियों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ लगातार बनी हुई हैं। इल्तिजा मुफ्ती की यह टिप्पणी उसी व्यापक बहस का हिस्सा है।
आगे की राह
इल्तिजा मुफ्ती के इस बयान पर प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विश्लेषकों का मानना है कि 13 जुलाई के संवेदनशील अवसर पर इस तरह के बयान जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकते हैं। PDP समेत अन्य विपक्षी दलों की माँग है कि प्रशासन संवाद और विश्वास-निर्माण की नीति अपनाए।