भारत संभालता है दुनिया के 49% डिजिटल पेमेंट, BFSI साइबर सुरक्षा पर 'डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26' जारी
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार और साइबर सुरक्षा संस्था सीसा (SISA) ने मिलकर 13 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में 'डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26: फ्रॉम फ्रंटलाइन इंटेलिजेंस टू कलेक्टिव फोरसाइट' जारी की, जो बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) क्षेत्र की साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए तैयार की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत आज वैश्विक साइबर सुरक्षा में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है — न केवल अपने डिजिटल तंत्र की रक्षा के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल के रूप में।
भारत का डिजिटल भुगतान में वैश्विक दबदबा
सीसा के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दर्शन शांतमूर्ति ने कहा कि यह रिपोर्ट केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि समूची दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि आज भारत दुनिया के लगभग 49 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन संभालता है — जो देश के मजबूत और भरोसेमंद डिजिटल भुगतान तंत्र का प्रमाण है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर साइबर हमलों की आवृत्ति और परिष्कार दोनों तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
शांतमूर्ति ने कहा, 'इस पहल का उद्देश्य केवल साइबर हमलों के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि पहले से जागरूकता बढ़ाकर संस्थानों को सुरक्षित बनाना है। भारत, जो दुनिया में सबसे अधिक डिजिटल भुगतान करता है, उसकी जिम्मेदारी केवल अपने सिस्टम की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक साइबर सुरक्षा में योगदान देना भी है।'
रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ और पिछले संस्करण की सफलता
यह सरकार-निजी क्षेत्र साझेदारी के तहत जारी दूसरी डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट है। शांतमूर्ति ने बताया कि पहली रिपोर्ट को विश्व भर में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी — उसे 20,000 से अधिक बार डाउनलोड किया गया और विभिन्न उद्योगों के साथ लगभग 350 ब्रीफिंग सत्र आयोजित किए गए। नई रिपोर्ट विशेष रूप से पिछले 6 महीनों में तेज़ी से उभरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित साइबर खतरों का विस्तृत विश्लेषण करती है और संस्थानों को व्यावहारिक व लागू किए जा सकने वाले सुझाव देती है।
CERT-In की चेतावनी: छह क्षेत्रों में खतरा बढ़ा
भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने बताया कि पहली रिपोर्ट में जिन सात क्षेत्रों में साइबर खतरे बढ़ने की आशंका जताई गई थी, उनमें से छह में खतरे स्पष्ट रूप से बढ़ चुके हैं। केवल क्वांटम टेक्नोलॉजी से जुड़ा जोखिम अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है, लेकिन अगले एक-दो वर्षों में उसके भी उभरने की संभावना जताई गई है।
डॉ. बहल ने कहा, 'सरकार लगातार डिजिटल फ्रॉड और साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए काम कर रही है, लेकिन नागरिकों और संस्थानों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना होगा। बदलती तकनीक के साथ सुरक्षा उपायों को भी लगातार मजबूत करना जरूरी है।'
AI और रोज़गार: डर नहीं, री-स्किलिंग ज़रूरी
AI के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले संभावित असर के सवाल पर डॉ. बहल ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य देते हुए कहा कि जब सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का आगमन हुआ था, तब भी रोज़गार जाने की आशंकाएँ उठी थीं — लेकिन परिणाम विपरीत रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI के दौर में री-स्किलिंग और नई तकनीकों के अनुसार खुद को तैयार करना सबसे अनिवार्य कदम है। जो लोग समय के साथ नए कौशल अपनाएँगे, उनके लिए रोज़गार और अवसर दोनों बढ़ेंगे।
भारत की अग्रणी पहल: AI बिल ऑफ मटेरियल्स सहित व्यापक दिशा-निर्देश
गौरतलब है कि CERT-In ने साइबर सुरक्षा को भविष्य-सक्षम बनाने के लिए सॉफ्टवेयर बिल ऑफ मटेरियल्स, हार्डवेयर बिल ऑफ मटेरियल्स, क्रिप्टो बिल ऑफ मटेरियल्स, क्वांटम बिल ऑफ मटेरियल्स और AI बिल ऑफ मटेरियल्स सहित व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। डॉ. बहल ने बताया कि अब तक वैश्विक स्तर पर केवल सॉफ्टवेयर बिल ऑफ मटेरियल्स पर ही काम हुआ था — भारत पहला देश है जिसने AI सहित कई उभरती तकनीकों के लिए इतने व्यापक दिशा-निर्देश एक साथ तैयार किए हैं। यह कदम भविष्य में साइबर सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।