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भीलवाड़ा: महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूता की मौत, जीनगर समाज ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन

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भीलवाड़ा: महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूता की मौत, जीनगर समाज ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन

सारांश

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसूता संगीता जीनगर को घंटों तक भर्ती न करने और दो ऑपरेशन के बाद भी उचित उपचार न मिलने से हुई मौत ने जीनगर समाज को सड़क पर उतार दिया। समाज ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर न्याय, मुआवजा और सरकारी नौकरी की माँग रखी है।

मुख्य बातें

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई में प्रसूता संगीता जीनगर की मौत हुई।
परिजनों के अनुसार, अस्पताल पहुँचने पर कई घंटों तक भर्ती नहीं किया गया; जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप पर दाखिला मिला।
दो ऑपरेशन के बावजूद संगीता को होश नहीं आया और रेफर प्रक्रिया में भी घंटों की देरी का आरोप है।
जीनगर समाज ने 13 जुलाई को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
माँगों में निष्पक्ष जाँच, दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई, आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी शामिल हैं।
समय पर कार्रवाई न होने पर प्रदेश स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई में संगीता जीनगर नामक प्रसूता की मौत के बाद जीनगर समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है। 13 जुलाई को समाज के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

पोटला निवासी संगीता जीनगर को गर्भावस्था के दौरान परिजन महात्मा गांधी चिकित्सालय लेकर पहुँचे, किंतु समाज के प्रतिनिधि गौरव जीनगर के अनुसार, कई घंटों तक उन्हें भर्ती नहीं किया गया। बाद में एक जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद ही प्रसूता को अस्पताल में दाखिल किया जा सका।

भर्ती के उपरांत चिकित्सकों ने परिवार पर ऑपरेशन के लिए दबाव बनाया। परिजनों की सहमति मिलने पर ऑपरेशन किया गया, लेकिन इसके बाद संगीता की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई।

परिवार की पीड़ा

मृतका की ननद शानू जीनगर ने बताया कि अस्पताल में समय पर उपचार नहीं मिला। पहले ऑपरेशन के बाद बच्चेदानी का दूसरा ऑपरेशन भी किया गया, परंतु संगीता को होश नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि रेफर करने की माँग के बावजूद कई घंटों तक रेफर प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

शानू जीनगर ने कहा, 'हमारी माँग है कि परिवार को उचित मुआवजा, न्याय और सरकारी नौकरी दी जाए, जिससे मृतका के बच्चों का लालन-पोषण और परिवार की देखभाल हो सके।'

समाज की माँगें

जीनगर समाज ने चिकित्सा मंत्री और प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख माँगें रखी हैं — मामले की निष्पक्ष जाँच, जिम्मेदार चिकित्सकों व अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई, पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा, तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।

आंदोलन की चेतावनी

समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो जीनगर समाज प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन करेगा। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में प्रसूति देखभाल की गुणवत्ता पहले से ही सवालों के घेरे में है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाइयों में समय पर भर्ती और रेफर प्रक्रिया में देरी मातृ मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की उस पुरानी खामी का प्रतिबिंब है जहाँ प्रसूति आपात स्थितियों में भर्ती और रेफर प्रक्रिया में घंटों की देरी जानलेवा साबित होती है। जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बिना भर्ती न होना यह दर्शाता है कि व्यवस्था सामान्य नागरिक के लिए नहीं, बल्कि पहुँच वाले के लिए काम करती है। मुआवजे और नौकरी की माँग जायज है, लेकिन असली जवाबदेही तब होगी जब चिकित्सकों और प्रशासन के विरुद्ध पारदर्शी जाँच हो और उसके परिणाम सार्वजनिक किए जाएँ।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में संगीता जीनगर की मौत कैसे हुई?
पोटला निवासी संगीता जीनगर को गर्भावस्था के दौरान महात्मा गांधी अस्पताल लाया गया, लेकिन कथित तौर पर कई घंटों तक भर्ती नहीं किया गया। जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद भर्ती हुई और दो ऑपरेशन के बावजूद उनकी मृत्यु हो गई।
जीनगर समाज ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन क्यों किया?
13 जुलाई को जीनगर समाज ने भीलवाड़ा कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही से संगीता जीनगर की जान गई और दोषियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जीनगर समाज की प्रमुख माँगें क्या हैं?
समाज ने मामले की निष्पक्ष जाँच, जिम्मेदार चिकित्सकों व अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई, पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग की है।
क्या इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है?
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामले की जाँच की माँग प्रशासन के समक्ष ज्ञापन के माध्यम से रखी गई है।
यदि माँगें नहीं मानी गईं तो जीनगर समाज क्या करेगा?
जीनगर समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि समय पर कार्रवाई न होने पर वे प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन करेंगे। यह मामला राजस्थान में सरकारी अस्पतालों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है।
राष्ट्र प्रेस
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