झारखंड: जामताड़ा सदर अस्पताल में इलाज की कमी से बच्चे की दुखद मौत पर प्रदर्शन
सारांश
Key Takeaways
- बच्चे की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाए।
- स्थानीय नागरिकों ने प्रदर्शन किया और मंत्री का पुतला फूंका।
- स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी पर उठे सवाल।
- अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं की कमी।
- आंदोलन तेज करने की चेतावनी।
जामताड़ा, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के जामताड़ा सदर अस्पताल में उचित इलाज की कमी के कारण एक तीन वर्षीय मासूम की मौत ने जिले में सियासी और सामाजिक हलचल को बढ़ा दिया है। इस घटना से आक्रोशित नागरिकों ने शुक्रवार को न केवल प्रदर्शन किया, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक डॉ. इरफान अंसारी का पुतला भी फूंका।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने में असफल मंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
जामताड़ा बाजार निवासी संटू साव के तीन वर्षीय बेटे अंकुश साव को अचानक पेट दर्द और उल्टी की समस्या हुई। परिजन उसे तुरंत सदर अस्पताल ले गए। परिजनों का आरोप है कि गुरुवार को वहाँ कोई शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) नहीं था। अफरा-तफरी के बीच बच्चे को ऑक्सीजन दिया गया, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर के बिना स्थिति बिगड़ती गई। अंततः अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को बाहर रेफर कर दिया। बदहवास परिजन बच्चे को लेकर पश्चिम बंगाल के आसनसोल जा रहे थे, पर रास्ते में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।
इस घटना के खिलाफ शुक्रवार को बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक समाहरणालय पहुंचे और उपायुक्त रवि आनंद को एक मांग पत्र सौंपा। प्रदर्शनकारियों के नेता जीतू सिंह और आकाश साव ने कहा कि जामताड़ा सदर अस्पताल केवल एक 'रेफरल सेंटर' बनकर रह गया है। यहाँ न तो बच्चों के डॉक्टर हैं और न ही आईसीयू या वेंटिलेटर जैसी बुनियादी सुविधाएं।
लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी हाईटेक स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करते हैं, वहीं उनके अपने गृह जिले में बच्चे इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। मांग पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि यदि सदर अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।