भीलवाड़ा में 5 दिन में 6 प्रसूताओं की मौत, बांसवाड़ा में 2 और; गहलोत ने केंद्रीय जांच की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित महात्मा गांधी सरकारी अस्पताल में 6 जुलाई से 11 जुलाई 2026 के बीच मात्र पाँच दिनों में 6 प्रसूताओं की मौत हो गई, जबकि बांसवाड़ा में शुक्रवार को 2 और प्रसूताओं ने दम तोड़ा। सभी मामलों में महिलाओं की मृत्यु सी-सेक्शन (सिजेरियन) प्रसव के बाद हुई। अस्पताल प्रशासन ने स्वीकार किया है कि ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में संक्रमण पाया गया है, और यह जाँच चल रही है कि इस संक्रमण की इन मौतों में कोई भूमिका रही है या नहीं।
मुख्य घटनाक्रम
भीलवाड़ा में शुक्रवार को एक और महिला की मौत के बाद मृतक प्रसूताओं की संख्या 6 हो गई। मौतों की जानकारी मिलते ही प्रभावित ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी तत्काल रोक दी गई और एहतियातन कई मरीजों को अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया।
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, ओटी, सर्जिकल उपकरणों और मशीनों के नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल जाँच के लिए भेजे गए हैं। इसके अतिरिक्त, मृत महिलाओं को दिए गए इंजेक्शन के नमूने भी एकत्र किए गए हैं। मौतों के कारणों और संक्रमण नियंत्रण में हुई किसी भी चूक का पता लगाने के लिए पाँच सदस्यीय जाँच समिति का गठन किया गया है।
अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल
इस त्रासदी ने अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमियों को उजागर किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 सिजेरियन सर्जरी की जाती हैं, जबकि उपलब्ध सर्जिकल सेट केवल 5 हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम उपकरणों के साथ इतनी अधिक सर्जरी करने पर स्टरलाइजेशन (कीटाणु-मुक्त करने की प्रक्रिया) की गुणवत्ता से समझौता होने का जोखिम बढ़ जाता है, जो संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण बन सकता है।
बांसवाड़ा में भी दो मौतें
बांसवाड़ा में शुक्रवार को सी-सेक्शन सर्जरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत हुई — दोनों ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था। अधिकारियों के अनुसार, एक महिला एनीमिया (रक्त-अल्पता) से पीड़ित थी, जबकि दूसरी को उच्च रक्तचाप की समस्या थी। गौरतलब है कि इससे पहले कोटा, बीकानेर और जोधपुर में भी सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, जो राज्यव्यापी स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती हैं।
गहलोत की प्रतिक्रिया और केंद्रीय जाँच की माँग
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन मौतों को 'दिल दहलाने वाला और बेहद चिंताजनक' बताया। उन्होंने कहा, "भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत दिल दहलाने वाली और बहुत चिंताजनक है। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की खबरों के बावजूद सिजेरियन ऑपरेशन जारी रखना और केवल पाँच सर्जिकल सेट से 30-40 सर्जरी करना, साफ तौर पर भारी लापरवाही और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की बिगड़ती हालत को दिखाता है।"
गहलोत ने आरोप लगाया कि यह घटनाओं का सिलसिला यह बताता है कि भाजपा सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को टैग करते हुए माँग की कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तुरंत एक विशेषज्ञ टीम भेजे जो राजस्थान भर के अस्पतालों की स्थिति का आकलन करे और गहन जाँच करे।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जाँच जारी है और प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद संक्रमण व मौतों के सटीक कारणों का खुलासा होगा। अधिकारियों ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य सेवा में संसाधनों की कमी और संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल की अनदेखी पर एक बड़े प्रश्नचिह्न के रूप में सामने आया है।